जयपूर (एस.पी.मित्तल) – परिवार में बेटियां बेटो से कम नहीं होती है, जो माता-पिता बेटों को प्राथमिकता देते हैं या परिवार में बेटा चाहते हैं। उन्हें अजमेर में तैनात पुलिस निरीक्षक सुशीला विश्नोई के परिवार से सबक लेना चाहिए। श्रीमती विश्नोई के दो पुत्रियां ही हैं। बड़ी पुत्री परी विश्नोई का चयन चार अगस्त को आईएएस के पद पर हो गया है। यूपीएससी में सिविल सेवा का जो परिणाम जारी किया है, उसमें परी ने देशभर में 38वां स्थान प्राप्त किया है। यूं तो सुशीला विश्नोई अजमेर के जीआरपी थाने की इंस्पेक्टर हैं। लेकिन बेटी के आईएएस में चयन होने के बाद पुलिस अधीक्षक से लेकर बड़े बड्े अधिकारी बधाई दे रहे हैं। विश्नोई के मोबाइल की बेटरी भी खत्म हो गई है। स्वयं का फोन बंद हो जाने पर विश्नोई अब थाने के जवानों के फोन पर बधाईयां स्वीकार कर रही है। रिजल्ट आने के बाद से ही श्रीमती विश्नोई को समय नहीं मिल रहा है। उन्हें इस बात का गर्व है कि बेटी ने नाम रोशन किया है। श्रीमती विश्नोई के पति मनीराम विश्नोई अजमेर में ही राजस्व मंडल में वकालात करते हैं। छोटी बेटी पायल विश्नोई भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई कर रही है। सुशीला का सपना है कि पायल को मजिस्ट्रेट बनाया जाए। परी विश्नोई तीसरी बार की परीक्षा में सफल हुई हैं। दोबार की परीक्षा में सफल नहीं होने के बाद भी परी ने हिम्मत नहीं हारी। सुशीला ने बताया कि उन्होंने हमेशा अपने दोनों बेटियों की हौंसला अफजाई की। वर्ष 1999 में उपनिरीक्षक के पद पर भर्ती होने के बाद सुशीला ने सारा ध्यान दोनों बेटियों की पढ़ाई लिखाई पर लगाया। सुशीला ने जो मेहनत की उसी का परिणाम है कि उनकी बेटी आईएएस बनी हैं। आईएएस में चयन होने के बाद परी ने भी अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया है। परी का कहना रहा कि पिता ने वकालत का काम छोड़ कर दिल्ली में साथ रहना मंजूर किया। भले ही उनकी माता पुलिस की नौकरी में व्यस्त रही, लेकिन हम दोनों बेटियों को लेकर हमेशा चिंतित रही। माता-पिता ने जो त्याग किया, उसी का परिणाम है कि आज मैं आईएएस बन पाई हूं।







