- पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और अब सचिन पायलट।
- महाराष्ट्र में मिलिंद देवड़ा के भी बगाावती तेवर।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राहुल गांधी ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर रहते हुए प्रदेशों में जिन युवा नेताओं को आगे बढ़ाया अब वो ही एक एक कर कांग्रेस के साथ बगावत कर रहे हैं। पहले मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य ङ्क्षसधिया की बगावत से कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार चली गई और अब राजस्थान में सचिन पायलट की बगावत से अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार निशाने पर है। राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद पर रहते हुए सिंधिया को मध्यप्रदेश और पायलट को राजस्थान में आगे बढाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पुराने और बुजुर्ग कांग्रेसियों की उपेक्षा कर राहुल गांधी ने सिंधिया और पायलट को तवज्जो दी। कांग्रेस में यह माना जाने लगा कि सिंधिया और पायलट कांग्रेस के नेताओं ही नहीं बल्कि राहुल गांधी के दोस्त भी है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में वर्ष 2013 से 18 के बीच जब भाजपा की सरकारें थी, तब प्रमुख विपक्ष की भूमिका में सिंधिया और पायलट ही थे। इसमें कोई दो राय नहीं कि इन दोनों युवाओं ने अपने अपने प्रदेशों में कांग्रेस को मजबूत किया। यही वजह रही कि जब दिसम्बर 2018 के चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला तो इन दोनों ने मुख्यमंत्री के पद पर अपनी दावेदारी जता दी। यह बात अलग रही कि सिंधिया और पायलट की दावेदारी को खारिज करते हुए मध्यप्रदेश में कमलनाथ और राजस्थान में अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन पायलट और सिंधिया की अपनी पार्टी के मुख्यमंत्रियों से पटरी नहीं बैठी। सिंधिया ने तो मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार धराशायी कर दी और अब राजस्थान में पायलट भी गहलोत की सरकार को गिराने की तैयारी में है। असल में राहुल गांधी ने युवा नेताओं की जो महत्वकांक्षा जगाई उसे बाद में पूरा नहीं किया जा सका। इससे प्रतीत होता है कि राहुल गांधी ने जिन नेताओं को आगे बढ़ाया इनकी वफादारी सिर्फ मुख्यमंत्री तक के लिए थी। यदि कांग्रेस पार्टी के प्रति वफादारी होती तो कांग्रेस की सरकारों का यह हाल नहीं होता। मीडिया की खबरों के अनुसार महाराष्ट्र में मिलिंद देवड़ा ने भी बगावती तेवर दिखाए हैं। देवेड़ा को भी राहुल गांधी ने ही मुम्बई कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बनाया था। लेकिन अब देवेड़ा भी कांग्रेस से इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि युवा नेताओं की ताजा बगावत पर राहुल गांधी की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यदि मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान में कांग्रेस की सरकार धराशायी होती है तो इससे कांग्रेस को तगड़ा झटका लगेगा। जहां तक पंजाब में कांग्रेस की सरकार का सवाल है तो पंजाब की सरकार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के दम पर चल रही है। हालांकि पंजाब में राहुल गांधी ने नवजोत सिंह सिद्धू को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन अमरेन्द्र सिंह ने सिद्धू को राजनीति के मैदान से बाहर कर फेंक दिया। अब कांग्रेस के पास छत्तसीगढ़ और पंजाब ही दो बड़े राज्य रह गए है। छोटे दो-तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार होना राजनीतिक दृष्टि से खास मायने नहीं रखता है।








