जयपूर (एस.पी.मित्तल) – कोरोना संक्रमण को देखते हुए देश भर के प्रमुख धार्मिक स्थल बंद हैं। इनमें अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की विश्वविख्यात दरगाह भी शामिल है। लॉकडाउन की वजह से गत 20 मार्च से ही दरगाह में जायरीन का प्रवेश पूरी तरह बंद है। लेकिन यदि भाजपा के वरिष्ठ नेता अमीन पठान के नेतृत्व वाली दरगाह कमेटी की मेहरबानी हो तो कोई भी जायरीन दरगाह में प्रवेश कर ख्वाजा साहब की मजार पर जियारत की रस्म अदा कर सकता है। सोशल मीडिया पर हाल ही में एक फोटो वायरल हो रहा है, जिसमें दरगाह कमेटी के अधिकारी के साथ दो जायरीन खड़े हैं। यह फोटो आस्ताना शरीफ के बाहर का है। चूंकि दरगाह में जायरीन और खादिम समुदाय का प्रवेश भी बंद है, इसलिए फोटो में पवित्र मजार भी नजर आ रही है। स्वाभाविक है कि दरगाह कमेटी की मेहरबानी के बगैर दरगाह में जयरीन का प्रवेश नहीं हो सकता है। दरगाह कमेटी के इस कृत्य से खादिम समुदाय में रोष व्याप्त है। खादिमों के प्रतिनिधि सैय्यद अब्दुल मुकद्दस मदनी ने कहा कि यह फोटो दर्शाता है कि दरगाह में खादिमों के अधिकारों पर कुठाराघात हो रहा है। एक ओर केन्द्र सरकार के अधीन काम करने वाली दरगह कमेटी के पदाधिकारी अपने चहेतों को लॉकडाउन में दरगाह में जियारत करवा रहे हैं तो वहीं खादिमों का प्रवेश बंद कर रखा है। मदनी ने कहा कि दरगाह कमेटी द्वारा खादिमों को दबाने की जो कोशिश की जा रही है उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। मदनी ने खादिमों की संस्था अंजुमन के पदाधिकारियों से भी आग्रह किया कि इस मामले को गंभीरता से ले। इससे पहले भी कई ऐसे अवसर आए हैं, जब दरगाह कमेटी ने खादिम समुदाय पर प्रतिकूल टिप्पणी की है। हाल ही में लॉकडाउन के दौरान जब फंसे हुए जायरीन को खादिमों ने अपने घरों पर ठहराया तो दरगाह कमेटी ने खादिमों को लालची बता दिया। जबकि खादिमों ने लॉकडाउन में फंसे किसी भी जायरीन से गेस्ट हाउस का किराया नहीं लिया। बल्कि जायरीन को राशन सामग्री भी नि:शुल्क उपलब्ध करवाई। मदनी ने आरोप लगाय कि दरगाह कमेटी हर बार खादिम समुदाय को नीचा दिखाने का काम करती है। मदनी ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से भी वायरल फोटो की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाए कि जो जायरीन फोटो में नजर आ रहे हैं, उन्हें दरगाह कमेटी के किस अधिकारी के आदेश पर प्रवेश दिलवाया गया। इस पूरे मामले में और अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9829103111 पर सैय्यद अब्दुल मदनी से ली जा सकती है।







