बॉलिवूड कलम से – जानी का मीना को सलाम

    में तो बोहत ही *जबरदस्त
    अदाकार हुए है, कुछ तो *खो गए
    तंग गलियों में और *कुछ *महान
    अदाकारो ने रूब के पास जा कर
    अपने अपने महल बनाए, अक्सर
    हवाओं से ही *घुग्गा सुनते है कि
    राजकुमार *जानी जी और *मीना
    कुमारी जी ने भी रूब के पास जा
    कर *इक दूसरे के *सामने *अपने
    अपने *घर बनाए, *मिल ना सके
    जो जमीन पर *दोनों लेकिन सच्चे
    रूब की *मेहरबानी से *इक दूसरे
    को मिल पाए रोज शाम 5 बजे ही
    जानी का मीना को सलाम होता है

    दोनो *साथ में *चाए पीते है, और
    घुग्गा की बाते करते है, काश तब
    घुग्गा जी *लेखक होते, जब *हम
    दोनो जिंदा थे, तब *जानी *घुग्गा
    और *मीना तीनों मिल कर दिल्ली
    के *अशोका होटल में खाना खाते
    और फिर *मुंबई के *समुंदर की
    लहरों का किसी खास नाव में बैठ
    कुदरत के नजारे का लुत्फ़ उठाते

    अमरजीत सिंह (घुग्गा), पटियाला
    9915001316amarjeet-singh

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