जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 8 जुलाई को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्र और 9 निर्दलीय विधायकों से मुलाकात की तो मंत्रिमंडल के विस्तार होने की खबरें मीडिया में छा गई। कुछ अखबारों में तो संभावित मंत्रियों के नाम भी छप गए। हालांकि ऐसा कई बार हो चुका है और हर बार मंत्रिमंडल के विस्तार वाली खबरें सही नहीं निकली। 8 जुलाई को जो 9 निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री गहलोत से मिले, उनमें से एक विधायक से मेरी बात हुई है। इस विधायक का कहना रहा कि हमारी मुलाकात को मंत्रिमंडल के विस्तार से जोडऩा गलत है। असल में कुछ विधायक विधानसभा की विभिन्न कमेटियों की बैठक में भाग लेने के लिए इन दिनों जयपुर में है। कुछ विधायकों ने 7 जुलाई को मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा था। चूंकि 7 जुलाई को मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य कुछ कमजोर था, इसलिए मुलाकात नहीं हो सकी। 8 जुलाई को जयपुर में उपस्थित निर्दलीय विधायकों को मुख्यमंत्री ने एक साथ मिलने के लिए बुला लिया। इस मुलाकात में मंत्रिमंडल के विस्तार पर कोई चर्चा नहीं हुई। अधिकांश विधायकों ने कोरोना काल में अपने अपने विधानसभा क्षेत्र के बारे में सीएम को जानकारी दी। कुछ विधायकों ने कोरोना काल में सीएम की सेहत पर भी चिंता जताई। विधायकों का कहना रहा कि अशोक गहलोत अपनी उम्र और स्वास्थ्य की परवाह किए बगैर कोरोना काल में रोजाना वीडियो कॉन्फ्रेंस, बैठक आदि कर रहे हैं। निर्दलीय विधायकों ने मुख्यमंत्री को आराम करने की सलाह भी दी। अधिकांश निर्दलीय विधायक खुश थे कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में मन मुताबिक अधिकारी नियुक्त हुए हैं तथा आम लोगों के कार्य हो रहे हैं। मुख्यमंत्री की राजनीतिक मजबूरियों के चलते किसी भी विधायक ने मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई सवाल नहीं किया।
मंत्री बनाने का फार्मूला ही तय नहीं:
राजनीति का लम्बा अनुभव रखने वाले इन विधायक का कहना रहा कि कांग्रेस संगठन और सरकार में मंत्री बनाने का फार्मूला ही तय नहीं है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट चाहते हैं कि कांग्रेस विधायकों में से ही मंत्री बनाए जाएं। जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत चाहते हैं कि बिना शर्त समर्थन देने वाले 13 निर्दलीय तथा बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले 6 विधायकों में से भी मंत्री बनाए जाएं। चूंकि मंत्री बनाने के फार्मूले पर एक राय नहीं हो पा रही है। इसलिए मंत्रिमंडल का विस्तार भी नहीं हो रहा है। सचिन पायलट कई बार सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि बसपा के विधायक किसी लालच की वजह से कांग्रेस में शामिल नहीं हुए हैं। इसी प्रकार निर्दलीय विधायक भी अपने क्षेत्र का विकास चाहते हैं, इसलिए कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे हैं। पायलट ने यह भी कहा है कि भाजपा के शासन में कांग्रेस के जिन कार्यकर्ताओं ने संघर्ष किया उन्हें ही अब सरकार में सम्मान मिलना चाहिए। यही वजह है कि राज्य स्तरीय संस्थानों और विकास प्राधिकरण में राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हो पा रही है। ऐसे में अब माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के बदलने के बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां होंगी। सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बने 6 वर्ष से भी ज्यादा हो गए हैं। ऐसे में पायलट के स्थान पर किसी अन्य को अध्यक्ष बनाए जाने की भी चर्चा है। पायलट चाहते हैं कि प्रताप सिंह खाचरियावास जैसा समर्थक ही प्रदेशाध्यक्ष बने। जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसी वरिष्ठ कांग्रेसी को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के पक्ष में हैं। गहलोत का मानना है कि वरिष्ठ नेता के प्रदेशाध्यक्ष बनने से अनेक समस्याओं का समाधान हो जाएगा। देखना है कि कांग्रेस हाईकमान गहलोत को कितना सहयोग करता है। राजस्थान में गहलोत के नेतृत्व में सरकार बने डेढ़ वर्ष पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ। अभी सात मंत्री और बनाए जा सकते हैं। पायलट प्रदेशाध्यक्ष के साथ साथ डिप्टी सीएम भी हैं, लेकिन फिर भी पायलट का तालमेल गहलोत के साथ नहीं हो पा रहा है। जानकार सूत्रों के अनुसार हाल में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों की 10 दिनो तक बाड़ाबंदी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयानों से पायलट खुश नहीं है। मालूम हो कि राज्यसभा चुनाव के दौरान गहलोत और उनके समर्थकों ने कहा था कि राजस्थान में भी मध्यप्रदेश की तरह कांग्रेस की सरकार गिराने के प्रयास हो रहे हैं। कांग्रेस में जब भी बगावत की चर्चा होती है तो पायलट पर ही नजर जाती है। जबकि पायलट कह चुके है कि वे पूरी तरह कांग्रेस के साथ हैं। लेकिन हर बार पायलट को सफाई देनी होती है। मंत्रिमंडल का विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से प्रतीत होता है कि राजस्थान कांग्रेस और सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है।
इन विधायकों ने की मुलाकात:
8 जुलाई को निर्दलीय विधायक सुरेश टांक, सुखवीर सिंह, आलोक बेनीवाल, ओम प्रकाश हुडला, संयम लोढ़ा, लक्ष्मण मीणा, महादेव खंडेला, कांति मीणा व बाबूलाल नागर ने मुलाकात की।







