भीलवाड़ा (प्रतिनिधी) – जिले में कार्यरत 1567 ग्राम पंचायत सहायक जिनकी प्रदेश में कुल संख्या 27000 है पिछले 14 वर्षों से राज्य सरकार से न्याय मांगने को प्रयासरत है लेकिन 2 विभागों में फसे पंचायत सहायकों की कोई सुनने वाला नहीं है। वर्तमान में ग्राम पंचायत सहायक कोरोना महामारी में लगभग 10 से 12 घंटे प्रतिदिन अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश में अब तक 11 पंचायत सहायक कोरोना महामारी की भेंट चढ़ चुके हैं और सैकड़ों की संख्या में संक्रमित चुके हैं,लेकिन वर्तमान में राज्य सरकार ने ना तो सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराई है ना ही किसी प्रकार के ग्राम पंचायत सहायकों के बीमा सुरक्षा संबंधी स्पष्ट आदेश जारी किए हैं।
ग्राम पंचायत सहायक मात्र 6000 मासिक में अपनी ड्यूटी पिछले 4 वर्षों से लगातार इस पद पर देते आ रहे हैं। पूर्व में विद्यार्थी मित्र के रुप में 8 वर्ष अपनी सेवाएं दे चुके हैं। जन घोषणा पत्र में कांग्रेस सरकार ने वादा किया था कि ग्राम पंचायत सहायकों को सम्मानजनक मानदेय के साथ नियमित किया जाएगा लेकिन वर्तमान में नियमित करना तो दूर इनका सम्मानजनक मानदेय भी नहीं किया गया है।
राजस्थान विद्यार्थी मित्र पंचायत सहायक संघ के पूर्व जिला उपाध्यक्ष भीलवाड़ा कमल टेलर ने बताया की 10 फरवरी को ग्राम पंचायत सहायकों के 12000 मासिक मानदेय किए जाने की पंचायती राज विभाग द्वारा छठ वे वित्त आयोग के गठन पर वित्त विभाग को एक परिपत्र जारी किया गया था जिसमें मानदेय 12000 किए जाने की अनुशंसा की गई थी। वर्तमान में छठ वे वित्त आयोग का गठन हो चुका है और कई मीटिंग भी हो चुकी है लेकिन अभी तक मानदेय वृद्धि नहीं हुई है। सत्र के बजट मैं मुख्यमंत्री जी ने स्वयं 10% मानदेय बढ़ाए जाने की घोषणा सदन में की है लेकिन अभी तक उसका आदेश भी जारी नहीं किया गया है। ग्राम पंचायत सहायकों के प्रति राज्य सरकार के नकारात्मक रवैया को लेकर प्रदेश के 27000 ग्राम पंचायत सहायकों में रोष व्याप्त है।
पिछले वर्ष भी प्रदेश के 27000 ग्राम पंचायत सहायकों के कोरोना महामारी में उत्कृष्ट कार्य किया था इसके साथ लगातार शिक्षा विभाग एवं पंचायती राज विभाग दोनों में अपनी सेवाएं निरंतर रूप से 10 से 12 घंटे प्रतिदिन देते आ रहे हैं। इस महंगाई के दौर में नरेगा श्रमिक से भी कम मानदेय ग्राम पंचायत सहायकों को दिया जा रहा है। वह भी पंचायती राज विभाग द्वारा समय पर नहीं दिया जाता है कोई अधिकारी नहीं सुनता
इसके अतिरिक्त दूरस्थ स्थानों पर ड्यूटी दिए जाने पर ना तो अतिरिक्त भत्ता दिया जाता है ना ही किसी प्रकार का परीलाभ दिया जाता है।। क्या 200 रु प्रतिदिन में आज की महंगाई में जीवन यापन संभव है क्या ??पिछले 14 वर्षों से राज्य सरकार विद्यार्थी मित्र पंचायत सहायकों की अनदेखी किए जा रही है। इस महामारी में सम्मानजनक मानदेय वृद्धि के साथ सरकार हमें नियमित करें और इस भयंकर महामारी में बीमा सुरक्षा संबंधी स्पष्ट आदेश जारी कर हमें यात्रा भत्ता दिए जाने के आदेश भी जारी करें।।






