- इसलिए सिर्फ शक्ति परीक्षण का प्रस्ताव नहीं दिया जा रहा है।
- राज्यपाल के सवालों का जवाब देने में विलम्ब।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – भले ही राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी के नोटिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी हो, लेकिन सचिन पायलट के नेतृत्व में बगावत करने वाले कांग्रेस के 19 विधायक अभी भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निशाने पर है। गहलोत का पूरा प्रयास है कि दल बदल कानून के दायरे में लाकर इन बागियों की विधायकी छीन ली जाए। राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र न बुलाए जाने में सबसे बड़ी बाधा मंत्रिमंडल के प्रस्ताव की ही है। सीएम गहलोत मीडिया के सामने बार बार कह रहे हैं कि वे अपनी सरकार का बहुमत विधानसभा में साबित करना चाहते हैं, लेकिन राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। यदि सरकार को बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा का सत्र बुलाना है कि तो राज्यपाल के समक्ष एक लाइन का प्रस्ताव भेजा जा सकता है। इस प्रस्ताव में सिर्फ बहुुमत परीक्षण का उल्लेख होना चाहिए। लेकिन 23 जुलाई को सरकार की ओर से सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल को जो प्रस्ताव भेजा गया उसमें अनेक कारण बताए गए। असल में सीएम गहलोत चाहते हैं कि जब विधानसभा का सत्र शुरू हो तो किसी मुद्दे पर मतविभाजन करवाया जावे और तब व्हिप जारी कर दिल्ली में बैठे कांग्रेस के बागी विधायकों को अयोग्य करार दे दिया जाए। ऐसे में पायलट समर्थक विधायकों की विधायकी छीन जाएगी। सीएम गहलोत ने 24 जुलाई को राजभवन पर धरने के बाद मीडिया से कहा था कि रात को साढ़े 9 बजे मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है और इस बैठक में राज्यपाल ने जो सवाल किए हैं, उनके जवाब दिए जाएंगे और देर रात को ही राज्यपाल को दोबारा से मंत्रिमंडल का प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। लेकिन 25 जुलाई को दोपहर तक राज्यपाल के पास मंत्रिमंडल का प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका है। असल में राज्यपाल ने विशेष सत्र बुलाने के लिए जो सवाल किए हैं, वे कानूनी दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। हो सकता है कि सत्र बुलाने का मामला भी कोर्ट पहुंच जाए। ऐसे में राज्यपाल और सरकार के बीच जो सवाल जवाब हुए हैं, वे बहुत महत्वपूर्ण होंगे। राज्यपाल यह जानना चाहते हैं कि आखिर कोरोना काल में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की क्या जरुरत है? सरकार जब बहुमत का दावा कर रही है, तब शक्ति परीक्षण की क्या जरुरत है? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी विपक्षी दल के नेता ने कांग्रेस सरकार को बहुमत साबित करने की बात नहीं कही है और न ही सबसे बड़े दल भाजपा ने इस मुद्दे को राज्यपाल अथवा विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाया है। ऐसे में यह सवाल वाजिब है कि सरकार अपना बहुमत साबित क्यों करना चाहती है? जाहिर है कि सीएम गहलोत के निशाने पर अभी भी 19 बागी विधायक हैं। गहलोत नहीं चाहते कि पायलट और उनके समर्थक विधायक अब कांग्रेस विधायक बने रहे। पायलट समर्थक विधायकों की विधायकी छिनने के लिए ही गहलोत अब सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। 25 जुलाई को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालयों पर भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन किया। गहलोत का आरोप है कि भाजपा के केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश स्तर के नेता सचिन पायलट के माध्यम से कांग्रेस के विधायकों को 25-25 करोड़ रुपए में खरीद रहे हैं। गहलोत की ओर से कहा गया कि लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस ने प्रदेशवासियों ने प्रदर्शन किया है।







