चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के गृह जिले अजमेर में 5 दिन से बंद पड़ा है गैस आधारित शवदाह गृह।

  • कोरोना पॉजिटिव मृतकों के अंतिम संस्कार में परेशानी।
  • शवदाह गृह के रख रखाव के लिए ठेकेदार को किया जाता है 46 हजार रुपए प्रतिमाह का भुगतान।
  • अब कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित दखल देंगे।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार दावा कर रहे हैं कि कोरोना काल में सरकार मुस्तैद है और जरुरतमंदों को तत्काल राहत पहुंचाई जा रही है, लेकिन दूसरी ओर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के गृह जिले अजमेर में गत एक अगस्त से पुष्कर रोड स्थित गैस आधारित शवदाह गृह बंद पड़ा है। इससे कोरोना पॉजिटिव मृतक के अंतिम संस्कार में भारी परेशानी हो रही है। संभाग का सबसे बड़ा जेएलएन अस्पताल अजमेर में है, इसलिए तीन चार पॉजिटिव मरीजों की मृत्यु रोजाना हो रही है। कोविड-19 के नियमों की पालना करते हुए मृतको का अंतिम संस्कार गैस आधारित शवदाह गृह में ही किया जाता है। चूंकि गत एक अगस्त से यह शवदाह गृह बंद पड़ा है, इसलिए कोरोना पॉजिटिव मृतकों का अंतिम संस्कार विभिन्न श्मशान स्थलों में खुले में लकडिय़ों पर किया जा रहा है। इससे समय भी लग रहा है। अजमेर के अधिकांश श्मशान स्थल आबादी क्षेत्रों में बने हुए हैं। इसलिए पॉजिटिव मृतक के अंतिम संस्कार से संक्रमण का खतरा भी हो रहा है। जबकि गैस आधारित शवदाह गृह में संक्रमण का खतरा नहीं होता है। अजमेर जैसे शहर में जहां प्रतिदिन 3-4 पॉजिटिव मरीजों की मृत्यु हो रही है, उस शहर में पिछले पांच दिनों से शवदाह गृह बंद पड़ा हो तो मुख्यमंत्री के दावों की हकीत का अंदाजा लगाया जा सकता है। दिखाने को बड़े बड़े अधिकारी अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं, लेकिन ऐसी अधिकारियों की सक्रियता के बाद भी पांच दिन से शवदाह गृह बंद पड़ा है। यह तब है जब अजमेर विकास प्राधिकरण अहमदाबाद की फर्म अल्फा इक्यूपमेंट को गैस आधारित शवदाह गृह के रख रखाव के लिए प्रतिमाह 46 हजार रुपए का भुगतान करता है। पिछले दो वर्ष से प्राधिकरण ने रख रखाव के नाम पर अहमदाबाद की फर्म को 11 लाख रुपए से भी ज्यादा का भुगतान कर दिया है। गंभीर बात तो यह है कि प्राधिकरण इसी फर्म से दो वर्ष पहले गैस आधारित शवदाह गृह बनवाया था, तब 95 लाख रुपए का भुगतान किया था। शवदाह गृह के निर्माण के बाद कोरोना काल में यह पहला अवसर रहा, जब शवदाह गृह का उपयोग किया गया। सामान्य दिनों में इस शवदाह गृह का उपयोग नहीं हो रहा था। क्योंकि सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं के चलते परिजन लकडिय़ों पर ही अंतिम संस्कार करते रहे। यानि निर्माण के बाद जब शवदाह गृह की जरुरत हुई तो यह तकनीक फेल हो गई। पांच दिनों से शवदाह गृह बंद होने से संबंधित फर्म और प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्राधिकरण के अधिकारियों की रुचि अहमदाबाद की फर्म को बगैर कार्य के प्रतिमाह 46 हजार रुपए का भुगतान करने में तो हैं, लेकिन कोरोना काल में शवदाह गृह की तकनीकी खराबी को दूर करने में नहीं है।
अब कलेक्टर दखल देंगे:
हालांकि स्थानीय समाचार पत्रों में शवदाह गृह के बंद होने के समाचार प्रतिदिन प्रकाशित हो रहे हैं, लेकिन इन खबरों का प्राधिकरण के अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है। 6 अगस्त को जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित का कहना रहा कि अब वे मामले में दखल देंगे। कोरोना काल में शवदाह गृह को जल्द ठीक करवाया जाएगा।
नगर निगम ले जिम्मेदारी:
अजमेर विकास प्राधिकरण की आयुक्त रेणु जयपाल ने 4 अगस्त को नगर निगम के आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि गैस आधारित शवदाह गृह के संचालन और रख रखाव की जिम्मेदारी ली जाए। पत्र में कहा गया है कि शवदाह गृह के संचालन का काम निगम का ही है। प्राधिकरण की ओर से पूर्व में भी ऐसे पत्र लिखे गए थे, लेकिन निगम ने अभी तक भी शवदाह गृह का चार्ज नहीं लिया है। नगर निगम और प्राधिकरण की आपसी खींचतान से भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। एक विभाग दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डालने का काम कर रहा है। इस बीच प्राधिकरण के सहायक अभियंता मनीष मिर्धा का कहना है कि कार्य में लापरवाही बरतने के लिए अहमदाबाद की फर्म पर जुर्माना लगाया जाएगा।

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