अजमेर (एस.पी.मित्तल) – 24 जून को राजस्थान में पेट्रोल 86 रुपए तथा डीजल 80 रुपए 85 पैसे प्रति लीटर बिका। पिछले दस दिनों में पेट्रोल में 10 रुपए 50 पैसे की वृद्धि हुई है। यानि पेट्रोल 100 रुपए प्रतिशत की दर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। तेल वृद्धि पर जहां केन्द्र की मोदी सरकार ने खामोशी अख्तियार कर रखी है वहीं राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार इस वृद्धि के लिए केन्द्र सरकार को दोषी मान रही है। तेल वृद्धि के विरोध में कांग्रेस देशभर में आंदोलन चलाने की घोषणा भी कर रही है। केन्द्र सरकार की खामोशी और कांग्रेस के आरोपों के बीच मैंने पेट्रोल और डीजल पर वसूलने जाने वाले टैक्स के बारे में जानकारी एकत्रित की है। इस जानकारी के मुताबिक 22 जून को जामनगर स्थित रिफानरी में 1 लीटर पेट्रोल की लागत 24 रुपए 62 पैसे तथा डीजल की लागत 26 रुपए 4 पैसे लीटर आई। रिफानरी से विभिन्न कंपनियों के पम्प तक इसी लागत में पेट्रोल और डीजल पहुंचाया गया। लेकिन पम्प पर जब एक लीटर पेट्रोल की बिक्री की गई तो केन्द्र की मोदी सरकार ने 32 रुपए 98 पैसे तथा राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार ने 18 रुपए 36 पैसे का टैक्स वसूला। 3 रुपए 60 पैसे डीलर को कमीशन दिया गया। इस प्रकार 22 जून को पेट्रोल राजस्थान में 79 रुपए 56 पैसे प्रति लीटर तथा डीजल 78 रुपए 85 पैसे प्रतिलीटर में बिका। यानि जिस पेट्रोल की लागत 24 रुपए 62 पैसे आई उस पर 54 रुपए 94 पैसे का टैक्स और कमीशन वसूला गया है। जानकारी के अनुसार मौजूदा समय में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एक लीटर कच्चे तेल का मूल्य औसतन 14 रुपए लीटर रहा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि केन्द्र और राज्य सरकारें लगातार तेल की कमाई से मालामाल हो रही है। सवाल उठता है कि जब भारत में एक लीटर पेट्रोल की लागत 24 रुपए 62 पैसे आ रही है, तब उपभोक्ताओंं को 80 रुपए लीटर पेट्रोल क्यों मिल रहा है? जाहिर है कि सरकार केन्द्र की हो या राजस्थान की उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डालने में कोई पीछे नहीं है। राजस्थान की सरकार ने हाल ही में पेट्रोल डीजल पर चार प्रतिशत टैक्स की वृद्धि की है। लेकिन यह सही है कि 24 रुपए लीटर वाले पेट्रोल पर मोदी सरकार 33 रुपए टैक्स वसूली रही है। सवाल यह भी है कि जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगातार गिर रही है, तब इतनी अधिक कीमतों पर तेल की बिक्री क्यों की जारही है? भारत में डीजल की खपत ज्यादा है और किसान भी डीजल का उपयोग करता है। सरकार का कहना है कि किसानों को अनेक प्रकार से मदद की जा रही है। लेकिन किसान के काम आने वाले एक लीटर डीजल पर मोदी सरकार 32 रुपए और राजस्थान की गहलोत सरकार 19 रुपए की टैक्स वसूली कर रही है। यानि जितनी राशि किसान को कल्याणकारी योजनाओं में दी जा रही है,उससे कहीं ज्यादा डीजल पर टैक्स लगाकर वसूला जा रहा है। राजनीतिक उद्देश्यों से राज्य सरकारें केन्द्र की मोदी सरकार को दोषी ठहराए लेकिन आम उपभोक्ता पर बोझ डालने में राज्य सरकारें भी पीछे नहीं है। केन्द्र की मोदी सरकार को भी इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि जो पेट्रोल 24 रुपए प्रतिलीटर की लागत का है उस पर 33 रुपए का टैक्स क्यों वसूला जा रहा है। मोदी सरकार कोरोना काल में डीजल और पेट्रोल पर टैक्स को घटाकर राहत दे सकती है।







