आईएएस डॉ. समित शर्मा और गौरव गोयल का मामला।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट और मंत्री खाचरियावास व रमेश मीणा के ककन भी मायने रखते हैं।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – क्या राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने मंत्रियों के आगे लाचार हैं? यह सवाल आईएएस डॉ. समित शर्मा और गौरव गोयल के ताजा प्रकरण को देखते हुए उठा है। खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने अपने विभाग के निदेशक गौरव गोयल के काम काज पर रोक लगा दी। मंत्री के इस आदेश को विधि विभाग और राज्य के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने नियमों के विरुद्ध माना। अब मंत्री के आदेश को रद्द करने वाली फाइल मुख्यमंत्री गहलोत के पास पड़ी है। मुख्य सचिव की टिप्पणी से जाहिर है कि खानमंत्री भाया ने अपने अधिकारिसों से परे जाकर निदेशक के काम काज पर रोक लगाई है। दूसरा मामला डॉ. समित शर्मा का है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा से विवाद के चलते डॉ. शर्मा को चिकित्सा विभाग से हटाया गया। जिस मुद्दे पर समित शर्मा को हटाया उसमें अब शर्मा को क्लीन चिट मिल गई है। जांच रिपोर्ट में माना गया है कि कम्युनिटी हेल्थ अधिकारी के 2500 पदों में भर्ती की प्रक्रिया में कोई भ्रष्टाचार और लापरवाही नहीं हुई। अब इस मामले में रघु शर्मा स्वयं आरोपों के घेरे में हैं। डॉ समित शर्मा और गौरव गोयल की छवि प्रशासनिक क्षेत्र में मेहनती अधिकारियों की है और दोनों ही आईएएस विवादों से बचते हैं। इसलिए प्रदेश में राज किसी भी दल का हो, लेकिन ये दोनों आईएएस अपने काम में लगे रहते हैं। दोनों को मुख्यमंत्रियों के भरोसे का भी माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद भी ये दोनों आईएएस गहलोत सरकार के मंत्रियों से परेशान हैं। समित शर्मा और गौरव गोयल के प्रकरण से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासनिक तंत्र के हालात कैसे हैं। ऐसा नहीं कि अशोक गहलोत इन हालातों से अनभिज्ञ हो। गहलोत को अपने प्रशासनिक तंत्र की पूरी जानकारी है, लेकिन इसे राजनीतिक लाचारी ही कहा जाएगा कि मुख्यमंत्री होते हुए भी आईएएस का बचाव नहीं कर पा रहे हैं। जानकारों की माने तो सरकार और संगठन में जो खींचतान चल रही है उसी का परिणाम है कि कुछ मंत्री अशोक गहलोत पर भारी पड़ रहे हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो खान निदेशक गौरव गोयल के अधिकारी सीज नहीं किए जाते और न ही डॉ. समित शर्मा को बेवजह चिकित्सा महकमे से हटाया जाता। क्या कोई मंत्री अपने स्तर पर विभाग के सबसे बड़े अधिकारी के अधिकार सीज कर सकता है? नियम विरुद्ध आदेश के बाद भी फाइल को इधर से उधर घुमाया जा रहा है। 15 दिन गुजर जाने के बाद भी मुख्यमंत्री अपने मंत्री से जवाब तलब नहीं किया है। संभवत: अशोक गहलोत आईएएस के मुकाबले में अपने मंत्रियों को खुश रखना चाहते हैं।
पायलट और मंत्रियों के कथन भी मायने रखते हैं:
सीएम अशोक गहलोत के सामने एक ओर अपने मंत्रियों को खुश रखने की चुनौती है तो दूसरी और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के बयानों से परेशानी भी। 29 जून को तेल कीमतों में वृद्धि के विरोध में जयपुर में हुए प्रदर्शन में पायलट ने अपने समर्थक मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पायलट ने कहा कि खाचरियावास भले ही मंत्री बन गए हो, लेकिन इनका मन संगठन में ही लगता है। विपक्ष में रहते हुए खाचरियावास और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जो आंदोलन किया उसी का परिणाम रहा कि आज राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। इससे पहले परिवहन मंत्री खाचरियावास और आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा ने भी कहा कि 2013 से 2018 के बीच इसी तरह हमने सचिन पायलट के नेतृत्व में आंदोलन किए थे। तब हमारा विरोध राज्य की भाजपा सरकार की नीतियों के विरोध में था। ऐसे ही विरोध की वजह से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है। पायलट और मंत्रियों के बयानों से प्रदेश की राजनीति के बारे में समझा जा सकता है। खाचरियावास और रमेश मीणा को पायलट का समर्थक माना जाता है।







