अशोक गहलोत को जो काम 12 जुलाई को करना चाहिए था, वो 24 जुलाई को किया। इससे मुख्यमंत्री खेमे की रणनीति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

  • राजनीति के कीचड़ में सनी गेंद अब विधानसभा अध्यक्ष के पाले से निकल कर राजभवन पहुंची।
  • अब हुई राज्यपाल के समक्ष विधायकों की परेड।
  • सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद हाईकोर्ट से गहलोत खेमे को झटका।
  • अब सचिन पायलट खेमे का हौंसला बुलंद होगा।
  • हाईकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस पर रोक लगाई।
  • केन्द्र सरकार को पक्षकार बनाया तथा अगली सुनवाई की तारीख भी नहीं दी।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – 24 जुलाई को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने 100 से भी ज्यादा समर्थक विधायकों की परेड राज्यपाल कलराज मिश्रा के समक्ष करवाई। गहलोत को यह शक्ति परीक्षण इसलिए करवाना पड़ा, क्योंकि राज्यपाल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अनुमति देने में विलम्ब कर रहे हैं। गहलोत ने 23 जुलाई की शाम को राज्यपाल से मुलाकात कर विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। गहलोत चाहते थे कि राज्यपाल मिश्र भी उसी तरह तत्काल निर्णय लें, जैसे विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सचिन पायलट गुट के 19 विधायकों को अयोग्यता वाला नोटिस जारी किया था। 13 जुलाई को सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने 19 विधायकों की शिकायत की और 14 जुलाई को सीपी जोशी ने नोटिस जारी कर दिया। लेकिन अब राज्यपाल ऐसी कोई जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। गहलोत ने विशेष सत्र की जो फाइल सौंपी थी, उस पर राज्यपाल मनन कर रहे हैं। हो सकता है कि इस फाइल पर राज्यपाल अब विधि विशेषज्ञों की राय लें, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। राज्यपाल अब जानना चाहते है कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है? 24 जुलाई को मुख्यमंत्री ने अपने समर्थक विधायकों की जो परेड करवाई है, उसे राज्यपाल कलराज मिश्र कितनी गंभीरता से लेते हैं, यह तो आने वाले दिनों मे पता चलेगा। लेकिन इतना जरूर है कि गहलोत को विधायकों की परेड करवाने वाला जो कार्य 12 जुलाई को करना चाहिए था, वो अब 24 जुलाई को किया है। जब सचिन पायलट कांग्रेस के 18 तथा 3 निर्दलीय विधायकों को लेकर दिल्ली लैंड कर गए। तभी गहलोत को अपना बहुमत सिद्ध कर देना चाहिए था, लेकिन तब गहलोत की रणनीति अपने बहुमत से ज्यादा पायलट सहित 19 विधायकों की विधायकी छीन लेना था। गहलोत को उम्मीद थी कि बागियों की विधायकी आसानी से छीन जागी। लेकिन अब विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के नोटिस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। 24 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता ने न केवल विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के 14 जुलाई के नोटिस पर रोक लगाई, बल्कि सचिन पायलट खेमे की प्रार्थना पर केन्द्र सरकार को भी इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश जारी कर दिया है। यानि अब कोई भी निर्णय देने से पहले केन्द्र सरकार भी अपना पक्ष रख सकेगी। इतना ही नहीं मामले में अगली सुनवाई की तारीख भी निर्धारित नहीं की है। आमतौर पर ऐसे महत्वपूर्ण मामलों मे कोर्ट अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित करता है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद विधानसभा अध्यक्ष 14 जुलाई वाले नोटिस के संबंध में कोई निर्णय नहीं ले सकेंगे। हाईकोर्ट के इस आदेश से यह भी प्रतीत होता है कि विधानसभा अध्यक्ष के किसी नोटिस या आदेश की न्यायिक समीक्षा हो सकती है। हाईकोर्ट के ताजा आदेश से जहां सीएम अशोक गहलोत के खेमे को तगड़ा झटका लगा है, वहीं पायलट गुट के हौंसले बुलंद हुए हैं। 19 विधायकों की विधायकी छीन लेने का ख्वाब धरा रह गया है। 19 विधायकों की अयोग्यता वाले इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में 27 जुलाई को सुनाई होगी। हाईकोर्ट ने 24 जुलाई को जो निर्णय दिया है, उसे भी सुप्रीम कोर्ट देखेगा। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के प्रकरण में खासबात यह है कि 23 जुलाई की सुनवाई में ही कोर्ट ने पहले ही कह दिया कि विधायकों का असंतोष दबाया नहीं जा सकता है। विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के 19 विधायकों को अयोग्य घोषित करने वाले नोटिस के संदर्भ में कोर्ट ने कहा कि ऐसे तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। आखिर विधायक भी निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। इससे पहले भी राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महांति कह चुके हैं कि इतनी नफरत ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ऐसी टिप्पणियां विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की याचिकाओं पर हुई है।
गेंद अब राज्यपाल के पाले में :
राजनीति के कीचड़ में सनी गेंद अब राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र के पाले में पहुंच गई है। अब तक यह गेंद विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के पाले में थी। लेकिन हाईकोर्ट ने गेंद को विधानसभा अध्यक्ष के पाले से बाहर कर दिया है। अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी चाहते हैं कि विशेष सत्र बुलाकर विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया जाए।

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