मोहम्मद यूसुफ खान से दिलीप कुमार बने ट्रेजेडी किंग को हमने आंखों की पलकों पर बैठाया। यह भारतीयता है।

देश की आजादी के लिए जेल भी गए यूसुफ खान।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) : मुम्बइयाrip फिल्मों के मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार (98) का 7 जुलाई को सुबह मुंबई स्थित हिन्दुजा अस्पताल में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिलीप साहब के निधन पर संवेदना व्यक्त की है। सब जानते हैं कि दिलीप साहब का जन्म 11 दिसम्बर 1922 को पेशावर में हुआ था। तब पेशावर भी भारत में ही आता था।

उनका असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान था, लेकिन फिल्मों में सफलता पाने के लिए उन्होंने अपना नाम बदल लिया। यूसुफ खान उन मुसलमानों में शामिल रहे जिन्होंने 1947 में विभाजन के समय भारत में रहने का संकल्प लिया। वे उस पाकिस्तान में नहीं गए, जिसकी बुनियाद ही धर्म के आधार पर रखी गई थी। भारत में रह कर दिलीप साहब ने फिल्मों में शोहरत प्राप्त की। हो सकता है कि ऐसी शोहरत यूसुफ खान को पाकिस्तान में नहीं मिलती। हमने दिलीप साहब को आंखों की पलकों पर बैठाया, इसलिए लोगों ने उन्हें ट्रेजेडी किंग भी उपाधि दी। यह है भारतीयता।

इस भारतीयता को यूसुफ खान ने सही तरीके से पहचाना। मौजूदा दौर के आमिर खान जैसे फिल्म अभिनेता भले ही दो बीवियों से तलाक के बाद तीसरे निकाह की तैयारी कर रहे हों, लेकिन यूसुफ खान ने जिन शायरा बानो से निकाह किया उसे अंतिम सांस तक अपनी बेगम बनाए रखा। शायरा बानो पिछले 55 वर्षों से यूसुफ खान की पत्नी का धर्म निभा रही है। 7 जुलाई को सुबह अंतिम सांस के अवसर पर शायरा बानो ही अस्पताल में उपस्थित थीं। यूसुफ खान के इंतकाल पर करोड़ों भारतीय गमजदा हैं।

भारत में लोकप्रिय होने के कारण ही यूसुफ खान को पाकिस्तान में निशान-ए-इम्तियाज अवार्ड से नवाजा गया। हालांकि यूसुफ खान को भारत में फिल्मों के सबसे बड़े दादा साहेब फाल्के अवार्ड से नवाजा गया। भारत सरकार ने भी दिलीप साहब को पदमश्री, पदमविभूषण आदि पुरस्कार दिए हैं। यूसुफ खान ने अपनी बायोग्राफी में लिखा है कि अंग्रेजों की हुकूमत में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। पुणे के एक जलसे में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया। इस समर्थन के कारण ही अंग्रेजों ने जेल में डाल दिया। 7 जुलाई की शाम को मुंबई में जूह स्थित कब्रिस्तान में यूसुफ खान का शव सुपुर्द-ए-खाक किया गया। दिलीप साहब ने हिन्दी फिल्मों में जो अभिनय किया उसे वर्षों तक याद किया जाएगा। मुंबईयां फिल्मों में दिलीप साहब का रिक्त स्थान भरना मुश्किल है।

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