फर्टिलाइजर घोटाले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बड़े भाई अग्रसेन गहलोत भी चपेट में आए।

  • जोधपुर में खाद्य बीज के प्रतिष्ठान और घर पर ईडी का छापा।
  • घोटालेबाजों को पकडऩे के लिए देश के पांच राज्यों में छापामार कार्यवाही।
  • फेयर माउंट होटल के मालिक रतनकांत शर्मा को टैक्स चोरी का नोटिस।
  • इधर राजस्थान में एसओजी, एसीबी सक्रिय।
  • राजनीति के कारण राजस्थान में छापामारी का तमाशा।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – देशव्यापी फर्टिलाइजर घोटाले के आरोपियों को पकडऩे के लिए 22 जुलाई को केन्द्रीय प्रवर्तन निदेशालय ने राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, और पश्चिम बंगाल में खाद्य बीज कारोबारियों के यहां छापामार कार्यवाही की है। ईडी की इस कार्यवाही की चपेट में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बड़े भाई अग्रसेन गहलोत भी आ गए हैं। 22 जुलाई को अग्रसेन गहलोत के जोधपुर स्थित प्रतिष्ठान और घर पर छापामार कार्यवाही की गई। अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री होने की स्थिति को देखते हुए ईडी अधिकारियों ने छापे की कार्यवाही के समय सीआरपीएफ के सशस्त्र जवानों को तैनात रखा। इस कार्यवाही से राजस्थान पुलिस को पूरी तरह दूर रखा गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जो फर्टिलाइजर घोटाला हुआ है उसमें अग्रसेन गहलोत की क्या भूमिका है। सीएम के भाई के घर पर ही छापे की कार्यवाही से राजस्थान की राजनीति में जबर्दस्त उबाल आ गया है। असल में सीएम गहलोत को ऐसी कार्यवाही की आशंका पहले से ही थी, इसलिए सीबीआई के राजस्थान में सीधे प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। जानकारों की माने तो गहलोत को ईडी की कार्यवाही की पहले से ही भनक थी। इधर सीएम के भाई पर शिकंजा कसा जा रहा है तो उधर 22 जुलाई को ही जयपुर की बहुचर्चित फेयर माउंट होटल के मालिक रतनकांत शर्मा को आयकर विभाग ने टैक्स चोरी का नोटिस थमा दिया। इसी होटल में सीएम गहलोत सहित 109 विधायक पिछले पांच दिनों से ठहरे हुए हैं। इसी होटल से गहलोत सरकार चल रही है। विधायकों के आने से पहले इसी होटल में आयकर विभाग ने छापामारा था। बताया जाता है कि फेयर माउंट होटल के कारोबार से सीएम गहलोत के पुत्र और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष वैभव गहलोत भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि सीएम गहलोत और 109 विधायक होटल में आराम से रह रहे हैं।
सीएम के ओएसडी से भी पूछताछ:
केन्द्रीय जांच एजेंसियां इन दिनों राजस्थान में लगातार सक्रिय हैं। एजेंसियों के निशाने पर सीधे तौर पर सीएम अशोक गहलोत है। 21 जुलाई को ही सीएम गहलोत के ओएसडी और प्रदेशभर के आरएएस अफसरों के तबादले में दखल रखने वाले देवाराम सैनी से सीबीआई ने लम्बी पूछताछ की। इसके लिए सैनी को सीबीआई के जयपुर स्थित ऑफिस में तलब किया गया। यह पूछताछ चूरू जिले के राजगढ़ के थानाधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई के सुसाइड प्रकरण में की गई। जानकारी के अनुसार कॉल डिटेल में मृतक थानाधिकारी और ओएसडी देवाराम व पीएफओ के नम्बरों से संवाद होना बताया गया है। इसी सिलसिले में कांग्रेस के विधायक कृष्णा पूनिया से भी सीबीआई ने पूछताछ की है। पूनिया इस समय सीएम गहलोत के खेमे में हैं।
जवाबी कार्यवाही:
जानकार सूत्रों के अनुसार राजस्थान में एसओजी और एसीबी ने जो मुकदमे दर्ज किए हैं, उन्हीं के जवाब में केन्द्रीय एजेंसियां सक्रिय हुई है। एसओजी के अधिकारी लगातार उन लोगों को पकड़ रहे हैं या पूछताछ कर रहे हैं, जिन पर कांग्रेस के विधायकों को खरीदने का आरोप है। हालांकि सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के 19 और 3 निर्दलीय विधायक अज्ञातवास में है। एसओजी हरियाणा में डेरा जमाकर बागी विधायकों को खोजने में लगी हुई है। राजस्थान के डीजीपी भूपेन्द्र यादव ने हरियाणा के डीजीपी को पत्र लिखकर एसओजी को सहयोग करने की अपील की है। यादव चाहते हैं कि पायलट के समर्थक विधायकों के बारे में हरियाणा के डीजीपी जानकारी दें। पायलट के विधायकों को पकडऩे के लिए एसओजी हरियाणा में लगातार छापामार कार्यवाही कर रही है। जयपुर में भी आरोपी व्यक्तियों को लगातार रिमांड पर लेकर दबाव बनाया जा रहा है।

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