कांग्रेस के घेराव का राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र पर असर नहीं।

  • विधायकों, पत्रकारों ओर विधानसभा कर्मियों की सुरक्षा का सवाल उठाकर विशेष सत्र की अनुमति नहीं दी।
  • सरकार के बहुमत परीक्षण का सवाल भी उठाया।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए दोबारा से जो प्रस्ताव भेजा था उसे भी राज्यपाल कलराज मिश्र ने ठकुरा दिया है। प्रस्ताव को ठुकराने से प्रतीत होता है कि 24 जुलाई को मुख्यमंत्री गहलोत के नेतृत्व में पांच घंटे तक राजभवन पर जो कब्जा किया,उसका राज्यपाल मिश्र पर कोई असर नहीं पड़ा है। राज्यपाल ने गहलोत सरकार का दूसरी बार प्रस्ताव तब ठुकराया है, जब कांग्रेस की ओर से 27 जुलाई को देशभर में राजभवनों के घेराव का ऐलान किया गया है। सीएम गहलोत कह रहे हैं कि गद्दार, मक्कार, धोखेबाज, नकारा चरित्र वाले सचिन पायलट की बगावत के बाद भी विधायकों का बहुत उनके साथ है। बहुमत साबित करने का कोई उल्लेख नहीं होता है। दोनों ही प्रस्तावों में कहा गया कि अनेक विधेयक मंजूर करवाने हैं तथा कोरोना संक्रमण पर विचार विमर्श करना है, इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र की अनुमति दी जाए। यही वजह है कि दूसरे प्रस्ताव को भी वापस भेजते हुए राज्यपाल मिश्र ने जानना चाहा है कि सत्र के दौरान जो विधायक, पत्रकार और विधानसभा के कार्मिक आएंगे, उनकी सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं? अनुमान है कि विधानसभा चलने पर करीब एक हजार लोग एकत्रित होंगे। कोरोना के संक्रमण के समय एक हजार लोगों का एक साथ एक ही स्थान पर एकत्रित होना जोखिम भरा होगा। सवाल यह भी कि क्या ऐसे सभी लोगों का कोरोना टेस्ट करवाया गया है? राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने से पहले पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करना चाहते हैं। राज्यपाल के निर्णय से राजभवन और सरकार के बीच टकराव और बढ़ेगा। मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्री पहले ही राज्यपाल पर दिल्ली का दबाव होने का आरोप लगा चुके हैं। सीएम गहलोत तो यहां तक कह चुके हैं कि यदि प्रदेश की जनता राजभवन का घेराव करने आएगी तो हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। सीएम की इस धमकी के बाद ही 26 जुलाई को राज्यपाल ने प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव स्वरूप और डीजीपी भूपेन्द्र यादव को तबल किया। राज्यपाल ने राजभवन की सुरक्षा इंतजामों के बारे में जानकारी ली। दोनों अधिकायिों ने राज्यपालको भरोसा दिलाया कि राजभवन प्रशासन की अनुमति के बाद ही किसी को प्रवेश दिया जाएगा। दोनों अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि राजभवन की पूर्ण सुरक्षा की जाएगी। राज्यपाल मिश्र के मूड को देखते हुए कांग्रेस ने भी 27 जुलाई को देशव्यापी आव्हान पर राजस्थान के राजभवन का घेराव नहीं किया।
बहुमत परीक्षण का सवाल भी उठाया:
राज्यपाल मिश्र ने सरकार के प्रस्ताव को दोबारा से लौटाते समय बहुमत परीक्षण का सवाल भी उठाया है। राज्यपाल की ओर से कहा गया है कि मीडिया में बार बार यह कहा जा रहा है कि विधानसभा सत्र में सरकार अपना बहुमत साबित करना चाहती है। राज्यपाल ने कहा कि सरकार यह स्पष्ट तौर पर बताए कि क्या विशेष सत्र के दौरान सरकार बहुमत परीक्षण भी करेगी? राज्यपाल का यह सवाल अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुमत परीक्षण के बाद प्रस्ताव में लिखकर नहीं दी जा रही है। इसके पीछे सरकार की मंशा पायलट गुट के 19 विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष से अयोग्य घोषित करवाने की है।

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