मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ईमानदारी की कसौटी पर खरे उतरे आईएएस डॉ. समित शर्मा।

लखनऊ (एस.पी.मित्तल) – राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कम्युनिटी हेल्थ अधिकारी के 2500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया में कोई भ्रष्टाचार और लापरवाही नहीं हुई है, इसकी जांच रिपोर्ट अब उजागर हो गई है। इस जांच रिपोर्ट से सबसे बड़ी राहत मिशन के तत्कालीन निदेशक और मौजूदा समय में जयपुर मेट्रो प्रोजेक्ट के एमडी डॉ. समित शर्मा को मिली है। भर्ती में कथित गड़बडियों को लेकर तब डॉ. शर्मा को मिशन के निदेशक के पद से स्थानांतरित कर दिया गया था। सरकार ने जो जांच कमेटी बनाई उसकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही के कोई सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि विवाद के समय भी डॉ. समित शर्मा ने अपनी बेगुनाही की बात कही रखी, लेकिन राजनीतिक तिकड़मों के कारण डॉ. शर्मा की कोई सुनवाई नहीं हुई। अपराध किए बगैर ही डॉ. शर्मा को दोषी मान लिया गया। लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मानते थे कि डॉ. शर्मा निर्दोष हैं। राजनीतिक मजबूरियों के चलते सीएम ने भले ही डॉ. शर्मा को स्वास्थ्य महकमे से हटा दिया हो, लेकिन कई बार सार्वजनिक समारोहों और विधानसभा में डॉ. शर्मा की ईमानदारी क प्रशंसा की। यानि अब डॉ. शर्मा सीएम की ईमानदारी की कसौटी पर खरे उतरे हैं। जाहिर है कि भर्ती में डेढ़-डेढ़ लाख रुपए वसूलने के जो आरोप लगाए गए वो झूठे निकले हैं। डॉ. समित शर्मा भी कह सकते हैं कि सरकार के मुखिया ने ईमानदारी की जिस कसौटी पर कसा उस पर वे खरे उतरे हैं। अब जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद सवाल उठता है कि क्या प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा अपने आरोपों को वापस लेंगे? उस समय रघु शर्मा के बयानही अखबारों में छपे थे, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार होने के आरोप लगाए गए थे। जांच रिपोर्ट भी रघु शर्मा के चिकित्सा मंत्री रहते हुए ही सामने आई है। ऐसे में यह रिपोर्ट बहुत मायने रखती है।
प्रदेश के युवाओं को नुकसान:
भर्ती नहीं होने से प्रदेश के 2500 युवाओं को नुकसान उठाना पड़ा है। यदि भर्ती हो जाती तो 2500 युवाओं को नौकरी मिल जाती। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि कम्युनिटी हेल्थ अधिकारी को वेतन भी केन्द्र सरकार द्वारा ही देय है। यानि ऐसे कार्मिक राजस्थान के ग्रमीण क्षेत्रों में काम करते और वेतन केन्द्र सरकार से लेते। कोरोना काल में जब स्वास्थ्य कर्मिकों की कमी महसूस की जा रही है,तब ऐसे कार्मिक फायदेमंद साबित होते। गंभीर बात तो यह है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी दोबारा से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। यह माना कि मौजूदा राजनीतिक हालातों में रघु शर्मा सबसे ताकतवर केबिनेट मंत्री हैं, लेकिन 2500 पदों पर अटकी भर्ती का जिम्मेदार कौन है? अच्छा हो कि रघु शर्मा अपने महकमे में 2500 कम्युनिट हेल्थ अधिकारी पर जल्द भर्ती करवाएं। इस मामले में अब सीएम गहलोत को भी दखल देना चाहिए।

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