- पुलिस का अपराधी की तरह कृत्य।
- दो लाख रुपए की रिश्वत से जुड़ा है मामला। दलाल को एक लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा।
- जीनगर ने चार माह पहले जोधपुर में ढाई करोड़ रुपए की कीमत वाला बंगला खरीदा।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – आमतौर पर सुनने में आता है कि फायरिंग या अन्य कोई हथकंडा अपनाकर अपराधी पुलिस की गिरफ्त से भाग निकला। लेकिन 3 अगस्त की रात को राजस्थान के श्रीगंगानगर में इसके उलट वाक्या हुआ। पुलिस के बड़े अधिकारी ने अपराधी जैसा कृत्य किया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एडीजी दिनेश एमएन ने बताया कि 3 अगस्त की रात को श्रीगंगानगर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमृत जीनगर के दलाल अनिल विश्नोई को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह रिश्वत किसी केस में आरोपी को राहत देने की एवज में ली जा रही थी। जीनगर के कहने पर इसी दलाल ने एक लाख रुपए पहले ले लिए थे। रात को दलाल की गिरफ्तारी के बाद एसीबी के डीएसपी जाकिर अख्तर जीनगर को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पहुंचे। जब जीनगर को पुलिस वाहन में बैठाया जा रहा था तभी उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मी को फायर करने के आदेश दे दिए। सुरक्षा कर्मी ने जो गोली चलाई वह डीएसपी अख्तर के कान के पास से निकल गई। डीजीपी दिनेश ने माना की गोली लगने पर अख्तर की जान को खतरा हो सकता था। मौके पर फायरिंग करवा कर अमृत जीनगर भाग गए। बाद में पुलिस के बड़े अधिकारियों के माध्यम से जीनगर को गिरफ्त में लिया गया। उन्होंने माना कि जीनगर का यह कृत्य बहुत गंभीर है। जानकारी के अनुसार जीनगर ने चार माह पहले ही जोधपुर के केशवनगर इलाके में ढाई करोड़ रुपए की कीमत का बंगला खरीदा है।
अपराधी जैसा कृत्य:
आम व्यक्ति कानून का पालन करे, इसकी जिम्मेदारी पुलिस की होती है। लेकिन यदि पुलिस ही अपराधी जैसा कृत्य करे तो फिर पुलिस की छवि पर सवालिया निशान लगता है। श्रीगंगानगर के एएसपी अमृत जीनगर का कृत्य किसी अपराधी से कम नहीं है। एएसपी स्तर का अधिकारी यदि कानून अपने हाथ में लेगा तो फिर आम व्यक्ति का क्या होगा? आम व्यक्ति से यदि हेलमेट और मास्क न लगाए तो जुर्माना वसूला जाता है। तब पुलिस कानून की ही दुहाई देती है। लेकिन अभी तो एएसपी स्तर के अधिकारी अपनी फोर्स पर फायरिंग करवा रहे हैं।







