अकेले अजमेर में 600 से भी ज्यादा सेंटरों पर पांच हजार कार्मिकों को रोजगार।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से अजमेर के कोचिंग सेंटर भी बुरी तरह प्रभावित हुए है। गली कूचों से लेकर मुख्य मार्गों पर संचलित कोचिंग सेंटर पिछले तीन माह से सूने पड़े हैं। अब जब हर क्षेत्र को अनलॉक किया जा रहा है तब कोचिंग सेंटरों को भी उभारने की जरुरत है। हालांकि सेंटरों के मालिकों पर विद्यार्थियों से मोटी फीस वसूलने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ऐसे कोचिंग सेंटर विद्यार्थियों की शैक्षणिक सफलता में सहायक भी रहे हैं। पब्लिक स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थी भी उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और वार्षिक परीक्षा में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने के लिए ऐसे ही कोचिंग सेंटरों पर निर्भर रहते हैं। स्कूल के साथ साथ कोचिंग सेंटरों में प्रवेश दिलवाने के बाद अभिभावक भी निश्चित हो जाते हैं। अजमेर में कुंदन नगर क्षेत्र में एसजी क्लासेज चलाने वाले सुमित गोयल ने बताया कि अजमेर में 20 बड़े, 100 मध्यम तथा 500 छोटे कोचिंग सेंटर संचालित हैं। इनमें हजारों विद्यार्थी प्रवेश लेकर अपना भविष्य तो बना ही रहे हैं, साथ ही इन सेंटरों के माध्यम से करीब पांच हजार शिक्षक, क्र्लक आदि को भी रोजगार मिल रहा था। अब ऐसे सभी लोग बेरोजगार हो गए है। जिन युवाओं ने किराये की जगह लेकर अपना कोचिंग सेंटर खोला वो तो मुसीबत में फंस गए है। जिन युवाओं ने बैंक से लोन लिया उनकी आर्थिक स्थिति अब बहुत खराब है। सरकार को कोचिंग सेंटरों को खोलने पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे विद्यार्थियों का भविष्य और हजारों युवाओं का रोजगार जुड़ा हुआ है। हालांकि कुछ कोचिंग सेंटर ऑन लाइन स्टैडी करवा रहे हैं, लेकिन इसमें विद्यार्थियों की रुचि नहीं है। जो शिक्षा क्लास रूम में फेस टू फेस दी जा सकती है, वह ऑनलाइन तकनीक से संभव नहीं है। वैसे भी इंटरनेट डाटा, लेपटॉप, मोबाइल आदि की सुविधा हर विद्यार्थी के पास नहीं है। इंटरनेट स्पीड की समस्या भी बनी रहती है। इसलिए ऑनलाइन का प्रयोग ज्यादा सफल नहीं हो रहा है। जब कोरोना काल में सरकार हर क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध करवाने को लेकर चिंतित है, तब कोचिंग के क्षेत्र की ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। वैसे भी अब प्रत्येक नागरिक कोरोना काल में फिजिकल डिस्टेंसिंग के प्रति जागरुक हो गया है। कोचिंग सेंटरों की परेशानियों के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9783301821 पर सुमित गोयल से ली जा सकती है।
टाटा पावर में बड़ा बदलाव:
अजमेर शहर में बिजली वितरण संभालने वाली टाटा पावर कंपनी के प्रशासन में बड़ा बदलाव किया गया है। कंपनी के कारपोरेट हैड आलोक श्रीवास्तव को पोन्नति कर स्टेट कॉरपोरेट हैड बनाया गया है। श्रीवास्तव अब जयपुर में बैठ कर राजस्थान भर में टाटा की ऊर्जा से जुड़े कार्याे की निगरानी का काम करेंगे। टाटा पावर का अजमेर के साथ साथ राजस्थान में ऊर्जा के क्षेत्र में भी दखल है। श्रीवास्तव ने अजमेर में जो कार्यकुशलता दिखाई उस से खुश होकर कंपनी ने स्टेट कारपोरेट हैड नियुक्त किया है। इसी प्रकार अजमेर में चीफ ऑपरेशन का काम देख रहे प्रशांत कुमार सिंह का स्थानांतरण उड़ीसा किया गया है। प्रशांत की भी पदोन्नति की गई है। टाटा पावर को उड़ीसा के चार में से एक डिस्कॉम में विद्युत वितरण व्यवस्था संभालने का ठेका मिला है। भुवनेश्वर के डिस्कॉम के 9 जिलों में तीस लाख उपभोक्ता हैं। प्रशांत इस डिस्कॉम में सतर्क विंग के प्रमुख नियुक्त किए गए हैं। मालूम हो कि आलोक श्रीवास्तव और प्रशांत कुमार सिंह टाटा पावर की शुरुआत से ही अजमेर में नियुक्त थे। अजमेर में टाटा पावर को जमाने में इन दोनों अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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