अजमेर (एस.पी.मित्तल) – 24 जून को अजमेर के जिला कलेक्टर विश्वमोहन शर्मा की अध्यक्षत में हुई बैठक में धार्मिक स्थलों को खोलने को लेकर आपसी विचार विमर्श हुआ। इस विचार विमर्श के आधार पर ही प्रशासन अब धार्मिक स्थलों को खोलने पर एक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजेगा। अनलॉक-01 का समय आगीम 30 जून को समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि एक जुलाई से शुरू होने वाले अनलॉक-02 में लोगों को और राहत मिलेगी। बैठक में हिन्दुओं की आस्था के केन्द्र पुष्कर के पवित्र सरोवर में श्रद्धालुओं के स्नान करने और अजमेर में विश्वविख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में जायरीन के प्रवेश की अनुमति का मुद्दा छाया रहा। लेकिन जिस प्रकार इन दोनों धार्मिक स्थलों को लेकर हिन्दुओं और मुसलमानों में आस्था है, उसे देखते हुए फिलहाल स्नान और दरगाह में जियारत की छूट मिलना मुश्किल है। कहा जा रहा है कि यदि स्नान और जियारत की छूट दी, तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु और जायरीन अजमेर आ जाएंगे। पवित्र सरोवर में स्नान और दरगाह में जायरीन का प्रवेश गत 20 मार्च से ही बंद है। दरगाह के खादिमों की संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के अध्यक्ष मोइन सरकार और सचिव वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने बैठक में कहा कि सवाल सिर्फ जायरीन के प्रवेश का नहीं है,बल्कि हजारों लोगों के रोजगार का भी है। दरगाह में आने वाले जायरीन की वजह से ही खादिम समुदाय के साथ साथ दरगाह के आसपास के दुकानदारों, होटल वालों, रेस्टोरेंट आदि चलाने वालों को भी रोजगार मिलता है। दरगाह के दोनों प्रतिनिधियों ने कहा कि कोरोना काल में लम्बे समय तक जायरीन का प्रवेश नहीं रोका जा सकता। प्रशासन को ऐसा तरीका निकालना चाहिए जिसमें फिजिकल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए जायरीन का प्रवेश शुरू हो जाए। उन्होंने कहा कि जायरीन नहीं आने से दरगाह से जुड़े तीन हजार खादिमों को भी आर्थिक संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। इसी प्रकार पुष्कर सरोवर में स्नान को लेकर प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। सरोवर में स्नान पर रोक लगने से पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। बैठक में यह सुझाव भी आया कि सरकार खादिमों और तीर्थ पुरोहितों को मदद करे। बैठक में भाजपा के विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए केन्द्र सरकार ने जो गाइड लाइन जारी की है, उसके अनुरूप निर्णय लिए जाए। जिन धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की संख्या कम है, उन्हें आगामी 1 जुलाई से खोलने की अनुमति दी जाए। देवनानी ने कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों पर अभी रोक लगी रहनी चाहिए। चूंकि देशभर में कोरोना का संक्रमण फैल रहा है, इसलिए बड़ी संख्या में लोगों को अजमेर आने की छूट नहीं दी जा सकती है। प्रशासन को इस मामले में गंभीरता के साथ निर्णय लेना चाहिए। बैठक में अनेक प्रतिनिधियों ने विचार रखे। माना जारही है कि फिलहाल बड़े धार्मिक स्थलों को लेकर कोई छूट नहीं दी जाएगी।







