- हजारों लीटर पानी बेकार। एक्सईएन शर्मा को लाइन टूटने की जानकारी ही नहीं।
- शहर के कई क्षेत्रों में 3-4 दिन में एक बार हो रही है पेयजल की सप्लाई।
- मजबूरी में खरीद रहे हैं पानी के टेंकर।
अजमेर (एस.पी.मित्तल) – मई माह की भीषण गर्मी के दौरान अजमेर शहर के कई इलाकों में तीन चार दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही है। कोटड़ा क्षेत्र से लेकर सिविल लाइन और वैशाली नगर तक की घनी आबादी में पेयजल को लेकर त्राहि त्राहि मची हुई है। लोगों को मजबूरन पानी के टेंकर खरीदने पड़ रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक वासुदेव देवनानी ने भी पानी की समस्या को लेकर कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित के समक्ष नाराजगी जताई है।
जब पानी की एक एक बूंद को लेकर मारा-मारी हो रही हो, तब 23 मई को सुबह 9 बजे पुष्कर रोड स्थित विश्राम स्थली की मुख्य सड़क पर पानी की पाइप लाइन टूट गई। हजारों लीटर पानी बेकार बह गया। जिस स्थान पर पाइप लाइन टूटी वह फॉयसागर रोड के फिल्टर प्लांट से मुश्किल से एक किलोमीटर दूर है। लेकिन विभाग के इंजीनियरों को इसकी जानकारी नहीं हुई। यदि इंजीनियरों को जानकारी होती तो तत्काल सप्लाई बंद कर पानी को व्यर्थ होने से बचाया जा सकता था। टूटी हुई पाइप लाइन से करीब एक डेढ़ घंटे तक फव्वारा निकलता रहा, लेकिन जलदाय विभाग का कोई इंजीनियर मौके पर नहीं आया। पाइप लाइन टूटने के बारे में दोपहर साढ़े बारह बजे विभाग के अधिशाषी अभियंता विष्णु प्रकाश शर्मा से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि मुझे लाइन टूटने की खबर नहीं है।
उन्होंने इस बात को अफसोस जनक बताया कि गर्मी के मौसम में पाइप लाइन टूटी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पिछले एक माह से सीवरेज लाइन का काम चल रहा है। जेसीबी मशीन सड़क को खोद रही हैं। 23 मई को भी सुबह जब खुदाई का काम हो रहा था, तभी पेयजल की पाइप लाइन टूट गई। असल में जलदाय विभाग और सीवरेज की लाइन बिछाने वाले विभाग के इंजीनियरों के बीच तालमेल ही नहीं है। सड़क खुदाई में पेयजल की पाइप लाइन की हिफाज करना दोनों विभागों के इंजीनियरों की जिम्मेदारी है, लेकिन अजमेर शहर के किसी भी विभाग के इंजीनियरों को चिंता नहीं है, इसलिए पाइप लाइन टूट गई। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब पानी की एक एक बंूद को लेकर लाखों लोग परेशान हो रहे हैं।
तब पाइप लाइन लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। क्या सीवरेज लाइन बिछाने वाले लापरवाह इंजीनियरों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? पानी की किल्लत को लेकर लोगों में पहले ही गुस्सा है। ऐसा नहीं कि बीसलपुर बांध में पानी की कमी हो। बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी है, लेकिन इसके बावजूद भी अजमेर शहर के कई इलाकों में 3-4 दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही है। इंजीनियरों का दावा है कि शहर के कई क्षेत्रों में दो दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई की जाती है। सवाल उठता है कि पानी की सप्लाई को लेकर एक समान नीति क्यों नहीं है? शहर के आधे हिस्से में दो दिन में और आधे हिस्से में तीन-चार दिन में पानी सप्लाई क्यों किया जा रहा है?






