राहुल सूर्यवंशी (दादरा नगर हवेली एवं दमण-दीव) – संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली सांसद मोहन डेलकर ने रविवार को अपने यूट्यूब चैनल के जरिए एक वीडियो जारी कर प्रशासन के मनमाने रवैये पर नाराजगी जताते हुए सांसद पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। डेलकर ने कहा कि अगले लोकसभा सत्र के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करने के बाद वे संसद सत्र के दौरान अपना सांसद पद का इस्तीफा सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि वे चाहते है कि देश की जनता और संसद को भी सच्चाई पता चलनी चाहिए कि 7 टर्म सांसद रह चुके निर्दलीय सांसद आखिर अपने पद से इस्तीफा क्यों दे रहा है? डेलकर ने कहा कि इस दौरान वे उन तमाम अधिकारियों के नामों की घोषणा करेंगे जो संघ प्रदेश में मनमाने आदेश जारी कर प्रदेशवासियों को परेशान करने का काम कर रहे है। सभी ऐसे अधिकारियों के सबूतों की फाइल संसद सत्र में पेश करने के बाद वे इस्तीफे का कारण बताते हुए अपने पद का इस्तीफा लोकसभा स्पीकर को सौंपेंगे।
सांसद डेलकर ने जारी किए वीडियो में कहा है कि बीते लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेशवासियों ने उन्हें ऐतिहासिक जीत दिलवाई थी और वे लोकसभा में पांच अपक्ष सांसदों में शामिल हुए थे। इतनी बड़ी ऐतिहासिक जीत के लिए उन्होंने प्रदेशवासियों का आभाार मानते हुए कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने जो वादे और घोषणा की थी उसके लिए हालांकि उन्होंने दिल्ली तक काम करना शुरू भी किया। लोकसभा में प्रदेशहीत के लिए कई मुद्दे भी उठाए। इसके बाद उन्हें देश के पीएम और गृहमंत्री सहित 25 से 30 मंत्रालयों का सहयोग भी मिला लेकिन उन मुद्दों पर अभी तक प्रदेश में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वर्तमान में संघ प्रदेश में ब्रिटीश शासन से भी बदत्तर स्थिति हो गई है। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने प्रदेशहित के लिए रोजगार, शिक्षा व्यवस्था, डेलीबेसिस कर्मचारियों, सस्ता अनाज उपलब्ध कराने, आदिवासी आरक्षण, जंगल की जमीन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए है। और सभी मुद्दों पर संबंधित मंत्रालयों की ओर से उन्हें हल करने के लिए आश्वासन भी मिला है, लेकिन फिर भी स्थानीय प्रशासन इन मुद्दों पर अभी तक चुप्पी साधे बैठा है। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से 20 से 25 सालों से कार्यरत पीडब्ल्यूडी वर्करों को अचानक निकाल दिया गया। देखते ही देखते परिवार बेरोजगार हो गए, बच्चे सड़कों पर आ गए। हालांकि यह मुद्दा मुंबई हाईकोर्ट पहुंचने पर निर्णय भी दिया गया कि इसका फैसला जिला पंचायत के अधीन होना चाहिए न की प्रशासन की ओर से। लेकिन फिर भी कोर्ट के निर्णयों का यहां पर उल्लंघन किया जा रहा है। वर्तमान में जिला पंचायत और नगरपालिका के सभी अधिकार प्रशासन ने अपने अधीन कर लिए है।
नमो कॉलेज के लिए आधी प्रॉपर्टी फ्री में दी, फिर भी तोड़ने के लिए पहुंच गए अधिकारी
सांसद डेलकर ने अपने वीडियो में कहा कि उन्होंने प्रदेश के छात्रों के लिए भारत सरकार की ओर से शुरू किए जा रहे नमो मेडिकल कॉलेज के लिए अपनी आधी प्रॉपर्टी प्रशासन को नि:शुल्क रूप से उपलब्ध कराई। इसके लिए 11 एकड़ जमीन और 2 बड़ी बिल्डिंग भी कॉलेज के लिए दी । जिसके बाद देश के गृहमंत्री के हाथों इसका बाकायदा उद्घाटन भी किया गया। और अचानक 7 दिन पहले ही दानह आरडीसी, एसडीपीओ 200 पुलिस के जवानों के साथ एसएसआर कॉलेज पहुंचते है और कॉलेज को अवैध बताकर तोड़ने की बात करते है। उन्होंने बताया कि ऐसी कार्रवाई तो आतंकवादियों के साथ की जाती है जहां अचानक इतने बड़े दस्ते के साथ कार्रवाई के लिए पहुंचते है, जो सरासर अन्याय है।
मेरे समर्थकों को अनावश्यक किया जा रहा है टार्गेट, भाजपाई को समर्थन-डेलकर
सांसद मोहन डेलकर ने संघ प्रदेश प्रशासन की मनमानी का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान में संघ प्रदेश मेें न कोई कानून है और न ही कोई व्यवस्था। कब क्या ऑर्डर ऊपर से आ जाए ऐसी स्थिित में लोग जी रहे है। उन्होंने कहा कि प्रदेशहित के लिए संसद में यहां के मुद्दे उठाने के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से उनके समर्थकों को अनावश्यक टार्गेट बनाने का काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया में एक सांसद की गरीमा को ठेंस पहुंचाई जा रही है और ऐसे भाजपाई लोगों को प्रशासन का खुला समर्थन मिल रहा है। यह कहां का न्याय है? मेरे छोटे-छोटे समर्थक लोगों को बेवजह झूठे केस में जेल के अंदर डालने की धमकियां दी जा रही है। यहां तक की एक बार पुलिस उनके पास भी बगैर सबूत लिए कार्रवाई करने के लिए पहुंच गई थी, जब उन्होंने पुलिस से इसके लिए कारण पूछा तो उन्हें जवाब दिया गया कि सबूत तो नहीं है लेकिन ऊपर से साहब का ऑर्डर है। उन्होंने दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि यहां पर किसी भी तरह का कानून-व्यवस्था नहीं है जिसके चलते मनमानी चलाई जा रही है। जिन लोगों के बलबूते वे देश की संसद मेंे सातवीं बार पहुंचे है ऐसे लोगोें को किए गए वादे और आश्वासन निभाने में वे भले ही दिल्ली तक आवाज उठा रहे है और इसके बाद उन्हें भारत सरकार से सहयोग और आश्वासन भी मिल रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर उन तमाम मुद्दों पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है।
सांसद डेलकर ने कहा है कि आने वाले लोकसभा के संसद सत्र शुरू होने से पहले वे पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और स्पीकर से मुलाकात करके यहां की स्थिति से अवगत कराएंगे और उसके बाद ही संसद सत्र के दौरान वे अपना इस्तीफा लोकसभा में सौंपेंगे। बता दें कि इससे पहले भी मोदी सरकार की कार्यशैली के चलते नाराज महाराष्ट्र विधानसभा के एक सांसद इस्तीफा दे चुके है।







