सीएम गहलोत के समर्थकों पर आयकर और ईडी के छापे।

  • कांग्रेस विधायक दल की बैठक के लिए जारी व्हिप की कोई वैधानिकता नहीं।
  • शक्ति परीक्षण के समय जारी व्हिप का ही वैधानिक महत्व होता है।
  • पार्टी मुख्यालय से पायलट के फ्लेक्स हटाए ।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 13 जुलाई को सीएम अशोक गहलोत के सरकारी बंगले पर कांग्रेस विधायक दल की जो बैठक हुई उसको लेकर पार्टी की ओर से व्हिप जारी किया गया था। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक उपस्थित नहीं थे। कहा जा रहा है कि अब पायलट और समर्थक विधायकों को व्हिप का उल्लंघन करने के आरोप में कांग्रेस से बर्खास्त कर दिया जाएगा। जिससे उनकी विधायकी भी छिन जाएगी। इतना ही नहीं दल बदल कानून के तहत पायलट और समर्थक विधायक चुनाव लडऩे के अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे। इस संबंध में विधि विशेषज्ञों का कहना है कि 13 जुलाई को जारी कांग्रेस के व्हिप की कोई वैधानिकता नहीं है। इस व्हिप का उल्लंघन करने वालों पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकती है। दल बदल कानून में उसी व्हिप का वैधानिक महत्व है, जो विधानसभा के अंदर बहुमत परीक्षण के समय जारी किया गया हो। यदि विधानसभा की बैठक वाले व्हिप का उल्लंघन होता है तो ऐेसे विधायक की सदस्यता तो समाप्त होगी ही, साथ ही चुनाव लडऩे के अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। चूंकि अभी राज्यपाल ने विधानसभा सत्र आहूत नहीं किया है, इसलिए 13 जुलाई वाले व्हिप के कोई मायने नहीं है। जहां तक पायलट और उनके समर्थक विधायकों का सवाल है तो वे विधानसभा के सत्र से पहले ही विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। जैसा मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के 22 समर्थक विधायकों ने किया था। अब कर्नाटक की तरह मध्यप्रदेश में भी सिंधिया समर्थक विधायक दोबारा से चुनाव लड़कर विधायक बन सकते हैं। मध्यप्रदेश में जिन विधायकों ने कमलनाथ की सरकार गिराने के लिए इस्तीफा दिया था, उनमें से अनेक पूर्व विधायक अब शिवराज सिंह चौहान की सरकार में मंत्री हैं। राजस्थान में भी कर्नाटक और मध्यप्रदेश की तरह आने वाले दिनों में राजनीति देखने को मिल सकती है। सीएम अशोक गहलोत बारबार ऐसी राजनीति की आशंका जता चुके हैं। इससे भाजपा को ही फायदा होता है।
पायलट के बैनर हटाए:
जयुपर में कांग्रेस विधायक दल कर बैठक से पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन आदि ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में सुरजेवाला ने सचिन पायलट से घर वापसी की अपील की। सुरेजवाला ने कहा कि कहा कि पायलट जिन मुद्दों को लेकर नाराज है, उन सभी का समाधान किया जाएगा। सुरजेवाला जिस समय पायलट के प्रति नरम रुख दिखा रहे थे, उसी समय जयपुर में ही कांग्रेस मुख्यालय से पायलट के फ्लैक्स जटाए जा रहे थे। कांग्रेस के नाराज कार्यकर्ताओं ने पायलट के फ्लैक्स फाड़ दिए। चूंकि पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं, इसलिए उनके फोटो वाले फ्लैक्स पार्टी मुख्यालय पर लगे हुए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस में कितनी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि बाद में पायलट के फोटो वाले फ्लैक्स दोबारा से पार्टी मुख्यालय पर लगा दिए गए।
आयकर और ईडी के छापे:
राजस्थान में राजनीतिक हलचलों के बीच 13 जुलाई को आयकर और ईडी के अधिकारियों ने 18 स्थानों पर छापामार कार्यवाही की। सीएम गहलोत के समर्थक माने जाने वाले कांग्रेस के नेता धर्मेन्द्र राठौड़, राजीव अरोड़ा आदि के आवासों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर छापे मारे गए। आयकर विभाग की टीम ने जयपुर के निकट कूकस स्थित होटल फेयरमाउंट पर भी छापामार कार्यवाही की। बताया गया कि इस होटल में गत रात्रि को कांग्रेस के विधायक ठहरे हुए थे। बताया जा रहा है कि आम्रपाली ज्वैलर्स ग्रुप, ओम मैटल ग्रुप आदि के प्रतिष्ठानों पर भी जांच पड़ताल की गई है। यह भी बताया जा रहा है कि इन कारोबारियों से सीएम गहलोत की पारिवारिक मित्रता है। सीएम गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत वकील की हैसियत से इन व्यवसायिक संस्थानों के सलाहकार भी हैं। मालूम हो कि वैभव गहलोत मौजूदा समय में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।

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