- डायरेक्शन शब्द पर आपत्ति जताई। प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की।
- अस्तबल से घोड़े भागने वाला बयान देने वाले कपिल सिब्बल करेंगे पैरवी।
- आखिर कब तक होटल में बंधक बनी रहेगी गहलोत सरकार। प्रदेश कोरोना से बेहाल।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में संभवत: यह पहला अवसर होगा, जब कोई मामला हाईकोर्ट में लम्बित हो और विधानसभा अध्यक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी राय व्यक्त करें। ऐसा ही कुछ नया और अजीब सा राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने 22 जुलाई को किया। सब जानते हैं कि प्रदेश के बागी कांग्रेस विधायकों की अयोग्यता के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश सुनवाई कर रहे हैं। सुनवाई का दौर 21 जुलाई को ही समाप्त हुआ है और 24 जुलाई को फैसला आने की उम्मीद है। लेकिन हाईकोर्ट का फैसला आने से पहले ही सीपी जोशी की ओर से वरिष्ठ वकील सुनील फर्नांडिस ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की जानकारी जोशी ने स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। जोशी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के पद की गरिमा बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई है। वहीं संविधान के जानकारों को जोशी की याचिका पर आश्चर्य हो रहा है, क्योंकि अभी हाईकोर्ट ने कोई निर्णय नहीं दिया है। जोशी ने सचिन पायलट गुट के जिन 19 विधायकों को अयोग्य करार देने का जो नोटिस दिया था उसे ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर जोशी के वकील ने भी अपना पक्ष रखा है। विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों को लेकर जब कोई विवाद कोर्ट में लम्बित होता है तो विधानसभा अध्यक्ष प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते हैं, लेकिन 22 जुलाई को तो जोशी ने स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर टिप्पणी की। जोशी को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इंद्रजीत महांति के डायरेक्शन शब्द पर भी आपत्ति है। कोर्ट ने 17 जुलाई को सुनवाई के बाद विधानसभा अध्यक्ष से रिक्वेस्ट की थी कि नोटिस की मियाद को 21 जुलाई तक बढ़ा दिया जाए, लेकिन 21 जुलाई को सुनवाई के बाद कोर्ट ने नोटिस की मियाद बढ़ाने के लिए डायरेक्शन शब्द का इस्तेमाल किया। डायरेक्शन शब्द से ही जोशी को लगता है कि विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों में दखल दिया जा रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 21 जुलाई को ही सीजेआई महांति ने जोशी सहित सभी पक्षकारों को नैतिकता का भी पाठ पढ़ाया था। किसी से भी इतनी नफरत न करने की सलाह दी थी। विधानसभा अध्यक्ष जोशी तो स्वयं कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं। हो सकता है कि उन्हे नैतिकता का पाठ नागवार लगा, इसलिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।
सिब्बल करेंगे पैरवी:
राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल पैरवी करेंगे। सिब्बल ने 22 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया कि याचिका पर आज ही सुनवाई की जाए। लेकिन कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिए कि याचिका को रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और रजिस्ट्रार जब सूचीबद्ध करें, तब सुनवाई हो। माना जा रहा है कि अब 23 जुलाई को जोशी की याचिका पर सुनाई हो सकती है। मालूम हो कि कपिल सिब्बल ने कांग्रेस नेेता की हैसियत से राजस्थान के कांग्रेस विधायकों स्थिति पर टिप्पणी की थी। हालांकि सिब्बल ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन राजस्थान में सचिन पायलट के विधायकों की बगावत पर चिंता प्रकट की थी। सिब्बल का कहना रहा कि जब अस्तबल से घोड़े भाग जाएंगे तब जागोगे? अब वो कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पैरवी करेंगे।
कब तक बंधक रहेगी सरकार:
राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक हालातों के अंतर्गत सवाल उठता है कि आखिर अशोक गहलोत की सरकार कब तक फेयर माउंट होटल में बंधक रहेगी। सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 विधायक अज्ञातवास में चले जाने के बाद से ही सीएम गहलोत कांग्रेस निर्दलीय और कुछ छोटे दलों के 109 विधायकों को लेकर फेयर माउंट होटल में पिछले पांच दिनों से बैठे हुए हैं। किसी भी विधायक को होटल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। प्रदेश में भले ही कोरोना वायरस से त्राहि त्राहि मची हुई हो, लेकिन सरकार का काम काज होटल से ही चल रहा है। पॉजिटिव मरीजों की संख्या लगातार बढऩे से प्रदेशभर में भय ओर दहशत का माहौल है। लेकिन राजनीति की वजह से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। सरकारी अस्पतालों का बहुत बुरा हाल है। इन दिनों जो मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, उनके रिश्तेदार बता सकते हैं कि सरकारी अस्पताल नरक बने हुए हैं। भले ही चिकित्सा कर्मियों को कोरोना काल में भगवान का दर्जा दिया जा रहा हो, लेकिन मरीज के रिश्तेदार बता सकते हैं कि भगवान बने चिकित्सा कर्मियों का अस्पताल में कैसा व्यवहार है।







