- सचिन पायलट को गालियां बकने के बाद अशोक गहलोत के निशाने पर राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र हैं।
- यश बैंक घोटले में फंसे रतनकांत शर्मा के कारोबारी सांझेदार हैं सीएम गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत।
- शर्मा की होटल फेयरमोंट में 15 दिनों से बंधक है समर्थक विधायक। फिर भी गांधीवाद की दुहाई।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनकड़ का विवाद किसी से छिपा नहीं है। विवाद चरम पर होने के बाद भी ममता ने कभी राजभवन पर कब्जे का प्रयास नहीं किया। लेकिन गांधीवादी छवि होने का दावा करने वाले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 25 जुलाई को पांच घंटे तक राजभवन और राज्यपाल कलराज मिश्र पर अपना कब्जा बनाए रखा। ऐसा नहीं कि यह कार्य गहलोत ने चोरी छीपे किया। राजभवन जाने से पहले सार्वजनिक धमकी दी कि यदि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की अनुमति नहीं दी गई तो राजस्थान की जनता राजभवन का घेराव कर लेगी। तब हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। इस धमकी के तुरंत बाद गहलोत अपने समर्थक विधायकों के साथ राजभवन पहुंच गए। कोई पांच घंटे तक राजभवन में जमकर धरना प्रदर्शन नारेबाजी की गई। यहां तक कि टेंट का सामान भी मंगवा लिया। लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बात यह रही कि प्रदर्शनकारी, विधायकों, मंत्रियों और कांग्रेस के नेताओं का नेतृत्व खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कर रहे थे। हालांकि राज्यपाल मिश्र एक मजे हुए राजनेता हैं, लेकिन फिर भी घबराए राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से आग्रहपूर्वक पूछा कि अब राज्यपाल और राजभवन की सुरक्षा कौन करेगा? देश के संघीय ढांचे में राज्यपाल केन्द्र के प्रतिनिधि होते हैं। अब यदि किसी राज्य का मुख्यमंत्री अपने ही प्रदेश के राज्यपाल को बंधक बना ले तो क्या केन्द्र सरकार सेना भेज कर राज्यपाल को मुक्त करवाएगी? माना कि सचिन पायलट की बगावत के बाद गहलोत बेहद गुस्से में हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहंी कि वे लोकतंत्र को ही तार तार कर दें? क्या ऐसे तौर तरीकों से राज्यपाल को बाध्य कर विशेष सत्र बुलवाया जाएगा? गहलोत के पास गृह विभाग भी है। ऐसे में राज्यपाल और राजभवन की सुरक्षा का दायित्व गहलोत के पास ही है। जहां तक पुलिस का सवाल है तो राजस्थान के पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र यादव, मुख्यमंत्री की मेहरबानी से ही टिके हुए हैं। गहलोत की सिफारिश से ही यादव का एक्सटेंशन हुआ। यही स्थिति मुख्य सचिव राजीव स्वरूप की भी है। रिटायरमेंट से तीन माह पहले राजीव स्वरूप को इसलिए मुख्य सचिव बनाया गया। यानि सम्पूर्ण सरकारी मशीनरी ही गहलोत का नियंत्रण है। सब जानते हैं कि गहलोत ने सचिन पायलट को कितनी गालियां दी हैं। पायलट के लिए गददार, निकम्मा, धोखेबाज, नकारा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। अब गहलोत के निशाने पर राज्यपाल मिश्र है। हालांकि पायलट ने अभी तक भी किसी गाली का जवाब गहलोत को नहीं दिया है। जहां तक राज्यपाल का सवाल है तो वे 24 जुलाई की हरकतों को देखते हुए केन्द्रीय सुरक्षा बलों की मांग कर सकते हैं, क्योंकि अभी तो राजभवन की सुरक्षा अशोक गहलोत की पुलिस के पास ही है। यदि अराजकतत्व राजभवन में प्रवेश करते हैं तो गहलोत की पुलिस उन्हें नहीं रोकेगी।
ऐसे कैसे गांधीवादी हैं?:
सब जानते हैं कि महात्मा गांधी ने अपने जीवनकाल में कोई सम्पत्ति अर्जित नहीं की। जिन्दगी भर एक धोती में गुजारा कर लिया। महात्मा गांधी के पुत्रों के बारे में भी कोई नहीं जनता। यदि कोई राजनेता स्वयं को महात्मा गांधी का अनुयायी बताए तो यह अच्छी बात है। सीएम गहलोत कई बार कह चुके हैं कि जीवन पर गांधीजी का प्रभाव है। अब किसी नेता के दावे को चुनौती तो नहीं दी जा सकती है, लेकिन यह सही है कि गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत रजनीकांत शर्मा के कारोबारी सांझेदार हैं। यह शर्मा वही है, जिन्होंने यश बैंक से 168 करोड़ रुपए का लोन ले रखा है और अब यह बैंक दिवालिया हो चुका है। जांच एजेंसियां अब यश बैंक के मालिक रहे राणा कपूर और रजनीकांत शर्मा के संबंधों की भी जांच कर रही है। अशोक गहलोत जैसे दिग्गज नेता के पुत्र के साथ कारोबार करने वाले रजनीकांत शर्मा के दोस्त राणा कपूर जैसे लोग ही होंगे। राणा कपूर ने वैभव गहलोत के सांझेदार रजनीकांत शर्मा को न केवल 168 करोड़ रुपए का लोन दिया बल्कि निश्चित समय पर भुगतान नहीं करने की स्थिति में लोन का विस्तार भी कर दिया। यश बैंक के लोन से ही शर्मा ने जयपुर में पांच सितारा सुविधा वाली होटल फेयरमोंट बनाई है। अब इसी होटल में अशोक गहलोत और 100 से भी ज्यादा उनके समर्थक विधायक तथा दिग्गज कांग्रेसी पिछले 15 दिनों से ठहरे हुए हैं। गहलोत इस होटल का उपयोग अपना समझ कर ही कर रहे हैं। इतना ही नहीं जांच एजेंसियां रजनीकांत शर्मा को मॉरिशस से आए 96 करोड़ रुपए की भी जांच कर रही है। राजभवन पर कब्जे से लेकर होटल फेयरमोंट के गड़बड़ झाले के बाद भी यदि गांधीवादी होने की दुहाई दी जाए तो स्वर्ग में बैठे मोहनदास करमचंद गांधी क्या कर सकते हैं।







