लखनऊ (सह-संपादक-उ.प्र.सरफराज जाहिद) – दवा बीमारी में काम करती है बबा में भी काम कर जाती है। 2020 तक बीमारी रही जिस पर काबू पा लिया गया लेकिन वर्तमान में बीमारी नही वायरस कहा जा सकता है।हवा में इतना जहर खुल चुका है कि मरीज के ईलाज के लिए कृतिम हवा यानी ऑक्सीजन खरीदनी पड़ रही है। हवा में घुले जहर का प्रकोप इतना भयंकर हो गया है कि कृतिम हवा यानि ऑक्सीजन मिलने से पहले ही मानव जीवन तेजी से काल के गाल पहुंचने लगा। क्यूँ, कहाँ और कैसे यह सब तेजी से फैल रहा, यहाँ तक की मानव जाति अंधविश्वास की ओर दौड़ लगा कर कभी थाली तो कभी ताली उस पहर में बजाने लग रही है जिस पहर में बजाना ग्रंथो में मना है। आखिर सारी की सारी वैग्यानिकता धरी की धरी रह गई क्यूंकि यह पता लगाने में नाकाम है कि यह सब क्या है या फिर कुछ न बोलने का प्रेशर।
मीडिया की सुर्खियों पर गौर करें तो, मोबाइल रेडिएशन में माइक्रोवेव्स होती हैं, जो बॉडी के सेल्स में वाइब्रेशन करता है। यह वाइब्रेशन कोशिकाओं के अवयवों को नष्ट कर देता है। इसके साथ ही रेडिएशन से डायबिटीज, बीपी, सिर दर्द, सिर में झनझनाहट, नींद न आना, आंखों में ड्राइनेस, सहित कैंसर और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी होने की आशंका होती है। डिजिटल इन्डिया की ओर कदम बढ़ाते हुए हम मोबाईल इन्टरन्ट में 1जी डेटा स्पीड से 2 जी, 3 जी और 4 जी पर बहुत तेज चल रहे हैं लेकिन इससे भी अधिक तेज चलने के प्रयास में हमारी भावनाओं को समझ 5 जी स्पीड ट्रायल आखिर शुरु हो ही गया। तेज इन्टरनेट की चाल पर दूसरो की मौते देखते देखते हम खुद किस महामारी का शिकार हो गए पता ही नही चला
जबलपुर से पत्रिका न्यूज के अनुसार 2 जी, 3 जी और अब 4 जी…जिस तरह इंटरनेट एक्सेस करने की स्पीड में इजाफा हो रहा है, वहीं स्पीड का लोभ लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रहा है। मोबाइल टावर के रेडिएशन से गंभीर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। यदि सरकार इस पर लगाम कसे, तो इसके असर को कम किया जा सकता है। यह बात मुम्बई आईआईटी के प्रोफेसर डॉ. गिरीश कुमार ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कही। मोबाइल टावर रेडिएशन विषय पर काम कर रहे प्रो० गिरीश ने बताया कि मोबाइल टावर अधिक वोल्ट वाले लगाए जाते हैं, जो कि दोगुनी गति से सेहत पर वार करते हैं। पत्रिका न्यूज की माने तो साल 2019 में ही 5 जी सिम लॉन्च होने का यूजर्स को काफी लंबे समय से इंतजार रहा है। यही वजह है कि मुकेश अंबानी ने 5 जी की टेस्टिंग शुरू कर दी है ताकि यूजर्स को जल्द से जल्द 5 जी की सेवा दी जा सके।
इस बीच खबर यह भी आ रही थी कि अगर 5 जी नेटवर्क आता है तो उससे निकलने वाले रेडिएशन से पक्षियों की जान चली जाएगी। एैसी खबर है कि नीदरलैंड में 5 जी सर्विस की टेस्टिंग होने के दौरान करीब 300 पक्षियों की मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक 5 जी की टेस्टिंग के दौरान पंक्षी आस-पास के पेड़ों से गिरने लगे और इस दौरान उनकी मौत हो गई। ऐसे में सवाल यह उठाता है कि भारत में 2019 की पहली तिमाही में नई दिल्ली में 5 जी नेटवर्क ट्रायल में पक्षियों की सुरक्षा के लिए सरकार क्या अपनाया। हालांकि देश को बढ़ती तकनीक से जोड़ना जरूरी है, लेकिन रेडिशन की वजह से अगर पक्षियों की जान जा सकती है तो मनुष्यों पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा, यह एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार मोबाईल टावर 40 वाट फ्रिकबेंसी पर लगाए जा रहे हैं जो घातक है जबकि 10 वाट से बेहतर सुविधाए दी जा सकती है हैं लेकिन मोबाईल कम्पनियों को इसकी कास्ट अधिक पड़ सकती है। तो क्या सच में मोबाईल टाबर से निकलने वाला रेडिएशंस ही हवा में घुल रहा है। ऐसा माना जाता है कि 5 जी ट्रायल नेटवर्क मेबाईल टावरो से हाई फ्रिकवेंस रेडिएशंस खूब हवा में फैल रहा है और इसका अन्दाजा इस चर्चा से भी लगाया जा सकता है कि अब आम तौर पर बॉडी को कोई भी चीज करंट लगा रही है। चर्चा है कि जहरीली हवा के कारण जहाँ गला खुस्क होने के साथ ही सांस लेने में परेशानी बढ़ रही है और नसो में चलता खून भी सूखना चालू हो गया।






