बेटियों के लिये खराब होते समाज का जिम्मेदार कौन?

    आर्टिकल सय्यद गुलाम हुसैन की कलम से

    क्या हर अपराध हर बलात्कार हर फ़साद की जिम्मेदारी सिर्फ़ सरकार की है ? या सिर्फ़ पुलिस की है ?
    मेरे इस लेख को पढ़ कर सोचियेगा के आज बच्चियों के लिये खराब होते हालात का जिम्मेदार कौन है ?
    “सरकार” “पुलिस प्रशासन” या फ़िर खुद “समाज” !!!
    बच्चियों के मामले में नाकामी सरकार की है! या प्रशासन की नाकामी है ! या फ़िर समाज की नाकामी है ?

    हमारे आप के बीच कोई इतनी खराब मानसिकता का आदमी रह रहा है जो छोटी बच्चियों में भी वासना तलाश रहा है और बलात्कार कर रहा है ! ऐसे वहशी लोगों के लिये बच्चियों की उम्र से भी कोई मतलब नहीं है एक साल से लेकर किसी भी उम्र की बच्ची को अपना शिकार बनाने में ज़रा भी नहीं हिचकते हैं! हमारे आप के ही बीच ऐसा आदमी रह रहा है जो अपनी वासना में अंधा हो कर बलात्कार कर रहा है, और मासूमों की जान लेने से भी नहीं हिचक रहा है !हमारे आप के ही बीच ऐसे लोग भी रह रहे हैं जो झुंड बना के बलात्कार कर रहे हैं!

    ध्यान रहे सरकार व पुलिस अपराधी को पकड़ कर सजा दे सकती है ! सरकार व पुलिस अपराध के खिलाफ भय बना सकती है ! पर सबके घर जा के संस्कार तो नही दे सकती! वो माँ बाप भाई दोस्त दे रहे हैं ! सरकार हर मर्द हर औरत के पीछे पुलिस नही लगा सकती कि अपराध होने के पहले रुक जाए ! हमारा दोस्त जब राह चलते किसी लड़की के फ़िगर पर फब्तियां कसता है चाल पे गाने गाता है तब हम खूब मजे लेते है रोका उसे कभी ??धड़ा धड़ अश्लील वीडियो एक दूसरे को व्हाट्सअप करते है, सोचा है कभी…..कि किस बात को बढ़ावा दे रहे हैं ? अपने इलाके की लड़की या लड़के का कोई एक वीडियो mms आ जाये 1 घण्टे में पूरे इलाके में बंट जाता है क्या ये छोटा अपराध है ? ? दूसरे की इज़्ज़त उतरते देखने मे कितना रस लेता है ये समाज। ऐसे वीडियोज़ की यूट्यूब पर लाइक्स लाखों में हैं ! कितना मजा आता है दूसरे के बहन बेटी के उतरते कपड़े देखने मे सोचा है किसी दिन अपने किसी करीबी रिश्ते का वीडियो आपके पास आ जाये तो…….!

    पर क्या करें हम , हम वो समाज हैं जिसमें ससुर जेठ देवर और पति भरी सभा मे द्रोपदी को नंगा होता देखते रहे थे ! इस काम में इस अपराध में ,मर्द, अकेले नही है । बाजार में मोहल्ले में माएं चाचियां मामियां भाभियाँ इकट्ठी हो कर (अपनी छोड़ कर) मुहल्ले की हर लड़की की फ़िगर से कमर तक कि कपड़े से लेकर जूती की हील के नोक तक की चर्चा करके लड़कों के साथ नाम जोड़ जोड़ कर रोज़ बलात्कार करती हैं। ये जो हम रोज़ रोज़ सामूहिक अपराध कर रहे हैं उसका जवाब कौन देगा ?

    हमने कहा कभी,कि भाभी ये चुगली बंद करो, मां ये सब मत बोलो, नहीं हम सपरिवार उस चुगली चूरन का मजा लेते हैं ऐसे तो हम समाज हैं । सब को उम्मीद है और सब चाहते हैं सरकार हर अपराध का जिम्मा ले । क्यों कि हर चुनाव में नेताओ की तरफ़ से ये कहा जाता है बहुत हुआ नारी पर अत्याचार हमारी सरकार बनने के बाद बच्चियों पर महिलाओं पर हो रहे अपराध और ज़ुल्म ओ सितम पर नये व सख्त कानून बनेंगे ताकि महिलाओं पर हो रही ज़्यादती कम हो सके ! पर क्या राजनीति से प्रेरित,बातें कह देने या कानून बना भर देने से हर बच्ची हर औरत की हिफ़ाज़त का जिम्मा सरकार का ही है ?

    क्या सिर्फ सख्त कानून से ये अपराध रुकेंगे ? चोरी डाका हत्या और बलात्कार के लिए सख्त से सख्त कानून हैं ! पर क्या अपराधी अपराध करने से पहले अन्ज़ाम के बारे में सोचता है ? नहीं सोचता है उसे तो बस जुनून सवार रहता है कि जो होगा देखा जाएगा पहले ये हवस,पहले ये वासना शांत कर लें ! अन्ज़ाम बाद में देखेंगे इस तरह से समाज में फैली गंदगी के अलावा इसकी एक वजह इस मामले में लचर कानून भी है! मासूम बच्चियों पर हो रहे अत्याचारों पर अपराधियों को हमारा कानून क्या सजा दे रहा है उस सजा से समाज में कितना भय पैदा हो रहा है ये हम सबको दिख रहा है। सही मायनों में कानूनी कार्यवाही में और अपराधियों को सजा मिलने में प्रतिक्रिया इतनी जटिल है कि काफी हद तक अपराधी को सजा मिल ही नहीं पाती है। जिसकी वजह से समाज में डर पैदा ही नहीं होता है नतीज़े में अपने देश में हर घंटे में एक बच्ची इन वहशी जानवरों का शिकार हो जाती हैं।
    आज बिगड़े समाज़ के हालात का जिम्मेदार कौन है ?
    ((समाज)) ? ((सरकार)) ? या ((पुलिस)) ?

    – सय्यद गुलाम हुसैन (७९७७०२३६२८)

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