
Ethical Hacker and Digital Forensic Expert
“‘टू बीट हैकर यू नीड तू थिंक लाइक हैकर” हम जब यह नाम सुनते हैं हैकिंग का तब हमें ख्याल आता है क्राइम्स के बारे में जैसे कि फाइनेंशियल फ्रॉड, फिशिंग, अकाउंट हैकिंग, etc आज के एरा में देखा जाए तो हैकिंग से होने वाले साइबर क्राइम बहुत बढ़ गए हैं. आए दिन अखबारों में खबर होती है बैंक फ्रॉड, किसी का अकाउंट हैक कर लिया गया है, आज से कुछ महीनों पहले हमने ट्विटर अकाउंट हैक देखा था. तो जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी बढ़ते जा रही है वैसे-वैसे क्राइम भी बढ़ते जा रहे हैं पहले एक एरा में क्या होता था क्राइम फिजिकली होते थे जैसे कि चोर चोरी करना, डाका डालना, खून करना तो यह सब जो भी क्राइम है वह फिजिकली होते थे. लेकिन अब के यह डिजिटल वर्ल्ड में सारे क्राइम अब कंप्यूटर से हो रहे हैं इंटरनेट से हो रहे हैं. आज भी चोरी हो रही है कल भी चोरी हो रही थी बस आज के चोरी करने के तरीके बस डिजिटल हो गए हैं.
पहले फिजिकल ही थे अब डिजिटल चोरी हो रहे हैं. आगे आने वाले सालों में सारे क्राइम्स डिजिटल हो जाएंगे. तो आज यह आर्टिकल लिखने का मेरा मेन मोटिव है कि अब तक के सारे हैकिंग से होने वाले साइबर क्राइम को आप जाने और उस से बचें.
सबसे पहले यह समझते हैं कि हैकिंग क्या होती है. आसान भाषा में समझे तो हैकिंग का मतलब आपके कंप्यूटर से या इंटरनेट के इस्तेमाल करके आप कोई इलीगल एक्टिविटी कर रहे हो बिना किसी यूज़र के परमिशन लिए बिना उसे हम हैकिंग कहते हैं. जैसे एक छोटा सा उदाहरण से मैं समझाने की कोशिश करता हूं जैसे आप किसी का फोन लेते हो बिना परमिशन लेकर और आप उसके फोन में देख रहे हो कोई एक्टिविटी कर रहे हो तो यह हैकिंग होगा. क्योंकि हमने परमिशन नहीं लिया जिसका फोन था उसके ऑनर का परमिशन नहीं लिया एंड उसके फोन में छेड़खानी कर रहे हैं. यह तो एक छोटा सा एग्जांपल था लेकिन अब टेक्नोलॉजी बढ़ रहा है तो अटैक भी बढ़ रहे है. और बहुत एडवांस अटैक हो रहा है. अभी के टेक्नोलॉजी में लोग दूर देश में बैठकर आपका फोन हैक कर सकते आपका कंप्यूटर हैक कर सकते आपका नेटवर्क हैक कर सकते आपका वेबसाइट हैक कर सकते हैं. इतना अब भी टेक्नोलॉजी में बढ़ावा हुआ है जैसे हम जानते हैं कि टेक्नोलॉजी बढ़ रही है तो साइबरक्राइम भी बढ़ रहा है तो उसे रोकने के लिए भी हैकर्स की जरूरत पड़ती है जिसे हम एथिकल हैकर बोलते हैं. अभी एथिकल हैकर क्या होते हैं जैसे हमने देखा हैकर क्या होते हैं जो बिना किसी यूज़र के परमिशन लेकर उनके फोन को उनके कंप्यूटर्स को उनके नेटवर्क्स को एक्सेस कर लेते हैं. उसे हम हैकर्स बोलते हैं. लेकिन एथिकल हैकर्स परमिशन के साथ काम करते हैं. एथिकल हैकर्स वह होते हैं जो किसी भी कंप्यूटर के मोबाइल के ओनर्स की परमिशन लेकर उसको टेस्ट करते हैं. उन्हें एथिकल हैकर्स बोला जाता है. हैकिंग के मेन 3 टाइप होते हैं जैसे कि पहला व्हाइट हट हैकर दूसरा ग्रे हट हैकर्स तीसरा ब्लैक हट हैकर. 1) व्हाइट हट हैकर यह लोग होते हैं जो ऑनर की परमिशन लेकर सारा काम करते हैं. और उनको रिपोर्ट करते हैं. और सारे लीगल वे में काम करते हैं कोई इल्लीगल काम नहीं करते हैं. इन्हें हम पेनिट्रेशन टेस्ट भी बोलते हैं. यह लोग ऐसे भी होते हैं कि जो गवर्नमेंट के लिए काम करते हैं, जो किसी कंपनी के लिए काम करते हैं तो जो अच्छे काम करते हैं जो हैकिंग को लीगल वे में लेकर काम करते हैं उन्हें हम व्हाइट हट हैकर बोलते हैं. 