- 69 सरंपचों का होना है चुनाव। सरपंच चुनाव में भी विधायक का काम काज बहुत मायने रखता है।
- पर केकड़ी में मंत्री पुत्र भी नजर नहीं आ रहे।
- सचिन पायलट का फैक्ट भी काम कर रहा है।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – अजमेर जिले में केकड़ी विधानसभा क्षेत्र ऐसा है, जहां सर्वाधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों का महत्व इसलिए है कि केकड़ी का प्र्रतिनिधि प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा करते हैं। हालांकि सरपंच पद के चुनाव पार्टी के चुनाव चिन्ह पर नहीं होते हैं, लेकिन क्षेत्रीय विधायक के काम काज का पूरा असर रहता है।
केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में 2 लाख 45 हजार 460 मतदाता है। इनमें से 69 सरपंचों के चुनाव में दो लाख से भी ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं। केकड़ी और सरवाड़ नगर पालिका के 45 हजार शहरी मतदाताओं को छोड़कर मतदाता भाग ले रहे हैं। यहां तीन चरणों में चुनाव होने हैं। केकड़ी पंचायत समिति की 22 ग्राम पंचायत में 28 सितम्बर को मतदान हुआ, जबकि सरवाड़ 26 तथा सावर की 21 ग्राम पंचायतों में क्रमश: तीन व छह अक्टूबर को मतदान होगा। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के भाग लेने की वजह से पूरे जिले में केकड़ी के चुनावों की चर्चा हो रही है। इन चुनावों में क्षेत्रीय विधायक रघु शर्मा के कामकाज की भी चर्चा हो रही है। भले ही रघु शर्मा ने किसी उम्मीदवार को अपना समर्थन नहीं दिया हो, लेकिन सरपंच पद के अनेक उम्मीदवारों की पहचान रघु शर्मा के उम्मीदवार के तौर पर है। प्रदेश में ऐसी कई ग्राम पंचायतें रही है, जहां सरपंच का चुनाव सर्वसम्मति से हो गया। ऐसे स्थानों पर क्षेत्रीय विधायक का प्रभाव भी काम में आया, लेकिन रघु शर्मा के केकड़ी विधानसभा क्षेत्र में एक भी गांव पंचायत में सरपंच का चुनाव सर्वसम्मति से नहीं हो सका। यही वजह है कि सरपंच पद के चुनाव में सम्पूर्ण केकड़ी क्षेत्र में घमासान मचा हुआ है।
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समर्थक इन चुनावों में सक्रिय है। रघु शर्मा को लेकर पायलट समर्थकों की नाराजगी गत 9 सितम्बर को अजमेर में प्रभारी महासचिव अजय माकन के सामने भी देखने को मिली थी। तब रघु शर्मा के फोटे वाले फ्लैक्स फाड़ दिए गए।पायलट के जन्मदिन के मौके पर भी केकड़ी में समर्थकों ने भारी उत्साह दिखाया था। 69 ग्राम पंचायतों के चुनाव में जो हालात हैं उसे देखते हुए रघु शर्मा के पुत्र सागर शर्मा भी नजर नहीं आ रहे हैं। वैसे अपने पिता के रौब में पुत्र भी सरकारी बैठकों में भाग ले रहे थे, लेकिन इन दिनों मंत्री पुत्र का भी कोई अता पता नहीं है।
रघु शर्मा की वजह से केकड़ी में पंचायती राज के चुनाव का महत्व खासा बढ़ गया है। गांव में सरपंच ही सर्वेसर्वा होता है। नरेगा श्रमिकों को काम देने से लेकर सभी सरकारी क्षेत्रों में सरपंच की ही भूमिका होती है। विधानसभा चुनाव में यही सरपंच पार्टी का चेहरा होते हैं। रघु शर्मा ने वर्ष 2017 से लोकसभा का उपचुनाव जीता था,तब केकड़ी से 35 हजार मतों की बढ़त रही थी, लेकिन दिसम्बर 2018 में जब रघु ने विधानसभा का चुनाव लड़ा तो मात्र 19 हजार मतों से जीत पाए। मंत्री बनने के बाद रघु को लेकर लोगों की नाराजगी कई बार सामने आई है। सचिन पायलट के मामले में तो केकड़ी के कांग्रेस के कार्यकर्ता ही रघु से खफा है। रघु शर्मा भले ही अभी चुनाव की राजनीति से दूर हों, लेकिन उन्हें पता है कि केकड़ी के सरपंच के चुनाव कितने मायने रखते हैं।







