लखनऊ (उपसंपादक सय्यद गुलाम हुसैन) – बीआरडी मेडिकल कालेज ऑक्सीजन कांड के बाद से सस्पेंड चल रहे डा.कफील खान ने कोरोना काल की दुहाई देते हुए सीएम योगी से अपना निलंबन वापस लेने की मांग की है। डा.कफील ने सीएम योगी को एक चिट्ठी लिखकर कहा है कि उनका 15 वर्षों का आईसीयू का अनुभव इस समय यूपी में कोरोना को लेकर मची महामारी में मरीजों के काम आ सकता है।
सीएम योगी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि इसी मामले में निलंबित किए गए बीआरडी के पूर्व प्राचार्य प्रो.राजीव मिश्र और मेंटिनेंस इंचार्ज डा.सतीश कुमार का निलंबन पिछले साल चार मार्च को वापस हो चुका है। लेकिन सिर्फ उनकी बहाली नहीं की जा रही। 36 से भी अधिक पत्र लिखने के बावजूद अधिकारी द्वेषपूर्ण ढंग से उनका निलंबन वापस नहीं कर रहे हैं। जबकि विभिन्न जांच अधिकारियों की रिपोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में उन्हें चिकित्सीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने लिखा कि उच्च न्यायालय ने सात मार्च 2019 और उच्चतम न्यायालय ने 10 मई 2019 को अपने आदेश में 90 दिनों के भीतर उनके निलंबन पर विचार करने को कहा था लेकिन 1300 से अधिक दिनों से वह निलंबित हैं।
डा.कफील ने कहा कि वह किसी अन्य हॉस्पिटल या व्यवसाय में काम नहीं कर रहे हैं। कोरोना महामारी के समय अपने देश के नागरिकों की सेवा करना चाहता हूं इसलिए मेरा निलंबन ख़त्म कर एक अवसर दें। चाहें तो महामारी की रोकथाम के बाद फिर से निलंबित कर दें।
2017 के अगस्त महीने में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में कथित रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने से 60 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, उनमें डॉक्टर कफील भी शामिल थे। पिछले साल उत्तर प्रदेश पुलिस ने रासुका यानी एनएसए लगाया गया था जिसके चलते डा.कफील आठ महीने तक जेल में रहे। डा.कफील पर भड़काऊ बयान देने के कई आरोप लगे। उनके खिलाफ गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बच्चों की मौत और कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज हैं। उन पर तीन बार एनएसए लगाया जा चुका है। हालांकि बाद में हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ लगे एनएसए को रद्द कर दिया था।
आपको याद दिला दें कि 10 जनवरी 2019, को नागरिकता विरोधी (संशोधन) अधिनियम (सीएए) विरोध प्रदर्शन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भाषण देने के बाद खान को जनवरी 2020 में अरेस्ट किया गया। बाद में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत आरोपित किया गया था।






