- अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर में देशभक्ति और विकास का माहौल।
- अब्दुल्ला और मुफ्ती के परिवारों से सरकारी सुविधाएँ भी वापस ली जाएं।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 23 अक्टूबर को पीडीपी की प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जब जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली और प्रदेश का झंडा वापस नहीं होता, तब तक मैं भारत के तिरंगे को भी हाथ में नहीं लूंगी। इससे पहले पूर्व सीएम फारुख अब्दुल्ला ने कहा था कि 370 की बहाली के लिए हम चीन की मदद भी लेने को तैयार हैं। सब जानते हैं कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हुए 15 माह गुजर चुके हैं। इन 15 माह में जम्मू कश्मीर के हालात बहुत बदल चुके हैं, लेकिन फारुख और महबूबा को शायद बदले हुए हालातों की जानकारी नहीं है।
फारुख ने चीन वाला बयान 15 दिन पहले दिया था, लेकिन कश्मीर में पत्ता भी नहीं हिला। अब महबूबा ने 13 अक्टूबर को ही नजरबंदी से बाहर आई है, इसलिए जोश में हैं। थोड़े दिन में महबूबा को भी कश्मीर के बदले हालातों का अंदाजा हो जाएगा। फारुख और महबूबा के ऐसे बयानों का अब कश्मीरियों पर कोई असर नहीं होता है। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीरियों को भी अहसास हो गया है कि पिछले 70 वर्षों में अब्दुल्ला और मुफ्ती खानदानों ने उन्हें लूटा है। इन दोनों खानदानों के सदस्य ने ही कश्मीर पर राज किया है। लोकतंत्र का चेहरा लगाकर लुटेरों की भूमिका निभाई है। 
फारुख अब्दुल्ला के पिता और बेटे तक जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे। इसी प्रकार महबूबा और उनके पिता भी मुख्यमंत्री रहे। जब कभी मुख्यमंत्री नहीं बने तो केन्द्र में मंत्री बन गए। इन दोनों खानदानों ने भारतीय राजनीति का जमकर मजा जिया। इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि भारत में इतने मजे लेने के बाद भी इन खानदानों की हमदर्दी पाकिस्तान और चीन के साथ है। यह वही महबूबा है जिसने कहा था कि अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ की गई तो जम्मू कश्मीर में तिरंगे को कंधा देने वाला भी नहीं मिलेगा। अब महबूबा अपनी आंखों से देख ले कि अनुच्छेद 370 से छेड़छाड़ ही नहीं बल्कि लाल चौक में ही नहीं बल्कि पूरे जम्मू कश्मीर में भारत का तिरंगा शान से लहर रहा है।
अब कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी भी नहीं होती। सब जानते हैं कि फारुख अब्दुल्ला ने भी एक बार कहा था कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत के बाप का नहीं है। अब फारुख को भी अहसास हो रहा है कि पीओके को बचाना पाकिस्तान के बस में नहीं है। तभी तो जम्मू कश्मीर में 370 की बहाली के लिए फारुख अब्दुल्ला चीन की मदद मांग रहे हैं। फारुख भी समझते हैं कि जब भारत ने जम्मू कश्मीर से आतंकवाद समाप्त कर पाकिस्तान को खदेड़ दिया है, तब पाक के कब्जे वाले कश्मीर को भी ले ही लिया जाएगा। असल में कश्मीरियों के सामने अब्दुल्ला और मुफ्ती खानदानों की पोल खुल गई है। अब यदि ऐसे खान दान पाकिस्तान में बैठ कर भड़काने वाले बयान देेंगे तो भी भारत के कश्मीरियों पर कोई असर नहीं होगा। कश्मीरियों को अब सरकार की सभी योजनाओं का लाभ भी मिलने लगा है। जबकि कश्मीरी पाकिस्तान के हालात भी देख रहे हैं। न जाने किस रात पाकिस्तान में सैन्य शासन लागू हो जाए। अब जम्मू कश्मीर की सरकार को चाहिए कि अब्दुल्ला और मुफ्ती खानदान के सदस्यों ने जो सरकारी सुविधाएं और सुरक्षा ले रखी है उसे तत्काल समाप्त किया जाए। देशद्रोहियों को कभी सरकारी सुविधा नहीं मिलनी चाहिए।







