कांग्रेस को अभी भी उम्मीद है कि सचिन पायलट के समर्थक विधायक वापस आ जाएंगे।

  • इसलिए 19 विधायको को पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है सिर्फ मंत्री पद और संगठन के पद छीने गए हैं।
  • अब पायलट और समर्थक विधायक इस्तीफा देंगे। ताकि राजस्थान में गहलोत सरकार गिर सके।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 14 जुलाई को कांग्रेस ने सचिन पायलट से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम का पद छीन लिया। इसी प्रकार पायलट के साथ दिल्ली में रह रहे विधायक राकेश पारीक और मुकेश भाकर से क्रमश: सेवा दल और यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पद भी छीन लिया गया है। पारीक के स्थान पर हेम सिंह शेखावत और भाकर के स्थान पर गणेश घोघरा की नियुक्ति की गई है। इसी प्रकार पायलट की जगह स्कूली शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। जहां पायलट से डिप्टी सीएम का पद छीना गया है, वहीं विश्वेन्द्र सिंह और रमेश मीणा को भी गहलोत मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है। कांग्रेस खासकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को उम्मीद है कि पायलट के साथ कांग्रेस के जो 19 विधायक है उनमें से अनेक वापस लौट आएंगे। यही वजह है कि कांग्रेस ने अभी तक पायलट और उनके समर्थक विधायकों को कांग्रेस से निलंबित नहीं किया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यह तो स्वीकार किया कि सचिन पायलट भाजपा के साथ मिलकर राजस्थान में निर्वाचित सरकार को गिराने की साजिश कर रहे हैं। लेकिन सुरजेवाला ने पायलट और उनके समर्थक विधायकों पर अनुशासनहीनता की कार्यवाही करने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। सवाल उठता है कि जब सचिन पायलट भाजपा के साथ मिलकर कांग्रेस की सरकार गिरा रहे हैं, तब अुशासनात्मक कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही? कांग्रेस के इस कदम से प्रतीत होता है कि पायलट के साथ मौजूद विधायकों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस्तीफे की तैयारी:
राजस्थान की राजनीति में गत 10 जुलाई से जो घटनाक्रम चल रहा था उसमें 14 जुलाई को अशोक गहलोत खेमे की ओर से एक कदम आगे बढ़ा दिया गया है। अब सचिन पायलट खेमे की बारी है। जानकार सूत्रों के अनुसार पायलट और उनके समर्थक विधायक जल्द ही अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को भेज देंगे। अब पायलट खेमे का प्रयास होगा कि किसी भी तरह गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को गिराया जाए। सूत्रों की माने तो गहलोत के साथ जयपुर की होटल में जो सौ से ज्यादा विधायक उपस्थित हैं। उनमें से अनेक पायलट के प्रति हमर्ददी रखते हैं। ऐसे विधायक अपने असली रूप में तब सामने आएंगे, जब विधानसभा में शक्ति परीक्षण होगा। इनमें निर्दलीय और छोटे दलों के विधायक शामिल हैं। 200 विधायकों में से कांग्रेस के 106 विधायक हैं। इनमें से यदि 19 विधायक इस्तीफा दे देते हैं तो गहलोत की सरकार अल्पमत में आ जाएगी। अब यह देखना होगा कि 13 निर्दलीय विधायकों में से शक्ति परीक्षण के समय गहलोत के साथ कितने विधायक रहते हैं। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि दल-बदल कानून निर्दलीय विधायकों पर लागू नहीं होता है। विधानसभा में निर्दलीय विधायक स्वैच्छा से किसी भी दल को अपना वोट दे सकते हैं। जबकि राजनीतिक दल से जुड़ा विधायक पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है तो उसका विधायक पद समाप्त हो जाएगा। इतना ही नहीं संविधान के मुताबिक ऐसा विधायक भविष्य में चुनाव भी नहीं लड सकेगा। यही वजह है कि अब पायलट और उनके समर्थक विधायक इस्तीफे की तैयारी कर रहे हैं। पायलट समर्थकों का मानना है कि अशोक गहलोत विधानसभा में अपना बहुमत साबित नहीं कर सकेंगे।

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