इस बार सचिन पायलट ने दे दी अशोक गहलोत को मात?

  • राजस्थान की सीमा सील होने से पहले 15 विधायकों के साथ पायलट दिल्ली पहुंच गए।
  • अब सोनिया गांधी के बुलावे पर भी उपलब्ध नहीं हो रहे।
  • मध्यप्रदेश की तरह राजस्थान में भी तख्ता पलट राजनीति की आशंका।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान में कांग्रेस ंकी सरकार गिराने के लिए 11 जुलाई को जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सारा दोषारोपण भाजपा पर कर रहे थे, तब मैंने अपने ब्लॉग में लिखा था कि मौजूदा समय में सारी सिसायत प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के इर्द-गिर्द घूम रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जितनी ताकत भाजपा को कोसने में लगा रहे हैं उससे आधी ताकत भी यदि कांग्रेस के आंतरिक मतभेदों को दूर करने में लगा देते तो आज सचिन पायलट से मात नहीं खानी पड़ती। सब जानते हैं कि राज्यसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही माहौल बना था, लेकिन तब गहलोत ने 10 जून को ही सीमा सील कर किसी भी विधायक को दिल्ली नहीं जाने दिया। यही वजह रही कि 12 जून को गहलोत ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की उसमे पायलट के साथ साथ प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे भी मौजूद थेा, लेकिन 11 जुलाई की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गहलोत अकेले नजर आए। न पायलट रहे और न पांडे जी। हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद गहलोत के निर्देशों पर प्रदेश की सीमा फिर से सील कर दी गई, लेकिन सीमा सील होने से पहले पायलट 15 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए। इधर जयपुर में गहलोत भाजपा को कोसते रहे उधर पायलट दिल्ली के मजबूत किले में पहुंच गए। गहलोत और उनके इशारों पर नाचने वाले अधिकारी सीमा सील करने कारण भले ही कोरोना संक्रमण को बताएं, लेनि सब जानते हैं कि गहलोत किन कारणों से सीमा सील करावई है। बड़ी अजीब बाते है कि राजस्थान में आनेपर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन बाहर जाने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी। इस आदेश से ही सरकार की नियत का पता चलता है। चूंकि इस बार पायलट ने गहलोत को मात दे दी है, इसलिए अब दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के बुलावे पर भी पायलट उपलब्ध नहीं हो रहे है। पयालट को लेकर मीडिया में बेवजह की खबरें चल रही हैं। सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल से मिलने की खबर का चैनल वाले खुद ही खंडन कर रहे हैं। पायलट 11 जुलाई की सुबह से किसी भी पत्रकार का फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं। पायलट और समर्थक विधायक कहां हैं,इसकी जानकारी अब शायद सीएम गहलोत को भी नहीं होगी, क्योंकि गहलोत की खुफिया एजेंसियां तो राजस्थान में ही नजर रख सकती है। अब देखना है कि पायलट दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलते हैं या फिर मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह कांग्रेस सरकार को धराशाही करते हैं। अब गहलोत की यह आशंका सही हो सकती है कि राजस्थान में भी मध्यप्रदेश की तरह खेल खेला जा सकता है। हालांकि बगावत करने वाले कांग्रेसियों को गहलोत गददर कह चुके हैं। यदि पायलट भाजपा के साथ मिलकर राजस्थान में सरकार बनाएंगे तो गहलोत की नजर में पायलट गद्दार होंगे। जहां तक जयपुर में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर मंत्रियों और विधायकों के जमावड़े का सवाल है तो सीएमआर पर परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास भी उपस्थित है। खाचरियावास किसके साथ हैं, यह पूरा प्रदेश जनता है। जब सीएम गहलोत की एसीबी निर्दलीय विधायक सुरेश टाक को गहलोत विरोधी मान सकती है तब राजनीति में कुछ भी संभव है। अब प्रदेश की सियासत पूरी तरह सचिन पायलट के किरदार पर निर्भर है।

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