सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोना और मास्क पहनना कोरोना महामारी से बचने के कारगर तरीके हैं और इन्हें सभी को गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है।

China active in disposal of new corona virus infected pneumonia.

उत्तरप्रदेश (तहरीम वाहिद) –
दुनिया कोरोने के बढ़ते संक्रमण से जूझ रही है। इस बीच यह बात सामने आ रही है कि यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड को कोरोना वैक्सीन के प्रारंभिक परीक्षण में सफलता मिली है। आज आज इसकी घोषणा की जा सकती है। आईटीवी के राजनीतिक संपादक रॉबर्ट पेस्टन ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। आपको बता दें कि कोरोना वैक्सीन के परीक्षण के लिए एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) नामक कंपनी को लाइसेंस दिया गया था। तीसरे चरण का परीक्षण ब्राजील में शुरू किया गया था, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। पेस्टन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, ‘मैं सुन रहा हूं कि ऑक्सफोर्ड COVID-19 वैक्सीन के शुरुआती परीक्षणों पर जल्द ही सकारात्मक खबर मिलेगी। जाहिर है कि वैक्सीन एंटीबॉडी और टी-सेल (किलर सेल) की प्रतिक्रिया पैदा कर रहा है। यह शोधकर्ताओं के लिए उम्मीद बढ़ाने वाली होगी।”
उन्होंने कहा कि अगर ऑक्सफोर्ड टीका प्रभावी साबित होता है, तो सितंबर के शुरू में बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन किया जा सकता है।
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि क्लीनिकल परीक्षण के बाद कोरोना का सुरक्षित वैक्सीन तैयार किया गया। परीक्षण में 18 लोग शामिल थे। ट्रायल के बाद उनमें कोई भी गंभीर और विपरित लक्षण नहीं देख। सभी को डिस्चार्ज किया जा चुका है।
एक अन्य वैक्सीन निर्माता मॉडर्न इंक ने मंगलवार को कहा कि 27 जुलाई या उसके आसपास COVID-19 वैक्सीन के अंतिम चरण का परीक्षण शुरू किया जा सकता है। मॉडर्न ने कहा कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका में 87 अध्ययन स्थानों पर ट्रायल आयोजित करेगा वहीं दूसरी ओर डब्ल्यूएचओ ने जो बातें कहीं वह भारत समेत पूरी दुनिया के लिए चिंता की खबर है। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसस ने कहा कि दुनिया के बहुत सारे देश कोविड से निपटने के मामले में गलत दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोन संक्रमण के नए मामले बढ़ रहे हैं, इससे यह साबित होता है कि जिन उपायों की बात की जा रही है, उनका पालन नहीं हो रहा है।
डॉ. टेड्रोस ने कहा कि दुनिया भर के नेता जिस तरह से महामारी से निपटने की कोशिश कर रहे हैं और कदम उठा रहे हैं उससे लोगों का भरोसा घटा है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस अब भी लोगों का सबसे बड़ा दुश्मन है, लेकिन दुनिया भर में कई देशों की सरकारें जो कदम उठा रही हैं, उससे यह पता नहीं चलता कि कोरोना को यह गंभीर खतरे के रूप में ले रही हैं।
डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग, हाथ धोना और मास्क पहनना कोरोना महामारी से बचने के कारगर तरीके हैं और इन्हें सभी को गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भविष्य में ऐसा लगता नहीं है कि पहले की तरह सब कुछ सामान्य हो जाएगा। डॉ. टेड्रोस ने कहा कि अगर बुनियादी चीजों का पालन नहीं किया गया तो कोरोना थमेगा नहीं, वह बढ़ता ही चला जाएगा। यह बद से बदतर होता चला जाएगा।
डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन निदेशक माइक रायन ने कहा कि अमरीका में लॉकडाउन में ढील और कुछ इलाकों को खोलने से कोरोना संक्रमण के और तेजी से फैलने का खतरा है। लातिन अमरीका में एक लाख 45 हजार से ज्यादा लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। खबरों में कहा जा रहा है कि मौत का आंकड़ा और बढ़ेगा, क्योंकि जितनी जरूरत है उतनी टेस्टिंग नहीं हो रही है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आकंड़ों के मुताबिक, अमरीका अभी कोरोना की मार सबसे ज्यादा झेल रहा है। यहां अब तक 33 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं और एक लाख 35 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।
डॉ. रायन ने कहा कि हमें वायरस के साथ कैसे जीना है इसे सीखना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह उम्मीद करना कि वायरस को खत्म किया जा सकता है या कुछ महीनों में प्रभावी वैक्सीन तैयार हो जाएगी, इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी तक पता नहीं है कि कोरोना वायरस से ठीक होने वालों में इम्युनिटी बन रही या नहीं। उन्होंने कहा कि और अगर बन भी रही है तो यह नहीं पता है कि कब तक प्रभावी रहेगी। अतः आप सभी पाठकों से अपील करते हैं कि आप लोग स्वयं का एवम् अपने प्रियजनों का ख्याल रख्खै। स्वास्थ्य रहें सुरक्षित रहें।

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