पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह भी सचिन पायलट के समर्थन में आए।

bhawar-jitendra-singh

  • जल्द पूरे हो वायदे, ताकि कार्यकर्ता संतुष्ट हो सकें।
  • जयपुर ग्रेटर की भाजपा मेयर को निलंबित करने से पहले कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा की सहमति नहीं ली गई।
  • पर अशोक गहलोत के पास 100 से ज्यादा विधायकों का जुगाड़ है।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) – 9 जून को पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के प्रमुख नेता भंवर जितेन्द्र सिंह भी पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समर्थन में आ गए हैं। जितेन्द्र सिंह ने ट्वीट कर कहा है कि पायलट भी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। ऐसे में उनके साथ जो वायदे किए गए उन्हें जल्द पूरा किया जाना चाहिए, ताकि वे भी अपने कार्यकर्ताओं को संतुष्ट कर सके। उन्होंने राजनीतिक नियुक्तियों को भी जल्द पूरा करने की बात कही।

जितेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने जैसी कोई बात नहीं है। सब जानते हैं कि प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति में सचिन पायलट ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रतिद्वंदी हैं। ऐसे में भंवर जितेंद्र सिंह का बयान राजनीतिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है। जीतेन्द्र सिंह भरतपुर संभाग में राजनीति करते हैं, लेकिन सब जानते हैं कि सीएम गहलोत ने भरतपुर संभाग को पहली बार विधायक और मंत्री बने सुभाष गर्ग को सौंप रखा है। गर्ग की कार्यशैली की आलोचना पायलट के समर्थक विधायक भी करते रहे हैं। शायद सुभाष गर्ग के व्यवहार से जीतेन्द्र सिंह भी खुश नहीं है। यही वजह रही कि जितेन्द्र सिंह ने पायलट के समर्थन में खुलकर बयान दिया है। 8 जून को ही पायलट ने समन्वय समिति और दस माह पूर्व किए गए वादों का मुद्दा उठाया था। पायलट ने कहा कि 10 माह पहले जो वायदे किए गए थे उन्हें अभी तक भी पूरा नहीं किया गया है। ऐसी नाराजगी पायलट पहले भी दिखा चुके हैं, लेकिन कांग्रेस का नेतृत्व करने वाले गांधी परिवार और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर कोई असर नहीं हुआ है।

डोटासरा की सहमति नहीं:
जयपुर ग्रेटर की भाजपा की मेयर सौम्या गुर्जर को निलंबित करने का मामला पूरी राजनीतिक मामला है, लेकिन निलंबन से पहले सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से सहमति नहीं ली गई। यदि डोटासरा से राय ली जाती तो सौम्या गुर्जर का निलंबन नहीं होता। निलंबन के बाद अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है। निलंबन के बाद डोटासरा का कहना है कि इस घटनाक्रम से बचा जा सकता था। डोटासरा ने यह कथन जाहिर करता है कि सौम्या गुर्जर के निलंबन से डोटासरा खुश नहीं है। उल्लेखनीय है कि मेयर का निलंबन नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की आपसी सहमति से हुआ है।

100 से ज्यादा विधायकों का जुगाड़:
कांग्रेस के असंतुष्ट नेता सचिन पायलट चाहे कितने भी बयान दे दें, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास 100 से ज्यादा विधायकों का जुगाड़ अभी भी बना हुआ है। विधानसभा में बहुमत के लिए सौ विधायक चाहिए। सूत्रों की मानें तो गहलोत के पास 110 विधायकों का जुगाड़ है। इन 110 विधायकों में सचिन पायलट के समर्थक माने जाने वाले 18 विधायक शामिल नहीं हैं। यानी सीएम गहलोत ने निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों का समर्थन ले रखा है। गत वर्ष जब सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 विधायक दिल्ली चले गए थे, तब सीएम गहलोत ने होटलों में 110 से भी ज्यादा विधायकों की गिनती करवाई थी। चूंकि गहलोत को सौ से ज्यादा विधायकों का समर्थन है, इसलिए सचिन पायलट के बार बार दिए जाने वाले बयानों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

यह बात अलग है कि दिसंबर 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाने में पायलट की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। वर्ष 2008 से 13 तक के कार्यकाल में भी कांग्रेस सरकार का नेतृत्व अशोक गहलोत ने ही किया था। लेकिन दिसंबर 2013 में हुए चुनावों में कांग्रेस को 200 में से मात्र 21 सीटें मिली। कांग्रेस की इतनी दुर्गति के बाद ही सचिन पायलट ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद संभाला और भाजपा शासन में लगातार संघर्ष करते हुए दिसंबर 2018 के चुनाव में करीब 100 सीटों पर जीत हासिल की। लेकिन ऐन मौके पर गांधी परिवार ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बना दिया और तभी से पायलट और गहलोत ने खींचतान चली आ रही है।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here