- अजमेर शहर में बड़ी आबादी को भीषण गर्मी में चार दिन में एक बार कम प्रेशर से मात्र एक घंटे पेयजल सप्लाई हो रही है।
- अजमेर की जनता न तो बेवकूफ है और न ही यहां के पॉलिटिशियन धूर्त।
- प्रशासनिक अधिकारी और इंजीनियर हो रहे हैं निरंकुश।
अजमेर (एस.पी.मित्तल) – ब्रिटेन में समालोचक रहे जॉर्ज बर्नार्ड शा ने कहा है कि जिस शहर की जनता बेवकूफ होती है, उस शहर के धूर्त और बेईमान पॉलिटिशियन मक्खन से रोटी लगाकर खाते हैं। संभवत: बर्नार्ड शा ने यह बात तब लिखी होगी जब ब्रिटेन के धूर्त और बेईमान पॉलिटिशियन भारत सहित दुनिया भर में राज कर रहे होंगे। तब उन्होंने देखा कि अंग्रेज किस प्रकार ब्रेड पर मक्खन लगा कर खा रहे हैं। जार्ज बर्नार्ड शा का यह कथन अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अजमेर शहर पर तो लागू होता ही नहीं है। क्योंकि शहर की एक बड़ी आबादी को भीषण गर्मी में चार-पांच दिन में एक बार कम प्रेशर से मात्र एक घंटे के लिए पेयजल की सप्लाई होने के बाद शरीर में गर्मी का अहसास नहीं हो रहा है।
जनता इससे ज्यादा सहनशील क्या हो सकती है। इसी वर्ष जब जनवरी में वार्ड पार्षद के चुनाव हुए थे, तब कैसे कैसे वायदे किए। स्वयं को ही सबसे ईमानदार, सेवाभावी, वफादार बताया था। वायदे करने वाले 80 पार्षद बने भी, लेकिन अब जब उत्तर विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश भागों में चार-पांच दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही है तो ऐसे सेवाभावी पार्षद कहीं भीनजर नहीं आ रहे है। शायद अब ऐसे सेवाभावी स्वयं की सेवा करने में व्यस्त है। जहां तक क्षेत्रीय भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी का सवाल है तो उन्होंने अखबारों में बयान देकर जिला प्रशासन से लेकर जलदाय विभाग के इंजीनियरों तक आग के गोले बरसा दिए हैं। अब यदि स्मार्ट सिटी के इंजीनियर अपनी जेसीबी से पुष्कर रोड पर बार बार पाइप लाइन तोड़ देंगे तो देवनानी स्वयं मरम्मत का काम तो नहीं करेंगे? एक जागरुक जनप्रतिनिधि के नाते देवनानी अखबारों में बयान ही दे सकते हैं।
वैसे भी राज्य में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए भाजपा विधायकों की कोई सुनवाई नहीं होती है। जहां तक सांसद भागीरथ चौधरी का सवाल है तो पानी की समस्या उनके गृह शहर किशनगढ़ की नहीं है। यह समस्या अजमेर शहर की है। भले ही अजमेर शहर उनके संसदीय क्षेत्र में आता है, लेकिन पानी की समस्या का समाधान कर राज्य सरकार का काम है। वे तो लोकसभा के सांसद हैं और लोकसभा में बड़े बड़े कानून बनाने का काम होता है। जहां तक दक्षिण क्षेत्र की भाजपा विधायक अनिता भदेल का सवाल है तो पानी की मौजूदा समस्या उत्तर क्षेत्र की है। इस समस्या के समाधान की जिम्मेदारी देवनानी की है। क्या कभी देवनानी ने दक्षिण क्षेत्र की किसी समस्या का समाधान करवाया है? जिम्मेदारी तो शहर की प्रथम नागरिक और मेयर श्रीमती ब्रजलता हाड़ा की भी है, लेकिन हाड़ा की तो नगर निगम में ही सुनवाई नहीं हो रही। जहां तक सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं का सवाल है तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट का झगड़ा निपटने पर ही अजमेर में भी झगड़ा खत्म होगा।
वैसे अजमेर की कांग्रेसियों की स्थिति भी विपखी नेताओं जैसी है। यंू तो जिले के कांग्रेसी विधायक रघु शर्मा प्रदेश के चिकित्सा मंत्री हैं, लेकिन इन दिनों में उच्च स्तरीय राजनीति में व्यस्त हैं। उन्हें लगता है कि गहलोत और पायलट के झगड़े में गांधी परिवार रघु शर्मा को राजस्थान का मुख्यमंत्री बना देगा। कोई ढाई वर्ष तक लोकसभा का सांसद रहते हुए दिल्ली में राहुल गांधी से सीधी एप्रोच हो गई है। अजमेर के प्रशासनिक अधिकारियों और इंजीनियरों की पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाही में है। इंजीनियर खुलेआम बयान दे रहे हैं कि पुष्कर रोड पर पेयजल की पाइप लाइन आगामी एक माह तक ऐसी ही टूटती रहेंगी। पुष्कर रोड पर सीवरेज की लाइन बिछाई जा रही है। सीवरेज के पाइप बिछाने के लिए सड़क को 10 फुट नीचे तक खोदा जा रहा है। जबकि जलदाय विभाग की लाइन तीन-चार फीट नीचे ही हैं। मिट्टी का बेस हटने से पेयजल की पाइप लाइन के ज्वाइंट टूट जाते हैं।
इंजीनियरों के ऐसे बयानों के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी चुप है। हकीकत यह है कि 10 फिट नीचे तक सड़क खोदने के समय संबंधित विभागों के इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहतेे। जेसीबी का चालक और हेल्पर ही इंजीनियरों की भूमिका निभाते हैं। जेसीबी पर बैठा चालक जजमीन नहीं देख पाता और पाइप लाइन टूट जाती है। पाइप लाइन की मरम्मत में पूरा दिन लगा दिया जाता है। अजमेर के उत्तर क्षेत्र के अधिकांश भागों में चार-पांच दिन में एक बार पेयजल सप्लाई होने पर लोग चाहे कितने भी परेशान हो, लेकिन जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और इंजीनियरों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। जलदाय विभाग का तो पूरी तरह भट्टा ही बैठा हुआ है।






