तीन साल की काव्या अब सुनने लगेगी। अजमेर के मित्तल अस्पताल में सामाजिक सरोकार के तहत डा. रचना जैन ने किया सफल ऑपरेशन।

  • 8 लाख रुपए के खर्च वाला कॉकलीयर इम्लांट का ऑपरेशन सरकारी अस्पतालों में मुफ्त होता है।
  • लेकिन अजमेर में दो वर्ष में मात्र 9 ऑपरेशन हुए।
  • जरुरतमंदों की मदद के लिए भामाशाहों और स्वयं सेवी संगठनों को आगे आना चाहिए।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कई परिवारों में देखा जाता है कि खूबसूरत चेहरे वाले बच्चे मूक-बधिर (गूंगे बहरे) होते हैं। जिन परिवारों में ऐसे बच्चे होते हैं, उन परिवार के माता-पिता की पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है। धनाढ्य परिवार तो महंगा ऑपरेशन करवा लेते हैं, लेकिन गरीब माता-पिता अपने गूंगे बहरे बच्चे को सिर्फ निहारते रहते हैं। ऐसे ही एक गरीब माता-पिता नागौर के भकरी गांव निवासी पुनीत जाटोलिया और उनकी पत्नी हेमा ने अपनी तीन वर्षीय मासूम बेटी काव्या के साथ अजमेर के पुष्कर रोड स्थित मित्तल अस्पताल की नाक कान व गले रोग की विशेषज्ञ डॉ. रचना जैन से मुलाकात की। पुनीत जाटोलिया गांव में ही शूमेकर है। जाटोलिया परिवार की स्थिति नहीं थी कि वह अपनी बेटी का बहरापन दूर करने के लिए 8 लाख रुपए की राशि खर्च कर सके। लेकिन डॉ.रचना जैन ने जब मासूम काव्या की ओर देखा तो उनका मातृत्व प्रेम जाग गया। डॉ. रचना ने शूमेकर की बेटी को अपनी बेटी की तरह देखा और निश्चय किया कि मित्तल अस्पताल के प्रबंधन से बात कर काव्या के ऑपरेशन का खर्च वे स्वयं जुटाएंगी। डॉ. रचना ने कोई सात लाख रुपए की राशि अपने मित्रों से एकत्रित की और ऑस्ट्रेलिया की कंपनी का कॉकलीयर इम्लांट खरीदा। मित्तल अस्पताल के प्रबंधन के सहयोग से काव्या का सफल ऑपरेशन किया और 8 सितम्बर को काव्या को अस्पताल से छुट्टी दे दी। डॉ. रचना का कहना है कि अब अगले कुछ ही दिनों में काव्या सुनने लगेगी। उन्होंने बताया कि कान के नीचे की हड्डी की सर्जरी कर उपकरण फिट किया जाता है। यह उपकरण आवाज सुनने में मदद करता है। जहां तक काव्या के बोलने का सवाल है तो जब सुनने की ताकत आ जाती है, तब अभ्यास से ही बच्चे बोलने लग जाते हैें। यानि अगले एक दो साल में काव्या का गूंगा और बहरपान दूर हो जाएगा। काव्या भी सामान्य बच्चों की तरह आवाज सुनकर जवाब दे सकेगी। डॉ. रचना ने बताया कि यदि मूक बधिर बच्चों का ऑपरेशन 2 से 5 वर्ष की उम्र में करवा लिया जाए तो ज्यादा सफल होता है। डॉ. रचना ने यह भी कहा कि ऐसे महंगे ऑपरेशन के लिए भामाशाहों और स्वयं सेवी संगठनों को आगे आना चाहिए। ताकि गरीब परिवारों के मासूम बच्चे भी सुन और बोल सके। वहीं मित्तल अस्पताल के निदेशक डॉ. दिलीप मित्तल और मनोज मित्तल ने बताया कि अस्पाल प्रबंधन सामाजिक सरोकार से जुड़े कायों के लिए हमेशा तत्पर रहता है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से भी ज़रूरतमंदों का इलाज किया जाता है। काव्या के ऑपरेशन को सफल बनाने में मित्तल अस्पताल के डॉ. राजीव पांडे, डॉ. गरिमा, डॉ. रमाकांत, डॉ. प्रशांत माथुर, पुष्परंजन,ओम प्रकाश, अशोक बेनीवाल, यूसुफ आदि की भी सक्रिय भूमिका रही। काव्या के ऑपरेशन और अस्पताल के सामाजिक सरोकारो के बारे में और अधिक जानकारी जनसम्पर्क अधिकारी संतोष गुप्ता से मोबाइल नम्बर 9116049809 पर ली जा सकती है।
सरकारी अस्पताल में दो वर्ष में 9 ऑपरेशन:
मूक बधिरों के लिए 8 लाख रुपए के खर्च वाला कॉकलीयर इम्लांट का ऑपरेशन नि:शुल्क किया जाता है। अजमेर के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के नाक, कान व गला रोग के विशेषज्ञ डॉ. विक्रांत ने बताया कि मुख्यमंत्री सहायता कोष से उपकरण खरीदने की राशि उपलब्ध करवाई जाती है। विगत दिनों अस्पताल में एक साथ सात बच्चों का ऑपरेशन किया गया। इस कार्य में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीर बहादुर सिंह और अधीक्षक अनिल जैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। गत वर्ष भी दो ऑपरेशन किए गए थे। राज्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद ही ऑपरेशन किए जाते हैं।

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