मुंबई (उपसंपादक इकबाल पटेल) : मुंबई पुलिस के ज़ोन 12 की डीसीपी स्मिता पाटिल के मार्गदर्शन में अधिकारियों ने मिलकर एक बाल अपहरण मामले को सुलझाया और मात्र 38 दिन के शिशु को बचाने में सफलता प्राप्त की। इस मामले में मलाड पश्चिम के मालवणी इलाके से दो महिलाओं सहित कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह घटना 1 मार्च को घटी थी। गोरेगांव में मृणाल ताई फ्लाईओवर के नीचे से बच्चे का अपहरण किया गया, जहां वह अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ सो रहा था, सुबह जागे तो उन्होंने अपने बच्चे को लापता पाया। उन्होंने तुरंत वनराई पुलिस से संपर्क किया, पुलिस ने तुरंत शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
जोन 12 की डीसीपी स्मिता पाटिल के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल के आस-पास लगे सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले तब सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि अपहरण में एक नए मॉडल का ऑटो रिक्शा इस्तेमाल हुआ है और रिक्शा चालक ने पीले रंग की हुडी पहनी थी। हालांकि, रिक्शा का रजिस्ट्रेशन नंबर स्पष्ट नहीं था। वाहन की पहचान करने के लिए पुलिस ने आरटीओ से संपर्क कर पिछले 18 महीनों में मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में रजिस्टर हुए नए ऑटो रिक्शाओं का डेटा प्राप्त किया, जिसमें लगभग 11,000 रिक्शा शामिल थे।
इसके बाद पुलिस ने इन रिक्शा मालिकों के मोबाइल नंबर और उनकी लोकेशन का विश्लेषण किया, जिससे संदिग्ध नंबरों की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस टीमों ने कई जगह छापेमारी करने के बाद बच्चे को मलाड के मालवणी इलाके में एक घर से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है। राजू भानुदास मोरे (47) – मुख्य आरोपी और ऑटो रिक्शा चालक, मंगल राजू मोरे (35) – राजू मोरे की पहली पत्नी, फातिमा जिलानी शेख (37) – राजू मोरे की दूसरी पत्नी, आसिफ उमर खान (42) – पेशे से प्लंबर और बच्चा खरीदने के सौदे में शामिल
अपहरण की साजिश किसने और कैसे बनाई।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि ऑटो रिक्शा चालक राजू मोरे और उसकी दूसरी पत्नी फातिमा शेख ने मिलकर बच्चे का अपहरण किया था। अपहरण के बाद, मंगल मोरे ने घर पर बच्चे की देखभाल की, ताकि पड़ोसियों को शक न हो। चौथा आरोपी, आसिफ खान, कथित तौर पर एक बच्चे की मांग कर रहा था और इसके बदले वह ₹5 लाख देने को तैयार था। इस गिरोह ने अपहरण की योजना बनाई, लेकिन बच्चे को बेचने से पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की मेहनत लाई रंग
डीसीपी स्मिता पाटिल ने बताया कि पुलिस के पास 11,000 ऑटो रिक्शाओं के डेटा और सीसीटीवी फुटेज के अलावा कोई ठोस सुराग नहीं था, लेकिन उनकी टीम ने कड़ी मेहनत कर तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से आरोपियों का पता लगाया और बच्चे को सुरक्षित बरामद कर केस सुलझा लिया







