- सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं-सचिन पायलट।
- राजस्थान के गुर्जर बहुल्य क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई।
- तो पायलट ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाया।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 14 जुलाई को सचिन पायलट सहित तीन मंत्रियों को हटाए जाने के बाद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि पायलट और उनके समर्थक ब्लैकमेल करने लगे हैं। ऐसे लोग भाजपा के साथ मिलकर मेरी सरकार को गिराने की साजिश कर रहे हैं। गहलोत ने कहा कि भाजपा की जिस टीम ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराई वही टीम अब राजस्थान में सक्रिय हो गई है। मैंने सचिन पायलट को अपने मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं बल्कि अपना सहयोगी माना। मैंने सम्मान देने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन पायलट और उनके समर्थकों ने आ बैल मुझे मार वाली कहावत को चरितार्थ किया है। गहलोत ने आरोप लगाया कि पायलट का भाजपा के साथ सौदा हो चुका है। लेकिन मैं दावे से कहता हंू कि भाजपा और पायलट को मात खानी पडेगी। गहलोत ने दावा किया कि मेरे पास 122 विधायकों का समर्थन है। आमतौर पर फ्लोर टेस्ट की मांग विपक्ष करता है, लेकिन राजस्थान में कांग्रेस के विधायक ही फ्लोर टेस्ट की मांग कर रहे हैं। इससे इनके मंसूबों का पता चलता है। गहलोत ने कहा कि संगठन के पदाधिकारियों और मंत्रियों को हटाए जाने से उनका मन बहुत दुखी है। यह काम हमने मजबूरी में किया है।
सचिन पायलट की प्रतिक्रिया:
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से हटाए जाने के बाद सचिन पायलट ने ट्वीट किया- सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। पायलट के इस ट्वीट से प्रतीत होता है कि उन्हें गहलोत द्वारा उठाए गए कदम की आशंका थी। पायलट को यह भी उम्मीद है कि अब वे राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को गिरा कर ही रहेंगे। पायलट के सत्य की तभी जीत होगी जब गहलोत सरकार गिर जाएगी। पायलट भी जानते हैं कि अब कांग्रेस में उनका कोई भविष्य नहीं बचा है।
गुर्जर बहुल्य क्षेत्रों में सुरक्षा:
पायलट को कांग्रेस के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम के पद से हटाए जाने के बाद 14 जुलाई को राजस्थान के गुर्जर बहुल्य जिले दौसा, सवाई माधोपुर, अजमेर, कोटा, टोंक आदि में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सरकार को आशंका है कि पायलट के समर्थन में लोग सड़कों पर आ सकते हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। माना जा रहा है कि गुर्जर समुदाय में उन गुर्जर विधायकों को लेकर भी नाराजगी है,जो अशोक गहलोत के खेमे में हैं। गुर्जर समुदाय का मानना है कि वर्ष 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनवाने में गुर्जर समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। गुर्जर का कांग्रेस को एकमुश्त समर्थन इसलिए मिला कि तब कांग्रेस का नेतृत्व सचिन पायलट के हाथों में था। गुर्जर समुदाय को पायलट के ही मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद थी।
शीर्ष नेतृत्व को आईना:
14 जुलाई को जयपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सचिन पायलट के बारे में जो जानकारी दी, उससे प्रतीत होता है कि पायलट ने पिछले तीन दिनों में कांग्रे्रस के शीर्ष नेतृत्व को आईना दिखाया है। सुरजेवाला ने कहा कि पायलट से कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने संवाद करने की कोशिश की, लेकिन पायलट ने संवाद नहीं किया। सुरजेवाला की इस जानकारी से जाहिर है कि पायलट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से बात तक नहीं की। सुरजेवाला का यह भी कहना रहा कि कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पायलट से एक दर्जन बार बात की, लेकिन इसके बाद भी पायलट संतुष्ट नहीं हुए। अब सचिन पायलट पूरी तरह भाजपा के हाथों में खेल रहे हैं। जबकि पायलट को सम्मान देने में कांग्रेस ने कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। 26 साल की उम्र में पायलट को सांसद और 33 साल की उम्र में केन्द्रीय मंत्री बनाया गया। 34 साल की उम्र में राजस्थान जैसे विशाल प्रदेश का कांग्रेस अध्यक्ष और फिर 40 साल की उम्र में उपमुख्यमंत्री पद दिया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सोनिया गांधी और राहुल गांधी का इसमें पायलट के प्रति लगाव रहा। लेकिन अब पायलट कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के स्नेह के हकदार नहीं रहे हैं।







