अहमद पटेल की अध्यक्षता वली तीन सदस्यीय कमेटी फिलहाल जयपुर नहीं आएगी।

  • राजस्थान में सत्ता और संगठन में बदलाव के भी आसार नहीं।
  • तो फिर सचिन पायलट की सक्रियता के क्या मायने हैं?
  • अभी तो प्रभारी महासचिव अजय माकन सातों संभाग मुख्यालयों पर जाकर लोगों से मिलेंगे और फिर 39 जिलों के
  • कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। हो सकती है अशोक गहलोत और सचिन पायलट समर्थकों में जोर आजमाइश।

जयपूर (एस.पी.मित्तल) – सचिन पायलट के समर्थकों को उम्मीद थी कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय कमेटी जल्द ही जयपुर का दौरा करेगी और पायलट को दोबारा से सरकार तथा संगठन में महत्व मिलेगा। स्वयं पायलट ने भी कहा था कि दिल्ली में हाईकमान के साथ जो संवाद हुआ है, उसमें उन्हें अपना काम पूरा कर दिया है। यानि विधानसभा में अशोक गहलोत सरकार ने बहुमत साबित कर दिया है। लेकिन अब प्रभारी महासचिव अजय माकन के ताजा बयान से पायलट के समर्थकों को निराशा हाथ लगी है।
एक अखबार को दिए इंटरव्यू में माकन ने साफ कहा है कि फिलहाल कमेटी का जयपुर दौरा नहीं होगा। कमेटी के दौरे से पहले वे राजस्थान के सभी सात संभाग मुख्यालयों में जाकर लोगों से संवाद करेंगे। इसके बाद प्रदेश के 39 जिला संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। जब प्रदेशभर की जानकारियां मेरे पास होंगी, तब कमेटी की बैठक में तर्क संगत तरीके से अपनी बात रख सकूंगा। अंदाजा लगाया जा सकता है कि सात संभाग मुख्यालयों पर जाकर लोगों से मुलाकात और फिर 39 जिला संगठनों के कार्यकर्ताओं से मुलाकात में कितना समय लगेगा। यानि मंत्रिमंडल विस्तार आदि की अटकलें भी धरी रह गई हैं। अब यदि अजय माकन संभाग मुख्यालयों पर दरबार लगाएंगे तो गहलोत और पायलट के समर्थकों में जोर आजमाइश होगी ही। कुछ समर्थक गहलोत जिंदाबाद तो कुछ लोग पायलट जिंदाबाद के नारे लगाएंगे। यही स्थिति 39 जिला संगठनों के कार्यकर्ताओं से मुलाकात के समय भी होगी। पिछले सात वर्षों में पायलट द्वारा नियुक्त जिलाध्यक्ष और पदाधिकार ही काम कर रहे थे। प्रदेश संगठन की भी यही स्थिति थी। लेकिन पायलट के हटाए जाने के बाद नए प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश कार्यकारिणी के साथ साथ 39 जिला संगठन भी भंग कर दिए।
फिलहाल प्रदेशभर में कांग्रेस का जिला संगठन नहीं है। अजय माकन के ताजा बयान से सीएम अशोक गहलोत के समर्थक खुश हो सकते हैं। क्योंकि अभी वो ही होगा, जो गहलोत चाहेंगे। भले ही गहलोत भी अपने समर्थकों को मंत्री पद या संगठन के पदाधिकारी नहीं बनवा सकें, लेकिन मुख्यमत्री रहते हुए अपने समर्थक विधायकों को संतुष्ट रख सकते हैं। मौजूदा समय में सचिन पायलट का सरकार और संगठन में कोई दखल नहीं है। पायलट कांग्रेस के 107 विधायकों में से एक विधायक हैं। हालांकि प्रदेश में अभी पायलट की लोकप्रियता बनी हुई है। लेकिन देखना होगा कि पायलट सरकार और संगठन से कब तक दूर रहते हैं।
14 अगस्त को विधानसभा में गहलोत सरकार के बहुमत साबित करने के बाद पायलट ने कहा था कि हमने अपनी बीमारी (समस्या) दिल्ली में सही डॉक्टर (राहुल गांधी) को बता दी है। अब इलाज भी हो जाएगा। लेकिन अजय माकन के ताजा बयान से नहीं लगता कि दिल्ली के डॉक्टर को इलाज करने की जल्दी है। डॉक्टर साहब ने अभी सिर्फ अविनाश पांडे की जगह अजय माकन की ही नियुक्ति की है। यानि सिर्फ कम्पउंटर बदला है और नया कम्पाउंडर अभी बीमारी के कारणों का पता लगा रहा है। अजय माकन भले ही प्रदेशव्यापी दौरा करें, लेकिन सचिन पायलट ने 20 अगस्त को ही कहा है कि तीन वर्ष बाद कांग्रेस तभी सत्ता में आएगी, जब दो वर्ष पहले किए चुनावी वायदों को मौजूदा सरकार पूरा करेगी। सवाल है कि आखिर गहलोत सरकार चुनावी वायदों को पूरा क्यों नहीं करती?

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