तो गुजरात में मोदी और दिल्ली में केजरीवाल को पसंद करते है लोग।

  • दिल्ली नगर पालिका के उप चुनाव में भाजपा का खाता भी नहीं खुला।
  • जबकि गुजरात के पंचायतीराज और शहरी निकायों में भाजपा का कब्जा।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – 3 मार्च को दिल्ली में नगर पालिका के पांच वार्डों के उपचुनावों का परिणाम घोषित हुआ। चार वार्डों में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जीते तो एक वार्ड में कांग्रेस को सफलता मिली। यानि पांच वार्डों में से एक वार्ड में भी भाजपा की जीत नहीं हुई।

यह तब है जब दिल्ली की 7 लोक सभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। गत विधानसभा चुनाव में भी केजरीवाल की पार्टी को जबर्दस्त सफलता मिली, इसलिए केजरीवाल लगातार दूसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। पालिका के उप चुनाव परिणाम बताते हैं कि दिल्ली के लोग केजरीवाल को पसंद करते हैं। यह बात अलग है कि लोकसभा चुनाव के समय दिल्ली के लोगों की पसंद बदल जाती है। दिल्ली नगर पालिका के उप चुनाव में भले ही भाजपा को सफलता नहीं मिली हो, लेकिन गुजरात के पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनावों में भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिली है।

गुजरात के 31 जिला पंचायतों में भाजपा का कब्जा हुआ है। इसी प्रकार 81 नगर पालिकाओं में से 75 पर भाजपा को सफलता मिली है। गुजरात में मिली सफलता पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी गुजरात के मतदाताओं का आभार जताया है। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी कहा है कि पंचायतीराज और शहरी निकायों में जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास कार्यों को जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि इन चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल के निधन के बाद गुजरात में कांग्रेस को संभालने वाला कोई नहीं रहा है।

पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव में मिली बुरी हार के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा और प्रति पक्ष के नेता परेश धनानी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। गुजरात में भले ही नरेन्द्र मोदी का जादू चल रहा हो, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली में मुख्यमंत्री केजरीवाल की लोकप्रियता कम नहीं हो रही है। दिल्ली का आम नागरिक भी मानता है केजरीवाल के कारण सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आई है, जिसकी वजह से भ्रष्टाचार कम हुआ है। बिजली पानी मुफ्त देने का वायदा केजरीवाल ने पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है। दिल्ली के सरकारी स्कूल अब पब्लिक स्कूलों से अच्छे परिणाम दे रहे हैं। दिल्ली वासियों को लगता है कि मूलभूत सुविधाएँ केजरीवाल ही उपलब्ध करवा सकते हैं।

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