अबनॉर्मल बच्चे के जन्म और मौत के मामले में अजमेर की ग्यानिक चिकित्सक प्रीतम कोठारी को उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का नोटिस।

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  • पीडि़ता रिचा शर्मा ने 53 लाख रुपए का हर्जाना मांगा।
  • मेरी चिकित्सीय लापरवाह नहीं-डॉ. कोठारी।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – अबनॉर्मल बच्चे के जन्म और फिर मृत्यु हो जाने के मामले में अजमेर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने माकड़वाली रोड स्थित आईवीएफ एंड फर्टीलिटी सेंटर की मालिक डॉ. प्रीतम कोठारी को चिकित्सीय लापरवाही बरतने के आरोप में नोटिस जारी किया है। पंचशील निवासी प्रशांत शर्मा की पत्नी श्रीमती रिचा शर्मा ने एडवोकेट आशीष सक्सेना और हर्षित मित्तल के जरिए उपभोक्ता मंच में एक वाद दायर किया है।

 

 

 

इस वाद में कहा गया है कि गर्भवती होने पर उसने जनवरी से लेकर मई माह तक अनेक बार जांच करवाई। डॉ. प्रीतम कोठारी ने जितनी भी जांचे लिखी, उन्हें समय समय पर करवाया गया। गत अगस्त माह में बच्चे का जन्म हुआ तो वह अबनॉर्मल (दिमाग से पूर्ण विकसित नहीं) हुआ। जन्म के बाद ही बच्चे को एक निजी अस्पताल के आईसीयू में रखा गया। सितम्बर में नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। रिचा ने अपने वाद में ग्यानिक चिकित्सक डॉ. प्रीतम कोठारी पर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाया। वाद में कहा गया कि डॉ. कोठारी ने गर्भावस्था के दौरान जो डबल मार्कर टेस्ट करवाया उसकी रिपोर्ट में बच्चे की स्थिति लो रिस्क इन अबनॉर्मल बताई गई थी। यानि गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से स्वास्थ्य नहीं है।

 

 

 

इस रिपोर्ट के बाद भी डॉ. कोठारी को ट्रिबल मार्कर टेस्ट भी करवाना चाहिए था। यदि ट्रिबल मार्कर टेस्ट करवाया जाता तो शिशु की स्थिति का पता चल जाता। तब गर्भपात भी करवाया जा सकता था। बाद में ट्रमीशन ऑफ प्रेगेनेंसी एक्ट का भी हवाला दिया गया है। इस एक्ट के अनुसार यदि शिशु की स्थिति सही नहीं है तो 20 सप्ताह की अवधि तक गर्भपात करवाया जा सकता है। रिचा का आरोप है कि यदि डॉ. कोठारी अपने चिकित्सीय धर्म का निर्वाह करती तो ट्रिबल टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर गर्भपात करवा दिया जाता। मुझे बेवजह शारीरिक कष्ट नहीं होता। चूंकि मैंने शिशु को नौ माह तक अपने गर्भ में पाला इसलिए शिशु के प्रति प्रेमभाव भी हो गया। यही वजह रही जब उसकी मृयु हुई तो मुझे जबर्दस्त मानसिक पीड़ा हुई। गर्भावस्था से लेकर शिशु के जन्म और मृत्यु तक लाखों रुपए खर्च हो गया। बाद में मानसिक क्षति पूर्ति और अन्य खर्चों के लिए डॉ. कोठारी से 53 लाख रुपए दिलाने की मांग की है। आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा, सदस्य नवीन कुमार तथा श्रीमती अलका जैन ने डॉ. प्रीतम कोठारी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

 

 

 

कोई लापरवाही नहीं की-डॉ. कोठारी:
वहीं डॉ. प्रीतम कोठारी का कहना है कि श्रीमती रिचा शर्मा के मामले में उन्होंने कोई लापरवाही नहीं बरती है। समय समय पर जो टेस्ट जरूरी थे वे करवाए गए हैं। जहां तब डबल टेस्ट की रिपोर्ट का सवाल है तो अधिकांश मामलों में लो रिस्क इन अबनॉर्मल ही लिखा आता है। जांच रिपोर्ट देने वाली संस्था यह बताती है कि 250 बच्चों में से एक बच्चा अबनॉर्मल होगा। अब लो रिस्क इन अबनॉर्मल रिपोर्ट आती है, तब ट्रिबल मार्कर टेस्ट की जरुरत नहीं होती। मैंने समय समय पर रिचा शर्मा को उचित परामर्श दिया है। परामर्श के दौरान मैंने अपना व्यवहार भी अच्छा रखा है। वैसे भी रिचा ने चार-पांच माह तक ही मेरा परामर्श लिया है। कोई चिकित्सक नहीं चाहेगा कि उसका मरीज नाराज हो। कई बार हालात नियंत्रण से बाहर होते हैं।

 

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