राजस्थान के छह बसपा विधायको का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बीच फंसा। क्या एक ही मुद्दे पर एक ही दिन में दोनों कोर्ट में सुनवाई हो सकती है?

हाईकोर्ट की एकल पीठ स्टे प्रार्थना पत्र पर निर्णय देगी, तो वहीं बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय और ट्रांसफर एप्लीकेशन पर 11 अगस्त को ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई।
जयपूर (एस.पी.मित्तल) – क्या एक ही मुद्दे पर एक ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है? यह सवाल इसलिए उठा है कि राजस्थान के 6 बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के प्रकरण में 11 अगस्त को जयपुर में हाईकोर्ट की एकल पीठ तथा 11 अगस्त को ही सुप्रीम कोर्ट में तीन सदस्यीय खंडपीठ में सुनवाई होगी। महत्वपूर्ण बात ये है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इंन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने विगत दिनों एकलपीठ को सुझाव दिया कि भाजपा विधायक मदन दिलावर ने बसपा विधायकों के विधानसभा में वोट देने पर रोक लगाने तथा विधानसभा अध्यक्ष के विलय के आदेश रद्द करने का जो स्टे प्रार्थना पत्र दायर कर रखा है, उस पर निर्णय दे दिया जाए। चूंकि खंडपीठ के दिशा निर्देश हैं, इसलिए माना जा रहा है कि 11 अगस्त को एकल पीठ महत्वपूर्ण निर्णय दे देगी। हाईकोर्ट ने बसपा विधायकों के प्रकरण की सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है कि 10 अगस्त को सभी 6 विधायकों ने अपना जवाब प्रस्तुत कर दिया है। यानि अब दिलावर के स्टे प्रार्थना पत्र पर निर्णय देेने में कोई बाधा नहीं है। यह बात अलग है कि इसी प्रकरण में 10 अगस्त को ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र दाखिल कर दिया है। इधर 11 अगस्त को एकलपीठ के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है तो उधर सुप्रीम कोर्ट में भी इसी मुद्दे पर 11 अगस्त को सुप्रीम सुनवाई होनी है। भाजपा विधायक मदन दिलावर ने ही सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की है। इस याचिका में बताया गया है कि राजस्थान विधानसभा का सत्र 14 अगस्त से शुरू होना है, इसलिए बसपा विधायकों के मामले में कोर्ट का निर्णय जल्द आना चाहिए। 10 अगस्त को जब दिलावर की याचिका पर जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बैंच सुनवाई कर रही थी कि तभी दिलावर के वकील हरीश साल्वे ने बैंच को बताया कि बसपा के विधायकों में पूरे प्रकरण को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने का प्रार्थना पत्र भी दायर कर रखा है। बसपा विधायकों के इस प्रार्थना पत्र पर 11 अगस्त को सुनवाई निर्धारित है। इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अब दोनों याचिकाओं पर 11 अगस्त को ही सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट के 10 अगस्त के निर्णय के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या एक ही मुद्दे पर एक ही दिन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है? जानकारों के अनुसार ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है। हो सकता है कि हाईकोर्ट की एकलपीठ 11 अगस्त को स्वविवेक से ही मामले की सुनवाई टल दे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई ही महत्वपूर्ण होगी। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के बहुमत परीक्षण में बसपा के 6 विधायकों का वोट बहुत मायने रखता है। चूंकि कांग्रेस के 19 विधायक बगावत पर उतारू है, इसलिए बहुमत परीक्षण के समय 6 विधायकों के वोट गहलोत सरकार की स्थिति को मजबूत करेंगे। यही वजह है कि भाजपा चाहती है कि बसपा के विधायकों का कांग्रेस में विलय रद्द हो जाए। चूंकि बसपा ने अपने विधायकों को कांग्रेस के विरोध में वोट देने का व्हिप जारी कर दिया है, इसलिए यदि विधानसभा अध्यक्ष का विलय वाला आदेश रद्द होता है तो फिर बसपा के विधायक विधानसभा में कांग्रेस के पक्ष में वोट नहीं दे सकेंगे

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