अजमेर (एस.पी.मित्तल) – जिला प्रशासन के निर्णय के अनुरूप 24 जून से आनासागर के दो चैनल गेट खोल दिए गए हैं। अब यह चैनल गेट आगामी 10 दिनों तक खुले रहेंगे, ताकि आनासागर का पानी 13 फिट से घट कर 11 फिट हो जाए। प्रशासन का तर्क है कि मानसून के सक्रिय होने पर जब बरसात आएगी, तब आनासागर के ओवरफ्लो का खतरा नहीं होगा। सब जानते हैं कि आनासागर झील अजमेर शहर के बीचों बीच स्थित है और यह झील अजमेर के प्राकृतिक सौंदर्य पर चार चांद लगाती है। झील के संरक्षण पर केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत दो सौ करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च किए जा रहे हैं। आनासागर झील में पानी भरा रहे और इसके भराव क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं हो, इसको लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्देश दिए हैं। लेकिन कोर्ट के निर्देशों की अवेहलना करते हुए और जन भावनाओं के विरुद्ध आनासागर को दो फिट खाली किया जा रहा है। दो फिट पानी की निकासी पर 24 जून को कांग्रेस के पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती ने जिला कलेक्टर विश्वमोहन शर्मा के समक्ष नाराजगी प्रक्रट की। डॉ. बाहेती ने कहा कि जब मानसून सक्रिय नहीं हुआ है, तब एडवांस में पानी की निकासी क्यों की जा रही है? डॉ. बाहेती ने कलेक्टर को बताया कि यह पहला अवसर है जब मानसून आने से पहले आनासागर को खाली किया जा रहा है। इस पर कलेक्टर का कहना रहा कि सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की रिपोर्ट पर आनासागर को खाली करने का निर्णय लिया गया है। इंजीनियरों का कहना रहा कि प्रतिवर्ष पानी की निकासी होती है। इस पर डॉ. बाहेती ने कहा कि सिंचाई विभाग ने पानी की निकासी के मुद्दे पर प्रशासन को गुमराह किया है। डॉ. बाहेती ने कलेक्टर से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। कलेक्टर ने पूरे मामले को दिखवाने का आश्वासन दिया है। वहीं शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षविजय जैन ने प्रशासन के फैसले पर आपत्ति जताई है। जैन ने कहा कि प्रशासन को पहले आनासागर एस्कैप चैनल की मरंमत और सफाई का काम करवाना चाहिए था। यदि चैनल और उससे जुड़े नालों की सफाई हो जाती तो आनासागर को खाली करने की जरुरत नहीं होती। जैन ने प्रशासन की समझदारी पर भी सवाल उठताया। जैन ने कहा कि यदि चैनल और नालों की सफाई हो जाए तो एडवांस में आनासागर खाली करने की जरुरत नहीं होगी। आमतौर पर मानसून के सक्रिय होने पर ही चैनल गेट खोले जाते हैं। जैन ने कहा कि प्रशासन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
मेरी राय नहीं ली-मेयर गहलोत:
अजमेर के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने कहा कि आनासागर को खाली करने के निर्णय से पूर्व उनकी राय नहीं ली गई। गहलोत ने माना कि ट्रीटमेंट प्लांट से पानी की आवक होने के कारण मानसून से पूर्व ही आनसागर में क्षमता से अनुरूप 13 फिट पानी है। लेकिन दो फिट पानी की निकासी का निर्णय उचित नहीं है। प्रशासन चाहे तो आधा फिट पानी कम कर सकता है। गहलोत ने आरोप लगाया कि अफसरशाही जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर अपने स्तर पर ही फैसले ले रही है। वहीं शहर जिला भाजपा के अध्यक्ष डॉ. प्रियशील हाड़ा ने भी पानी की निकासी का विरोध किया। डॉ. हाड़ा ने कहा कि यह जल्दबाजी में लिया निर्णय है जो जनविरोधी है। सरकार झील तालाबों को भरने के लिए अनेक अभियान चला रही है, लेकिन अजमेर में तो भरी हुई झील को खाली करवाया जा रहा है। डॉ. हाड़ा ने सवाल उठाया कि जब प्रतिवर्ष मानसून सक्रिय होने पर चैनल गेट खोले जाते हैं, तब इस बार यह अविवेकपूर्ण निर्णय क्यों लिया गया? वहीं भाजपा के विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि प्रशासन को आनासागर को सिर्फ एक फिट खाली करना चाहिए। उन्होंने माना कि मानसून में तेज बरसात होने पर उनके विधानसभा क्षेत्र की सागर विहार ओर अन्य आवासीय कॉलोनियों में आनासागर का पानी भर जाता है। पानी भरने पर डीजल पंप लगाकर पानी की निकासी की जाती है। प्रशासन को आनासागर के प्राकृतिक सौंदर्य बनाए रखने और आवासीय कालोनियों में पानी भरने की स्थिति में तालमेल बनाने की जरूरत है।
आखिर क्या चाहते हैं इंजीनियर:
आनासागर झील से पानी की निकासी का निर्णय सिंचाई विभाग के इंजीनियरों की रिपोर्ट पर होता है। सिंचाई विभाग ही चैनल गेट के रख रखाव और आनासागर के पानी पर नजर रखता है। सवाल यह है कि एडवांस में आनासागर को खाली करवा कर इंजीनियर क्या चाहते हैं? पूर्व में आनासागर की भराव क्षमता 16 फिट थी, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों एवं ऐसी ही इंजीनियरों की मिली भगत से भराव क्षमता 13 फिट कर दी गई। यानि चैनल गेट लगा कर प्राकृतिक झील का सौंदर्य बिगाड़ दिया गया। अब झील का पानी 13 फिट से भी कम किया जा रहा है क्या ऐसे इंजीनियरों पर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा नहीं चलाना चाहिए?







