तो अशोक गहलोत ने भी सचिन पायलट वाली जीत को बरकरार रखा।

  • राजस्थान में विधानसभा के तीन में से दो उपचुनाव कांग्रेस ने जीते।
  • भाजपा ने राजसमंद सीट बरकरार रखी।
  • दिवंगत विधायकों के परिवार के सदस्य ही चुनाव जीते।
  • सुजानगढ़ में हनुमान बेनीवाल के कारण भाजपा हारी।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – 2 मई को राजस्थान के विधानसभा के तीन उपचुनावों के परिणाम भी आ गए। तीन सीटों में से 2 पर सत्तारूढ़ कांग्रेस को सफलता मिली है। वर्ष 2018 के चुनावों में भी इन दोनों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे। तब प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व सचिन पायलट कर रहे थे। उपचुनाव के परिणाम के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कह सकते हैं कि पायलट वाली जीत को बरकरार रखा है। चूरू के सुजानगढ़ से मनोज मेघवाल और भीलवाड़ा के सहाड़ा से कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती गायत्री देवी विजयी हुई है, जबकि राजसमंद से भाजपा प्रत्याशी दीप्ति माहेश्वरी 5 हजार 310 वोटों से जीती हैं। वर्ष 2018 में भी यहां से भाजपा की जीत हुई थी।

इन चुनाव परिणामों पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के अपने अपने तर्क हैं, लेकिन मतदाताओं दिवंगत विधायकों के परिवार के सदस्यों को ही जीताया है। सुजानगढ़ से दिवंगत विधायक भंवरलाल मेघवाल के पुत्र मनोज मेघवाल और सहाड़ा से दिवंगत विधायक कैलाश वित्रेदी की पत्नी गायत्री देवी चुनी गई है। इसी प्रकार राजसमंद से भाजपा की दिवंगत विधायक श्रीमती किरण माहेश्वरी की पुत्री श्रीमती दीप्ति माहेश्वरी विजयी हुई है। भाजपा कह सकती है कि उसने अपनी सीट को बरकरार रखा है। लेकिन उपचुनाव के परिणाम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राहत देने वाले हैं, क्योंकि यदि सुजानगढ़ और सहाड़ा में से एक भी सीट पर हार हो जाती तो सचिन पायलट खेमा हमलावर होता। यही वजह है कि अब प्रदेशभर में गहलोत समर्थक उत्साह में हैं। समर्थकों का मानना है कि इससे गहलोत सरकार को और मजबूती मिलेगी। सीएम गहलोत भी कह सकते हैं कि उनकी सरकार की नीतियों पर जनता ने भरोसा जताया है। लेकिन गहलोत के लिए यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि दो सीटों पर जीत को बरकरार रखा है।

बेनीवाल के कारण हार:
चूरू के सुजानगढ़ में भाजपा की हार का कारण हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी के उम्मीदवार सीताराम को 26 हजार से भी ज्यादा वोट मिलना है। यदि आरएलपी और भाजपा के वोट मिला दिए जाएं तो कांग्रेस के वोट कम पड़ जाएंगे। यह कहा जा सकता है कि बेनीवाल ने एक तरह से सीएम गहलोत की मदद की है। मालूम हो कि बेनीवाल ने गत लोकसभा का चुनाव नागौर से भाजपा के समर्थन से जीता था, लेकिन कृषि कानूनों के विरोध में बेनीवाल ने भाजपा से नाता तोड़ा लिया। बेनीवाल ने तीनों उपचुनाव में अपने उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन सबसे ज्यादा असर सुजानगढ़ में देखने को मिला। सुजानगढ़ की हार का नुकसान चूरू के भाजपा सांसद राहुल कस्बा को भी उठाना पड़ा सकता है। चूरू में राजनीति करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने पहले की कह दिया था कि हम राहुल कस्बा के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे। यानी राठौड़ को जो मेहनत करनी चाहिए थी वो नहीं की। आरएलपी के उम्मीदवार को भाजपा के बराबर वोट मिलना भाजपा के लिए नुकसानदेह है। जाहिर है कि भाजपा नेताओं ने सुजानगढ़ में अपेक्षित मेहनत नहीं की।

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