- घर घर जलाए जाने चाहिए दीप।
- आडवाणी, जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती आदि की गैर मौजूदगी भी रणनीति का हिस्सा।
- जैसलमेर से सुरजेवाला ने जारी किया प्रियंका गांधी वाड्रा का राम नाम वाला बयान।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – सनातन संस्कृति को मानने वाले परिवार में जब कोई मांगलिक कार्य होता है, तब सबसे पहले गणेशजी को स्थापित निमंत्रण दिया जाता है। यह उम्मीद जताई जाती है कि अब गणेश जी महाराज घर के बाहर पहरा देंगे और आने वाली बाधाओं को दूर करेंगे। इसी मान्यता के चलते 3 अगस्त को अयोध्या में गणेशजी की स्थापना कर दी है। अब 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों से भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन होगा। जो लोग सनातन धर्म को मानते या इस धर्म में आस्था रखते हैं, उनके लिए भूमि पूजन समारोह बहुत मायने रखता है। यह बात अलग है कि कुछ लोग 5 अगस्त के कार्य्रम का विरोध कर रहे हैं। टीवी चैनलों पर बैठ कर ऊल जलूल तर्क दिए जा रहे हैं। किसी को भूमि पूजन के मुहूर्त पर ऐतराज है तो कोई इसे हिन्दू धर्म की ब्रांडिंग बता रहा है। चूंकि हमारा देश धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रित है, इसलिए किसी को भी विचार व्यक्त करने की आजादी है। कल तक जो लोग कहते थे कि अयोध्या में जन्म स्थल पर कभी भी मंदिर नहीं बन सकता, वो ही आज भूमि पूजन समारोह की आलोचना कर रहे हैं। सबको पता है कि अयाध्ेया में मंदिर निर्माण के लिए पांच सौ वर्षों से संघर्ष चल रहा है। इसके लिए लाखों लोगों ने अपना बलिदान दिया है। ज्यादा नहीं, मात्र दस वर्ष पहले तक मंदिर निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। लेकिन आज वो कल्पना हकीकत में बदल रही है। क्या यह सनातनधर्मियों के लिए बड़ी बात नहीं है? सनातन धर्म में राम नाम का विशेष महत्व है। शव यात्रा में भी राम नाम सत्य है का कथन बार बारकहा जाता है। सवाल किसी को श्रेय देने का नहीं है, सवाल यह है कि हम धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रित देश में शांति के साथ मंदिर निर्माण कर रहे हैं। अदालतों में मंदिर का विरोध करने वाले अयोध्या के अंसारी परिवार के सदस्य भी भूमि पूजन समारोह में भाग ले रहे हैं। परिवार का कहना है कि मंदिर बनने से अयोध्या का विकास होगा। देश-दुनिया के लोग अयोध्या आएंगे तो सभी को रोजगार मिलेगा। न्यूज चैनलों पर बैठकर कुछ लोग कितनी भी बकवास कर ले, लेकिन अंसारी की प्रतिक्रिया ही सबसे उपयुक्त है। जब बावरी मस्जिद के प्रमुख पक्षकार अंसारी परिवार ने ही मंदिर निर्माण पर खुशी जता दी है तो असदुद्दीन औवेसी की जहरीली प्रतिक्रिया क्या मायने रखती है? धर्म निरपेक्षता और लोकतंत्र की आड़ लेकर कुछ लोग मंदिर का विरोध कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी अयोध्या में मंदिर बन रहा है। यही वजह है कि 4 व 5 अगस्त को सनातनधर्मियों को अपने घरों पर दीप जलाने चाहिए। हम सब भाग्यशाली है कि हमारी आंखों के सामने भगवान राम का मंदिर अयोध्या में बन रहा हळै।
रणनीति का हिस्सा:
इन दिनों मीडिया में लालकृष्ण आडवानी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार आदि की भूमि पूजन समारोह में गैर मौजूदगी चर्चा का विषय बना हुआ है। सब जानते हैं कि मंदिर निर्माण का कार्य सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत हो रहा है। कोर्ट ने भले ही अयोध्या में विवादित भूमि हिन्दू पक्षकारों को दी, लेकिन 6 दिसम्बर को अयोध्या में गिराए ढांचे को कानून सम्मत नहीं माना। चूंकि ढांचा गिराए जाने का मामला अभी कोर्ट में चल रहा है, इसलिए मुकदमे से जुड़े लोगों को दूर रखा गया है। इसमें किसी नेता के प्रति उपेक्षा का भाव नहीं है। अभी तो सिर्फ भूमि पूजन हो रहा है। मंदिर निर्माण तक ऐसे कई अवसर आएंगे जब आडवानी, जोशी आदि नेताओं को भी बुलाया जाएगा।
प्रियंका का राम नाम वाला बयान:
5 अगस्त को होने वाले भूमि पूजन को लेकर कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बयान जारी किया है। इस बयान में प्रियंका ने राम नाम की महिमा बताई है। बयान में समारोह का किसी भी तरह विरोध नहीं किया गया है, लेकिन प्रियंका का बयान दिल्ली या लखनऊ से जारी करने के बजाए राजस्थान के जैसलमेर से पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने जारी किया। जैसजमेर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक विधायक ठहरे हुए हैं।







