लखनऊ (सय्यद गुलाम हुसैन) – डॉक्टर कफील खान को रिहा करो, देशभर में चली मुहिम, सोशल मीडिया व सड़को पर निकलकर उठी
समाजसेवियों के आवाज़ एवम् डॉक्टर कफील खान की बेगुनाही को उजागर कर रहा सोशल मीडिया, वहीं कफील खान की बेगुनाही पर डॉक्टर एसोशिएशन खामोश हैं।
इन समाजसेवियों का कहना है कि डॉ कफील खान आज अगर जेल से बाहर होते तो कोरोना वायरस के इलाज करने में सबसे आगे होते क्योंकि वो उस वक्त भी बच्चों को बचाने में सबसे आगे रहे हैं। डॉक्टर ढाल बनकर लोगों को मदद करते हैं, लेकिन उसी ढाल को एनएसए लगाकर एक पिंजरे में डाल दिया गया है–
लखनऊ, 14 जुलाई 2020, आज हर तरफ एक आवाज लगाई जा रही है डॉक्टर कफील खान को रिहा करो, डॉक्टर कफील खान की रिहाई को लेकर एक मुहिम चलाई गई सोशल मीडिया पर हर किसी ने अपनी अपनी प्रोफाइल पर कफील खान फोटो लगाकर उनकी रिहाई पर जंग छेड़ दिया है, फेसबुक ट्विटर व्हाट्सअप इंस्टाग्राम हर कहीं उनकी रिहाई पर आवाज उठाई जा रही है, इसके अलावा सड़को पर निकलकर लोग इस मुहिम को आगे बढ़ाने का काम कर रहें हैं, चैनल व अख़बारों में भी डॉक्टर कफील खान की रिहाई पर लोगों की आवाज उठाते हुए दिखाई दे रही हैं। एक तरफ देशभर में डॉक्टर कफील खान की बेगुनाही को साबित करने के लिए आवाजे उठ रही हैं समाज सेवी, कलाकार, राजनेता, शायर से लेकर हर कोई डॉक्टर कफील खान की रिहाई को लेकर उनकी पैरवी कर रहा है।
लखनऊ मे समाजसेवियों द्वारा जिलाधिकारी को रिहाई संबंधित ज्ञापन भी दिया गया लेकिन ऐसे में एक डॉक्टर की पैरवी के लिए डॉक्टर की पूरी टीम डॉक्टर एसोसिएशन खामोश है ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है।
डॉ कफील खान आज अगर जेल से बाहर होते तो कोरोना वायरस के इलाज करने में सबसे आगे होते ऐसा समाजसेविका मेहनाज खान ने अपने भाषण में कहा, आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि डॉ कफील खान आज अगर जेल से बाहर होते तो कोरोना वायरस के इलाज करने में सबसे आगे होते क्योंकि डॉक्टर कफील खान उस वक्त भी बच्चों को बचाने में सबसे आगे रहे। आगे बताया कि डॉक्टर तो हमारी ढाल हैं क्योंकि डॉक्टर हमें हर बीमारी से ढाल की तरह आगे खड़े हो जाते हैं। आज पूरे भारत में कोरोना वायरस जैसी बीमारी फैली हुई है लोग हर रोज इस बीमारी से बीमार हो रहे हैं, अस्पतालों में भीड़ लगी हुई है, आज डॉक्टर ढाल बनकर लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं। लेकिन उसी ढाल को एनएसए लगाकर एक पिंजरे में डाल दिया गया है। और अगर भारत में देखा जाए तो कोरोना वायरस लगातार आगे की ओर बढ़ता चला जा रहा है।
डॉक्टर कफील खान का इतिहास देखा जाए तो जहां भी लोग मुसीबत में फंसे हैं डॉक्टर कफील खान खुद पहुंचे हैं खुद पहुंचे भी और अपनी टीम को साथ लेकर भी पहुंचे हैं। डॉ कफील ने जिस तरीके से बच्चों को बचाया था वो तस्वीरें आज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं लोग डॉ कफील को जेल से रिहा करने की मांग कर रहे हैं, और यही कह रहे हैं कि आज अगर डॉक्टर कफील जेल से बाहर होते तो जो लोग कोरोना वायरस से परेशान हैं उनको मदद पहुंचाने में सबसे आगे खड़े होते। डॉ कफील खान जिन्हें एनएसए लगाकर जेल में डाल दिया गया है। डॉक्टर खान की रिहाई पर इस मुहिम में शामिल लोगों ने कहा डॉ कफील खान को जिस तरीके से जेल में डाल दिया गया है, अगर उनका इतिहास देखा जाए तो उनका इतिहास भी ऐसा नहीं है उनकी खता ये थी कि उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जाकर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भाषण दिया था, लेकिन यहां नेता किसी के खिलाफ बोलकर इलेक्शन जीत जाते हैं, और डॉ कफील खान के इसी भाषण की वजह से उन्हें जेल में डाल दिया गया उन पर एनएसए लगाया गया कि डॉ कफील खान से लॉयन ऑर्डर को खतरा है
जबकि जांच टीम ने डॉ कफील खान को निर्दोष साबित कर दिया था..
बताते चलें कि 10 अगस्त 2017 में गोरखपुर के एक हॉस्पिटल में 60 बच्चों की जान चली गई थी। उस वक्त भी डॉक्टर कफील खान एक फरिश्ते की तरह उतरे थे और उन्होंने बच्चों को बचाया था, उन्होंने जल्द से जल्द अपनी टीम के साथ ऑक्सीजन का इंतजाम किया था और हॉस्पिटल में जो बच्चे बीमार थे उन्हें डॉक्टर कपिल ने बचाया था।
डॉ कफील खान की चर्चाएं चारों तरफ होने लगी थी कि कैसे एक डॉक्टर कफील खान ने हीरो बनकर बच्चों की जान बचाई है। लेकिन डॉ कफील खान ने बच्चों की जान बचा कर तो अच्छा काम किया था लेकिन बाद में डॉक्टर कफील खान को ही जेल में बंद कर दिया गया था, सोचिए एक डॉक्टर ने बच्चों की जान बचाई थी उसे तो सम्मानित किया जाना चाहिए था लेकिन सम्मान के बजाय उन्हें जेल में डाल दिया गया और उन पर जांच बिठाई गई। लेकिन बाद में जांच टीम ने डॉ कफील खान को निर्दोष साबित कर दिया था। लेकिन इसके बाद डॉ कफील खान पर दोबारा जांच बिठा दी, क्या एक जिंदगी बचाने वाले इंसान से किसी को खतरा हो सकता है। आज डॉक्टर कफील खान जेल में बंद है और उन पर आरोप ये है कि उनसे लॉयन ऑर्डर को खतरा है। बरहाल कफील खान पर लगायी गई एनएसए मामले में सुनवाई अब 15 जुलाई को होगी
अब सवाल ये उठता है कि जब डॉक्टर कफील खान जेल से बाहर थे तो क्या देश में उनकी वजह से किसी को कोई खतरा हुआ था, बल्कि उतने दिन लोगों का निशुल्क इलाज होता रहा, सवाल ये भी कि एक डॉक्टर की रिहाई और बेगुनाही पर डॉक्टर एसोशिएशन क्यों खामोश?
ऐसे में इस वक्त देश में कोरोना वायरस की महामारी फैली हुई है तब कफील खान जैसे डॉक्टर को बाहर होना चाहिए क्योंकि डॉक्टर हमारी ढाल हैं और अगर कफील खान जेल से बाहर होंगे तो कोविड-19 के इलाज में सबसे आगे होंगे ऐसा सभी लोगों का मानना था।







