संसद को नहीं चलने देने वाले विपक्ष ने अब मानसून सत्र को दो दिन पहले खत्म करने पर नाराजगी जताई।

  • राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला। मार्च में मीडिया कर्मियों की ज्यादा भीड़।
  • कांग्रेस महासचिव अजय माकन और सुरजेवाला का भी ट्विटर अकाउंट भी ब्लॉक।
  • सोनिया गांधी की समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे भी उपस्थित रहेंगे।

अजमेर (एस.पी.मित्तल) : जिस विपक्ष ने 19 जुलाई से संसद सत्र को चलने नहीं दिया, वही विपक्ष अब मानसून सत्र को दो दिन पहले समाप्त करने पर नाराजगी जता रहा है। 12 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद भवन से विजय चौक तक पैदल मार्च निकाला गया, इससे पहले विपक्षी नेताओं ने संसद भवन में राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडग़े के कक्ष में बैठक की और संसद के मानसूत्र सत्र को दो दिन पहले ही समाप्त करने को लेकर नाराजगी जताई।

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल संसद से भाग रहा है। मालूम हो कि मानसून सत्र को 13 अगस्त तक चलना था, लेकिन प्रतिदिन स्थगन की स्थिति को देखते हुए 11 अगस्त को ही दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। पैदल मार्च करने वाला यह सही विपक्ष है जिसने गत 19 जुलाई से एक दिन भी सदन को चलने नहीं दिया। रोजाना किसी न किसी मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया गया, जिसकी वजह से सुचारू संचालन नहीं हो सका। हर रोज संसद को स्थगित करना पड़ा। जब संसद को चलने ही नहीं दिया जा रहा है, तब मानसून सत्र को दो दिन पहले समाप्त करने पर एतराज क्यों किया जा रहा है?

विपक्षी दल यदि $कृषि कानूनों, पेगासस जासूसी प्रकरण, बढ़ती महंगाई, तेल कीमतों में लगातार वृद्धि आदि के मुद्दों पर संसद में मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करता है तो यह देशहित में होता। देशवासियों को विपक्ष के तर्क और सरकार का जवाब भी सुनने को मिलता। सरकार ने संसद सत्र शुरू होने से पहले ही कहा था कि वह विपक्ष के हर मुद्दे पर बहस करवाने को तैयार है, लेकिन विपक्ष के रवैये से लगता है कि विपक्ष खुद ही नहीं चाहता था कि संसद चले। राहुल गांधी और विपक्षी दलों का मकसद सिर्फ मीडिया में बने रहना रहा। इसलिए कभी चाय पार्टी रखी गई तो कभी साइकिल चलवाई गई। विपक्ष के नेता बहार तो तमाशा करते रहे, लेकिन संसद के अंदर मोदी सरकार को घेरने का कोई प्रयास नहीं किया।

अक्सर सत्तारूढ़ दल संसद से भागता है, लेकिन इस बार विपक्ष भागता नजर आया है। सब जानते हैं कि इस बार विपक्ष ने संसद की गरिमा को भी गिराया है। संसदगण संसद की बेंचों पर चढ़ गए और रूल बुक को फेंक दिया। अपराधियों की तरह कागजों को सभापति की ओर फेंका गया। राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की तो आंखों में आंसू आ गए। विपक्ष के आचरण को देखने से साफ जाहिर था कि वह मोदी सरकार के विरुद्ध ईर्ष्या भाव से काम कर रहा है। क्या देश में कुछ लोगों को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने, अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनवाने, मुस्लिम महिलाएं के शोषण के प्रति तीन तलाक पर कानून बनाने जैसे कार्य पसंद नहीं हैं? देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन सामग्री और नि:शुल्क कोरोना वैक्सीन देने की उपलब्धियां कम है?

माकन और सुरजेवाला का अकाउंट ब्लॉक:
आपत्तिजनक टिप्पणियां करने को लेकर कांग्रेस के राष्ट्र महासचिव अजय माकन और रणदीप सिंह सुरजेवाला का ट्विटर अकाउंट भी ब्लॉक कर दिया गया है। इससे पहले बलात्कार और हत्या की शिकार एक नाबालिग बच्ची की पहचान उजागर को लेकर राहुल गांधी का भी ट्विटर अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया था। कांग्रेस के कहना है कि यह सब केन्द्र सरकार के दबाव में किया जा रहा है।

सोनिया की बैठक में ठाकरे भी:
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी 20 अगस्त को कांग्रेस शासित मुख्यमंत्रियों की बैठक लेंगी। इस बैठक में कांग्रेस की सरकार के कामकाज की समीक्षा होगी। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पंजाब के कैप्टन अमरेन्द्र सिंह तथा छत्तीसगढ़ के भूपेश बघेल उपस्थित रहेंगे। इस बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विशेष तौर से भाग लेंगे। हालांकि महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में उद्धव ठाकरे की सरकार चल रही है, लेकिन ठाकरे सरकार को कांग्रेस का भी समर्थन है। चूंकि कांग्रेस के समर्थन से सरकार चला रहे हैं, इसलिए उद्धव ठाकरे भी सोनिया गांधी की बैठक में भाग लेंगे।

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