राजस्थान में जिस प्रकार सचिन पायलट कांग्रेस के साथ हैं उसी सोच के साथ वसुंधरा राजे भी भाजपा में नजर आईं।

  • जयपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का ज़ोरदार स्वागत। सतीश पूनिया ने हाथी से माला पहनवाई।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 2 मार्च को जयपुर दौरे पर रहे। सांगानेर एयरपोर्ट से बिड़ला एडीटोरियम तक के मार्ग में नड्डा का शानदार स्वागत हुआ। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया भी नड्डा के साथ खुले वाहन में उपस्थित रहे।

नड्डा जब बिड़ला ऑडिटोरियम के बाहर पहुंचे तो सतीश पूनिया ने हाथी से नड्डा को माला पहनवाई। इस दृश्य पर उपस्थित लोगों ने जोर दार तालियां बजाई और पूनिया की रणनीति की प्रशंसा की। हालांकि पूर्व सीएम वसुंधरा राजे नड्डा के काफ़िले के साथ नहीं थी, लेकिन एयरपोर्ट पर राजे ने भी नड्डा का स्वागत किया। राजे बिड़ला ऑडिटोरियम में हुई प्रदेश भाजपा की कार्य समिति की बैठक में केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, कैलाश चौधरी, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर आदि के साथ मंच पर उपस्थित रहीं। नड्डा के दौरे और कार्य समिति की बैठक में सब की निगाहें पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर ही लगी हुई थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि राजे ने एयरपोर्ट से लेकर प्रदेश कार्य समिति की बैठक तक में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। लेकिन सवाल उठता है कि राजे की उपस्थिति अब भाजपा में कैसी है?

राजे के समर्थकों ने घोषणा कर रखी है कि 8 मार्च को जन्म दिन के मौके पर भरतपुर क्षेत्र में धार्मिक यात्रा निकाली जाएगी। इसे राजे का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। गत दिनों राजे समर्थक भाजपा के 20 विधायकों ने प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया की कार्यशैली को लेकर प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखा। जानकारों के अनुसार वसुंधरा राजे भाजपा में उसी तरह नजर आ रही हैं, जिस तरक कांग्रेस में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट नजर आते हैं। दिखाने के लिए पायलट भी 12 और 13 फरवरी को राहुल गांधी के दौरे में साथ रहे। लेकिन 19 फरवरी को जयपुर के निकट चाकसू में अपना शक्ति प्रदर्शन भी कर दिया। चाकसू में आयोजित किसान महापंचायत में पायलट के समर्थक माने जाने वाले कांग्रेस के 15 विधायक उपस्थित रहे।

पायलट की उपस्थिति से भी सवाल उठता है कि क्या अब पायलट संतुष्ट हो गए हैं और आगामी दिनों में प्रदेश के चार उपचुनावों में कांग्रेस को जितवाने का काम करेंगे? 27 फरवरी को जब दो चुनावी सभाओं में सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ हवाई यात्रा की और मंच पर उपस्थिति दर्ज करवाई, तब इस एकता का श्रेय प्रभारी महासचिव अजय माकन ने लिया। माकन ने कहा कि कांग्रेस में कोई गुटबाज़ी नहीं है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट मिलकर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत करवाएंगे। ठीक उसी प्रकार 2 मार्च को भाजपा के प्रदेश प्रभारी महासचिव अरुण कुमार ने भी भूमिका निभाई। अरुण कुमार वसुंधरा राजे को अपने वाहन में बैठाकर एयरपोर्ट तक लाए। अरुण कुमार का भी कहना है कि भाजपा में कोई गुटबाज़ी नहीं है।

भाजपा के सभी नेता एकजुट हैं। लेकिन सब जानते हैं कि जिस प्रकार कांग्रेस में सरकार और संगठन को चलाने में सचिन पायलट की कोई भूमिका नहीं है, उसी प्रकार भाजपा के प्रदेश संगठन में राजे की कोई भूमिका नजर नहीं आती है। राजे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में भी राजे सक्रिय नहीं है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि भाजपा में जो असंतुष्ट गतिविधियों को रही है उन पर राजे ने अभी तक भी कोई सफाई नहीं दी है। राजे के समर्थक खुले आम कह रहे हैं कि राजस्थान में वसुंधरा राजे का नेतृत्व ही स्वीकार किया जाएगा। आने वाले दिनों में पता चलेगा कि वसुंधरा राजे भाजपा में रह कर संतुष्ट हैं या नहीं, लेकिन दो मार्च को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के समक्ष प्रदेश अध्यक्ष पूनिया ने अपनी रणनीति का जबर्दस्त प्रदर्शन किया है। न केवल नड्डा शानदार का करवाया, बल्कि भाजपा के सभी नेताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास भी किया।

वसुंधरा राजे की उपस्थिति के प्रति भी पूनिया का सकारात्मक रुख रहा। कार्य समिति की बैठक में भी पूनिया ने प्रदेश संगठन में एकता की बात कही। पूनिया ने कहा कि कोरोना काल में विपरीत परिस्थितियों में भी भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ज़रूरतमंद लोगों की मदद की है। वे स्वयं दो बार कोरोना संक्रमित हुए लेकिन फिर भी संगठन का काम जारी रखा। पूनिया ने कहा कि नड्डा लगातार हमारे संपर्क में रहे और मार्ग दर्शन देते रहे।

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