कलम से – चार्ल्स थे कमाल के

    बरसो बीत गए, पर आज भी नहीं
    भूले है लोग जिसको, वो *मशहूर
    कलाकर *चार्ल्स चैपलिन ही थे

    1889 में जन्मे थे *चार्ल्स स्पेंसर
    चैपलिन जी *कॉमिक *एक्टर ने
    खुद कंपोज कर बिना आवाज के
    बोहत* जबरदस्त* फ़िल्मे बनाई
    घुग्गा को चार्ल्स की फिल्में हमेशा
    ही पसंद आई तभी तो खुश होकर
    चार्ल्स चैपलिन की याद में *घुग्गा
    की भी *अब तो *कमल चल पाई

    1977 में दुनिया से *अलविदा हो
    कर भी आज तक घुग्गा और पूरी
    दुनिया को अब तक *हसाते आए
    लोग कहते है, चार्ल्स थे कमाल के

    घुग्गा को ऐसा लगता है, जब तक
    सूरज और चांद रहेगा, तब चार्ल्स
    चैपलिन का *दुनिया में नाम रहेगा

    अमरजीत सिंह (घुग्गा), पटियाला
    9915001316

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