2) ब्लैक हट हैकर्स यह लोग होते हैं जो बस इल्लीगल काम करते हैं जैसे कि फ्रॉड, अकाउंट हैकिंग,डाटा थेफ्ट, डाटा ब्रीच, वेबसाइट हैकिंग करते हैं बिना किसी और के परमिशन लेकर इन हैकर को ब्लैक हट हैकर बोलते हैं. 3) ग्रे हट हैकर यह लोग होते हैं जो लीगल और इल्लीगल दोनों काम करते हैं. यह ब्लैक और वाइट का मिक्सचर होते हैं जैसे कि यह लोगों के सामने दिखावा करते हैं कि हम व्हाइट हट हैकर है. लेकिन अपने पर्सनल स्पेस में यह लोग ब्लैक हट हैकर वाले काम करते हैं. अभी तक हमने बस क्राइम की बात कर रहे थे और 3 टाइप्स देखे हैं. अब हैकिंग का स्कोप क्या है इंडिया में या सिक्योरिटी पॉइंट ऑफ व्यू से हैकिंग को देखते हैं
जैसे कि हमने देखा कि अब टेक्नोलॉजी रफ्तार से बढ़ रही है तो उसी रफ्तार से साइबर क्राइम भी बढ़ रहा है. तो इसे रोकने के लिए हमें एथिकल हैकर की जरूरत पड़ती है. एथिकल हैकर के लिए बहुत स्कोप है क्योंकि अब हर चीज डिजिटल हो रही है आगे जाकर सारी चीजें ऑनलाइन हो जाएगी. तो उसको क्राइम प्रूफ करने के लिए एथिकल हैकर्स की जरूरत होगी. तो एस एन सिक्योरिटी रीजन के लिए एथिकल हैकिंग सीखना जरूरी है. क्योंकि अब के एरा में कोई भी सिक्योरिटी या कोई भी डिवाइस हंड्रेड परसेंट(100%) सिक्योर नहीं है अब हम बेसिक प्रिकॉशन देखते हैं जैसे कि 1) कोई भी ट्रांजैक्शन जब हम करते हैं तो खुद के फोन डाटा यूज़ करके करना चाहिए. अगर आपने वाईफाई यूज़ करके अगर आप ट्रांजैक्शन करते हो तो हो सकता है आप मैन इन द मिडिल अटैक (MITM) के शिकार हो सकते हो. यह अटैक में आपने जो भी आपका बैंक डिटेल डाला होगा वह सारी डिटेल्स हैकर किसके पास ट्रांसफर हो जाती है नेटवर्क के अंदर 2) कोई भी अकाउंट या कोई पासवर्ड आप डालते हो तो आप खुद के मोबाइल डाटा यूज़ करके डालना चाहिए 3) पब्लिक वाईफाई कनेक्ट होकर कोई भी पर्सनल डिटेल सेंड या रिसीव नहीं करना चाहिए 4) किसी भी अननोन पर्सन को आपका फोन यह आपका कंप्यूटर नहीं देना चाहिए 5) हमेशा आपका डिवाइस पासवर्ड प्रोटेक्टेड होना चाहिए 6) कोई भी अननोन एप्लीकेशन जो मेल द्वारा व्हाट्सएप द्वारा या कोई भी सोशल मीडिया द्वारा अगर आप इंस्टॉल कर रहे हो तो आपको यह नहीं करना चाहिए क्योंकि उस ऐप में ट्रोजन या मालवेयर हो सकता है जिससे आपका डिवाइस हैक हो सकता है 7) किसी भी अनवेरीफाइड लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए अगर आप ऐसे करते हो तो आप कोई और वेबसाइट पर रीडायरेक्ट हो सकते हो या फिर आपके फोन में कोई ट्रोजन वायरस वह अपने आप इंस्टॉल हो जाएंगे आपको पता भी नहीं चलेगा 8) पासवर्ड हमेशा कैपिटल लेटर, नंबर, सिंबॉल, स्मॉल लेटर्स, का कॉन्बिनेशन रखना चाहिए ताकि कोई पासवर्ड क्रैक करने की कोशिश भी करें तो आपका पासवर्ड आसानी से क्रैक नहीं होगा 9) कोई भी अपनी पर्सनल इंफॉर्मेशन पर्सनल फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करना चाहिए क्योंकि हैकर्स इसका गलत इस्तेमाल करते हैं 10) अगर आपको सिक्योर करना आपके फोन को या आपके कंप्यूटर को तो आपके पास एक पावरफुल एंटीवायरस यूज़ करना चाहिए.






