चिकित्सा विज्ञान को मशहूर न्यूरो फिजीशियन डॉक्टर अशोक पनगड़िया को बचाना चाहिए।

कोरोना संक्रमित होकर जयपुर के इटरनल अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार सेहत बेहद खराब है।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के मशहूर न्यूरो फिजिशियन डॉक्टर अशोक पनगडिय़ा कोरोना संक्रमित होकर जयपुर के इटरनल अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं। 28 मई की जांच पड़ताल के बाद डॉ. पनगडिय़ा की सेहत बेहद खराब हैं। चिकित्सा विाान के लोगों को चाहिए कि डॉ. पनगडिय़ा को किसी भ तरह स्वास्थ्य किया जाए। एलोपैथी की वे सभी दवाइयां दी जाएं, जिससे डॉ. पनगडिय़ा को बचाया जा सके।

देश और प्रदेश को डॉ.पनगडिय़ा की सख्त जरुरत है। न्यूरो रोग के इलाज में डॉ. पनगडिय़ा का पूरे देश में नाम है। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक में बैठे लोग फोन पर संवाद कर अपना इलाज करवाते हैं। डॉ. पनगडिय़ा उन चुनिंदा चिकित्सकों में से एक हैं, जिन्होंने चिकित्सा विज्ञान को आध्यात्म से जोड़ा है। उन्होंने अखबरों में लेख लिख बताया कि इलाज के दौरान प्रार्थना का मरीज पर कितना असर होता है। कहा जा सकता है कि डॉ. पनगडिय़ा दिमाग से संबंधित रोगों का शर्तियां इलाज करते हैं। उनकी याददाश्त भी बहुत अच्छी है। यदि कोई मरीज 10 वर्ष बाद भी दिखाने आएगा तो डॉ. पनगडिय़ा पहचान लेंगे। कोरोना काल में तो पिछले एक डेढ़ वर्ष से वे ऑनलाइन तरीके से ही मरीजों का इलाज कर रहे थे।

मोबाइल पर रोग जानकार वे वाट्सएप पर दवाएं लिखकर भेजते थे। इसे डॉ. पनगडिय़ा पर ईश्वर की कृपा ही कहा जाएगा कि मोबाइल पर दवाएं लिखने से भी मरीजों को लाभ प्राप्त हो रहा है। ऐसे हजारों लोग मिल जाएंगे जिनका जीवन डॉ. पनगडिय़ा की वजह से ही बचा है। चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के कारण ही वर्ष 2014 में राष्ट्रपति ने पद्मश्री अवार्ड देकर डॉ. पनगडिय़ा को सम्मानित किया। चिकित्सा क्षेत्र का सर्वोच्च डॉ.वीसी राय अवार्ड भी डॉ. पनगडिय़ा को मिल चुका है। जिन चिकित्सकों को वाकई भगवान माना जाता है, उनमें डॉ. पनगडिय़ा एक हैं। डॉ. पनगडिय़ा की उम्र अभी 71 वर्ष ही है। इस उम्र को ज्यादा नहीं माना जा सकता।

कोरोना वायरस के बारे में चिकित्सक काफी कुछ जान चुके हैं। इटरनल अस्पताल के जो चिकित्सक डॉ. पनगडिय़ा का इलाज कर रहे हैं उनकी जिम्मेदारी है कि वे उन्हें जल्द से जल्द स्वास्थ्य करें। डॉ. पनगडिय़ा एक व्यक्ति नहीं है, बल्कि एक संस्था हैं जो हजारों लोगो ंका जीवन बचाती है। चूंकि डॉ. पनगडिय़ा मरीज के इलाज में ईश्वर से प्रार्थना का योगदान भी मानते हैं, इसीलिए मैं यह ब्लॉग लिख रहा हू जो लोग डॉ. पनगडिय़ा के इलाज से स्वास्थ्य हुए हैं या नया जीवन पाया है, उन सबकी जिम्मेदारी है कि डॉ. पनगडिय़ा के स्वास्थ्य को लेकर ईश्वर से प्रार्थना करें। मेरा मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग ईश्वर से प्रार्थना करेंगे तो इटरनल अस्पताल के चिकित्सकों को भी डॉ. पनगडिय़ा के इलाज करने में मदद मिलेगी।

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