- चार दिन में तीन बार मुख्यमंत्री जयपुर-जैसलमेर के बीच दौड़े।
- होटलों में बंधक बने मंत्रियों व विधायकों के वेतन भत्ते रोकने से हाईकोर्ट का इंकार।
- राज्यपाल से जुड़ी याचिकाएं भी खारिज।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान की राजनीति में चार अगस्त को तब नया मोड़ आ गया, जब सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि अब किसी भी विधायक की खरीद फरोख्त के प्रकरण में आरोपों से घिरे व्यक्तियों पर राजद्रोह का मामला नहीं चलाया जाएगा। दायर प्रार्थना पत्र में एसओजी की ओर से कहा गया कि तीन एफआईआर को एसीबी कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाए। मालूम हो कि सचिन पायलट के नेतृत्व में तीन निर्दलीय सहित 22 विधायकों के दिल्ली चले जाने पर सरकार ने राजद्रोह वाले मुकदमे दर्ज किए थे। कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा, निर्दलीय विधायक सुरेश टाक, ओमप्रकाश हुडला, खुशवीर सिंह आदि को नामजद भी किया गया। इन विधायकों और प्रकरण से जुड़े भाजपा नेताओं पर धारा 124ए लगाई गई। इस धारा को आधार बनाकर ही विधायक भंवरलाल शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट से मांग की गई कि मामले की जांच एनआईए से करवाई जाए, क्योंकि राजद्रोह के आरोपों की जांच किसी राज्य की पुलिस नहीं कर सकती है। हाईकोर्ट का कोई निर्णय आता इससे पहले ही निचली अदालत ने एसओजी ने राजद्रोह की धारा हटाने का प्रार्थना पत्र जारी कर दिया। असल में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राज्य सरकार नहीं चाहती कि विधायकों की खरीद फरोख्त के मामले की जांच कोई केन्द्रीय जांच एजेंसी करे। जानकार सूत्रों के अनुसार सरकार ने पहले आनन-फानन में राजद्रोह की धारा जोड़ दी। लेकिन जब एनआईए की जांच का डर सताने लगा तो राजद्रोह की धारा हटाने का प्रस्ताव कर दिया। इससे प्रतीत होता है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में गहलोत सरकार बहुत हड़बड़ी में है।
गहलोत की जयपुर-जैसलमेर के बीच दौड़:
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे सचिन पायलट की बगावत के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में सौ विधायक गत 10 जुलाई से होटलों में रह रहे हैं। इन सभी विधायकों को 31 जुलाई से जयपुर से जैसलमेर की होटल में शिफ्ट कर दिया गया। अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जयपुर-जैसलमेर के बीच दौड़ लगा रहे हैं। 31 जुलाई को अपने विधायकों को जैसलमेर की होटल में शिफ्ट करने के बाद 1 अगस्त को गहलोत पुन: जयपुर आ गए। 2 अगस्त को सुबह सरकारी बैठकें लेने के बाद शाम को ही जैसलमेर पहुंच गए। 3 अगस्त को होटल सूर्यागढ़ में विधायकों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाने के बाद सूरज ढलने से पहले जयपुर आ गए। 4 अगस्त को भी गहलोत जयपुर में लगातार बैठकें कर रहे हैं। जयपुर-जैसलमेर की दौड़ के बीच सरकार यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि कोरोना काल में प्रदेश की जनता का भी ख्याल रख रही है। भले ही विधायकों को होटलों में सख्त पहरे में रखा जा रहा हो, लेकिन मुख्यमंत्री और सरकार के कुछ चुनिंदा मंत्री सरकारी कामकाज करते नजर आ रहे हैं। चार दिन में तीन बार जयपुर-जैसलमेर का सफर मुख्यमंत्री ने सरकारी प्लेन से किया है।







